अगर आप एक निवेशक है या शेयर मार्केट में रुचि रखते है तो आपने कभी न कभी यह अनुभव किया होगा कि किसी स्टॉक में अचानक से बहुत बड़ी रैली या गिरावट आ जाती है। यह अक्सर मार्केट में अफवाहों की वजह से होता है। हालांकि, सेबी ने 21 मई 2024 को ऐसे ही मामलों से निपटने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं और ‘अनअफेक्टेड प्राइस’ (Unaffected Price) का कांसेप्ट पेश किया है।
आइए देखें कि यह अनअफेक्टेड प्राइस क्या है और ये दिशानिर्देश मार्केट में स्थिरता लाने में कैसे मदद कर सकते है साथ ही, यह कदम निवेशकों के लिए कैसे फायदेमंद हो सकता है।
अनअफेक्टेड प्राइस कांसेप्ट क्या है?
सीधे शब्दों में कहें, तो इसका मतलब है कि अगर किसी अफवाह के कारण किसी कंपनी की शेयर प्राइस में अचानक उछाल या गिरावट आती है, तो उस शेयर को कुछ समय के लिए एक खास प्राइस पर ही खरीदा या बेचा जा सकेगा। यह प्राइस वही होगा जो अफवाह फैलने से पहले था।
उदाहरण के लिए, अगर किसी कंपनी के मर्जर की अफवाह फैलती है और उसके बाद कंपनी राइट्स इश्यू लाती है, तो ‘अनअफेक्टेड प्राइस’ यह सुनिश्चित करेगा कि राइट्स इश्यू की प्राइस अफवाह से प्रभावित न हो।
SEBI ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि अफवाहों के कारण होने वाली आर्टिफिशियल फ्लक्चुएशन को रोका जा सके। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जा सके कि निवेशक सही जानकारी के आधार पर फैसले ले सकें।
ध्यान दें कि फिलहाल यह नियम जून 2024 से सिर्फ टॉप 100 कंपनियों पर लागू होगा। दिसंबर 2024 से बाकी 150 बड़ी कंपनियों को भी इसमें शामिल कर लिया जाएगा।
सेबी अफवाहों को रोकने के लिए क्या कदम उठा रहा है?
सेबी ने अफवाहों पर लगाम लगाने और शेयर मार्केट में निवेशकों के हितों की रक्षा करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें शामिल हैं:
अनअफेक्टेड प्राइस की अवधारणा: सेबी ने ‘अनअफेक्टेड प्राइस’ की अवधारणा पेश की है। जैसे माना अगर किसी कंपनी की स्टॉक प्राइस किसी अफवाह के कारण 5% से अधिक बढ़ या घट जाती है, तो उस स्टॉक को 24 घंटे के लिए ‘अनअफेक्टेड प्राइस’ पर ट्रेड करना होगा। सिर्फ इतना ही नहीं, अनअफेक्टेड प्राइस ट्रांसेक्शन के चरण के आधार पर 60 या 180 दिनों के लिए मौजूदा नियमों के तहत ‘रिलेवेंट डेट’ तक लागू रहेगी।
इनफार्मेशन प्रसारण में तेजी: सेबी ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं कि अफवाहों के बारे में जानकारी जल्दी और प्रभावी ढंग से फैलाई जाए। इसमें सेबी वेबसाइट पर समय पर जानकारी देना शामिल है।
कड़ी निगरानी: सेबी शेयर मार्केट की लगातार निगरानी कर रहा है और किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि पर नजर रख रहा है।
कठोर दंड: सेबी ने उन लोगों के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया है जो गलत अफवाहें फैलाते हैं या अंदरूनी जानकारी का दुरुपयोग करते हैं।
सेबी के इस गाइडलाइन का क्या प्रभाव होगा?
सेबी के इन कदमों से शेयर मार्केट में अफवाहों को कम करने और निवेशकों के लिए अधिक पारदर्शी और कुशल मार्केट बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह कदम निवेशकों को बेहतर निर्णय लेने और अपने निवेश को बेहतर ढंग से मैनेज करने में भी मदद करेगा।
निष्कर्ष
सेबी हमेशा ही निवेशकों के लिए सुरक्षित और पारदर्शी मार्केट बनाने की कोशिश करती है इसलिए यह उम्मीद की जा सकती है कि सेबी का यह कदम निवेशकों को सही निर्णय लेने में मदद करेगा, हालांकि अफवाहों को पूरी तरह से खत्म करना लगभग असंभव है। इसलिए, निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपना खुद का रिसर्च करें या किसी फाइनेंशियल एक्सपर्ट की सलाह ले और हमेशा विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी प्राप्त करें।
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*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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