भारत के कैपिटल मार्केट्स इस समय एक अहम दौर से गुजर रहे हैं। सेकेंडरी मार्केट में स्थिरता और प्राइमरी मार्केट में बड़ी सप्लाई एक साथ नया मोमेंटम बना रही है। पिछले कुछ वर्षों में डोमेस्टिक म्यूचुअल फंड्स के बढ़ते साइज और रिटेल भागीदारी से इक्विटी कल्चर मजबूत हुआ है, जिसका असर IPO मार्केट पर भी दिख रहा है।
2026 की पहली छमाही में पश्चिम एशिया तनाव और ग्लोबल अनिश्चितता के कारण कंपनियों ने वेट एंड वॉच अप्रोच अपनाई थी। लेकिन जुलाई-अगस्त से स्थिति बदली है।
आइए भारत के IPO मार्केट बूम को विस्तारपूर्वक समझें और जानें क्यों कंपनियां IPO जल्दी लाने की दौड़ में लगी है।
क्या है मामला?
धीमी शुरुआत के बाद मेनबोर्ड IPO ने जोरदार वापसी की है। जुलाई में करीब 26,500 करोड़ रुपये और अगस्त में करीब 29,000 करोड़ रुपये मेनबोर्ड IPO से जुटाए गए। यह 2026 में अब तक जुटाए गए करीब 75,518 करोड़ रुपये का लगभग 73% है।
इस तेजी की एक बड़ी वजह SEBI अप्रूवल की एक्सपायरी है। आमतौर पर फंडरेजिंग अप्रूवल 12 महीने के लिए वैलिड होता है। कई कंपनियों के अप्रूवल 8 से 10 महीने पुराने हो चुके थे। सिम्बायोटिक फार्मालैब, मिल्कीमिस्ट और शिपरॉकेट जैसी कंपनियों ने अगस्त में अपने इश्यू पूरे किए।
SEBI ने अप्रैल से सितंबर के बीच एक्सपायर होने वाले IPO और राइट्स इश्यू अप्रूवल्स की वैलिडिटी 30 सितंबर तक बढ़ा दी थी, जिससे कंपनियों को फंड जुटाने की अतिरिक्त विंडो मिली है। मार्केट कंडीशंस में सुधार भी मददगार रहा। निफ्टी 50 और सेंसेक्स इस साल अपने लो पर करीब 14% तक गिर गए थे। बाद में मार्केट ने 10-11% की रिकवरी की और अगस्त की शुरुआत तक सालाना गिरावट करीब 5% रह गई। इसी स्थिरता के कारण 2026 में अब तक का मेनबोर्ड फंडरेज पिछले साल की समान अवधि के 59,360 करोड़ रुपये से आगे निकल गया है। 2025 में 103 कंपनियों ने करीब 21 बिलियन डॉलर और 2024 में 91 कंपनियों ने 18 बिलियन डॉलर जुटाए थे।
पाइपलाइन का विशाल आकार और मेगा इश्यूज का दबदबा
प्राइम डेटाबेस के अनुसार, भारत की IPO पाइपलाइन में करीब 4.66 लाख करोड़ रुपये की संभावित फंडरेजिंग है। इसमें 238 कंपनियां शामिल हैं। इनमें 167 कंपनियों के पास वैलिड SEBI अप्रूवल है, जो 3,05,933 करोड़ रुपये की संभावित फंडरेजिंग दिखाता है। वहीं 71 कंपनियां अप्रूवल का इंतजार कर रही हैं, जिनका संभावित इश्यू साइज 1,59,680 करोड़ रुपये है।
इस पाइपलाइन में 111 कंपनियों ने अपना इश्यू साइज डिस्क्लोज नहीं किया है। इनके लिए 1,500 करोड़ रुपये प्रति कंपनी के अनुमान से 1,66,500 करोड़ रुपये जोड़े गए हैं। यही कुल पाइपलाइन के एक तिहाई से अधिक है।
मेगा इश्यूज पाइपलाइन में सबसे आगे हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स 37,700 करोड़ रुपये, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज 30,000 करोड़ रुपये और फोनपे 12,000 करोड़ रुपये के संभावित इश्यू के साथ प्रमुख नाम हैं। तीनों मिलकर करीब 80,000 करोड़ रुपये बनते हैं। जियो को 28 अगस्त 2026 को SEBI अप्रूवल मिला है।
