लंबे स्लोडाउन के बाद, चीन में नेचुरल डायमंड्स की डिमांड एक बार फिर बढ़ सकती है। भारतीय डायमंड निर्यातकों को उम्मीद है क्योंकि चीनी ज्वैलरी रिटेलर्स ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नए बायबैक प्रोग्राम शुरू किए हैं। भारत, जो नेचुरल डायमंड के ज्वैलरी का दूसरा सबसे बड़ा मार्केट है, घरेलू डिमांड बढ़ने और विदेशों में रिकवरी के संकेतों के साथ, नेचुरल डायमंड इंडस्ट्री विकास के नए चरण में प्रवेश कर सकता है। यह बदलाव निवेशकों और निर्यातकों के लिए नए अवसर भी लाता है।
क्या है मामला?
तीन साल की गिरावट के बाद, चीन में नेचुरल डायमंड्स की डिमांड जल्द ही फिर से बढ़ सकती है। नेचुरल डायमंड्स में रुचि बढ़ाने के लिए, चीन के प्रमुख ज्वैलरी रिटेलर्स जैसे चो टाई फूक, चो सैंग सैंग, लाओ फेंग जियांग ने सोने की तरह ही डायमंड्स के लिए बायबैक प्रोग्राम शुरू किए हैं। इससे उपभोक्ताओं में नई दिलचस्पी पैदा हुई है और भारतीय निर्यातकों को नई उम्मीद मिली है।

भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा कट और पॉलिश किए डायमंड्स का निर्यातक है, ने चीन को डायमंड्स का निर्यात 2021-22 में 6.55 बिलियन डॉलर से घटकर 2024-25 में 3.28 बिलियन डॉलर रह गया, क्योंकि चीनी खरीदार आर्थिक अनिश्चितता के कारण सोने पर ध्यान देने लगे है। लेकिन अब, बायबैक प्रोग्राम के चलते निर्यातकों को उम्मीद है कि जून-अगस्त की धीमी गति के बाद सितंबर तक डिमांड बढ़ने लगेगी।
डायमंड्स की डिमांड में गिरावट के मुख्य कारण
चीन में डायमंड्स की खपत घटने के कई कारण हैं:
कमजोर उपभोक्ता खर्च: कोविड-19 महामारी के बाद नेचुरल डायमंड जैसी लक्जरी चीजों की खरीदारी प्रभावित हुई है।
रियल एस्टेट संकट: चीन के रियल एस्टेट संकट ने लोगों की संपत्ति घटा दी, जिससे फिजूल खर्च कम हो गया है।
ट्रेड टेंशन: अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव ने आर्थिक आत्मविश्वास को कमजोर किया।
लेब-ग्रोन डायमंड्स: सस्ते और मॉडर्न होने के कारण युवाओं में लेब-ग्रोन डायमंड्स लोकप्रिय हुए है।
सोने की बढ़ती डिमांड: जिओपॉलिटिकल तनाव के कारण लोगों ने सोने को सुरक्षित निवेश माना और डायमंड्स से दूरी बना ली है।
भारत की बढ़ती भूमिका
भारत अब चीन को पीछे छोड़ते हुए नेचुरल डायमंड के ज्वैलरी का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मार्केट बन गया है। कोविड महामारी के बाद भारत का नेचुरल डायमंड मार्केट तेजी से बढ़ा है और 3.5 से 4 बिलियन डॉलर के साइज तक पहुंच चुका है। सिर्फ इतना ही नहीं, इस सेक्टर में हर साल 20% तक की उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
सॉलिटेयर डायमंड्स नए जमाने के खरीदारों में खासा लोकप्रिय हो रहे हैं। भारत शीर्ष उपभोक्ताओं में शामिल है, लेकिन अभी भी अमेरिका जैसे मार्केट्स के मुकाबले डायमंड्स की खरीदारी कम है। भारत दुनिया के लिए डायमंड्स को काटने और पॉलिश करने में भी बड़ी भूमिका निभाता है। ग्लोबल डिमांड का 11% हिस्सा भारत से आता है, और यह योगदान तेजी से बढ़ रहा है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
चीन में डायमंड्स की डिमांड के बढ़ने की उम्मीद न केवल निर्यातकों के लिए अच्छी खबर है, बल्कि शेयर मार्केट के निवेशकों के लिए भी नया मौका लाती है। अगर चीन को निर्यात फिर से बढ़ता है, तो भारतीय डायमंड निर्यातकों का व्यापार, रेवेन्यू और मुनाफा बढ़ सकता है।
इससे पिछले कुछ सालों से इन कंपनियों पर पड़ रहा मार्जिन का दबाव कम हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर बढ़ने से लिस्टेड ज्वैलरी और डायमंड कंपनियों का आउटलुक बेहतर हो सकता है, जो उनके शेयर प्रदर्शन में दिख सकता है।
भविष्य की बातें
डायमंड इंडस्ट्री एक अहम दौर में प्रवेश कर रहा है। नेचुरल डायमंड मिलना मुश्किल होते जा रहे हैं, क्योंकि पिछले कुछ सालों में उनका प्रोडक्शन तेजी से गिरा है। द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, 2005 के बाद से डायमंड्स की रिकवरी 30% कम हुई है, और हाल के वर्षों में कोई बड़ी नई खोज नहीं हुई है। वहीं, डिमांड फिर से बढ़ने की उम्मीद है, खासकर चीन में रिकवरी के संकेत और भारत में लगातार बढ़ती डोमेस्टिक डिमांड के कारण।
नेचुरल डायमंड्स की सप्लाई पिछले कुछ सालों में कम हुई है, लेकिन डिमांड अभी भी बनी हुई है। 2024 में, ग्लोबल नेचुरल डायमंड मार्केट 97.57 बिलियन डॉलर का था और 2032 तक 138.66 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसकी सालाना वृद्धि दर 4.5% है। वहीं, भारत का डायमंड मार्केट 20% की ग्रोथ से बढ़ रहा है।
निवेशकों को चीन के बायबैक प्रोग्राम पर नजर रखनी चाहिए और देखना चाहिए कि क्या यह ग्लोबल डायमंड डिमांड में स्थायी सुधार लाता है।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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