इसके अलावा अवाडा इलेक्ट्रो 7,600 करोड़ रुपये, प्रिज्म 6,650 करोड़ रुपये, कार्ल्सबर्ग इंडिया 6,300 करोड़ रुपये और ज़ेप्टो 5,106 करोड़ रुपये जैसे बड़े इश्यू भी पाइपलाइन में हैं।
मेनबोर्ड बनाम SME – दो अलग तस्वीरें
तेजी मुख्य रूप से मेनबोर्ड सेगमेंट में है, जबकि SME मार्केट सुस्त है। 2026 में अब तक 122 SME इश्यूज ने करीब 5,600 करोड़ रुपये जुटाए हैं। पिछले साल 267 इश्यूज से करीब 11,600 करोड़ रुपये जुटाए गए थे।
SEBI ने SME प्लेटफॉर्म पर इन्वेस्टर प्रोटेक्शन के लिए रिटेल एप्लीकेशन साइज बढ़ाने, सख्त प्रॉफिटेबिलिटी नॉर्म्स और लंबे प्रमोटर लॉक-इन जैसे कदम उठाए हैं।
मेनबोर्ड पाइपलाइन में इंजीनियरिंग, IT एंड सॉफ्टवेयर, हाउसिंग, सिविल कंस्ट्रक्शन, रियल एस्टेट, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे कई सेक्टर शामिल हैं। फाइनेंशियल सर्विसेज का डिस्क्लोज्ड प्रपोज्ड साइज अकेले करीब 71,200 करोड़ रुपये है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
सितंबर में 20,000 करोड़ रुपये से 25,000 करोड़ रुपये के IPO आने की उम्मीद है। इससे निवेशकों के पास विकल्प बढ़ेंगे, लेकिन रिस्क भी रहेगा।
मिंट के अनुसार, एवेंडस कैपिटल (Avendus Capital) के MD गौरव सूद का कहना है कि, पिछले दो वर्षों में 200 मिलियन डॉलर से ज्यादा साइज वाले इश्यूज की संख्या चार गुना बढ़ी है। 200 से 500 मिलियन डॉलर वाले इश्यू तेजी से बढ़ रहे हैं और 1 से 5 बिलियन डॉलर से ज्यादा के IPO के लिए भी एक्सेप्टेंस बढ़ी है।
निवेशकों को रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस ध्यान से पढ़ना चाहिए, वैल्यूएशन की तुलना सेक्टर पीयर्स से करनी चाहिए और ग्रे मार्केट प्रीमियम या लिस्टिंग गेन्स के पीछे नहीं भागना चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि फंडरेज बिजनेस ग्रोथ के लिए है या ऑफर फॉर सेल के जरिए मौजूदा शेयरहोल्डर्स एग्जिट कर रहे हैं।
भविष्य की बातें
आगे की दिशा सेकेंडरी मार्केट की स्थिरता पर निर्भर करेगी। मिंट के अनुसार, प्राइम डेटाबेस के प्रणव हलडिया का कहना है कि, प्राइमरी मार्केट हमेशा सेकेंडरी मार्केट को फॉलो करता है। अब तक 58 कंपनियों ने 73,757 करोड़ रुपये, करीब 8 बिलियन डॉलर जुटाए हैं। इनमें SBI फंड्स ने 9,813 करोड़ रुपये और मणिपाल हॉस्पिटल्स ने 9,275.22 करोड़ रुपये जुटाए हैं।
Avendus को उम्मीद है कि साल के अंत तक कुल IPO फंडरेज 20 बिलियन डॉलर से अधिक हो सकता है। यदि सेकेंडरी मार्केट स्थिर रहता है, तो 4.66 लाख करोड़ रुपये की IPO पाइपलाइन का बड़ा हिस्सा वास्तविक फंडरेज में बदल सकता है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।