भारत की आर्थिक ग्रोथ पर अब सिर्फ डोमेस्टिक कंजम्पशन का असर नहीं पड़ता। ग्लोबल बॉन्ड यील्ड, क्रूड ऑयल और कैपिटल फ्लो जैसे मैक्रो फैक्टर्स भी भारतीय मार्केट को प्रभावित करते हैं। खासकर US ट्रेजरी यील्ड बढ़ने पर इसका असर सेंसेक्स, निफ्टी और भारतीय बॉन्ड मार्केट पर दिखता है।
आइए भारत के बॉन्ड और इक्विटी मार्केट पर US यील्ड के असर को विस्तारपूर्वक समझें और जानें कि भारतीय मार्केट के लिए इसका क्या मतलब है।
क्या है मामला?
ग्लोबल बॉन्ड यील्ड कई साल के हाई स्तर पर पहुंच गई हैं। अब मार्केट की नजर इस बात पर है कि क्या 10-ईयर US ट्रेजरी यील्ड 5% तक पहुंचेगी। 10-ईयर US ट्रेजरी यील्ड 4.81% तक पहुंच गई है, जो नवंबर 2023 के बाद का सबसे हाई स्तर है। ट्रेडर्स के अनुसार, 5% का स्तर ग्लोबल मार्केट में और अस्थिरता बढ़ा सकता है।
भारतीय बॉन्ड मार्केट पर भी इसका असर दिखा। भारतीय 6.94% 2036 बॉन्ड की यील्ड 2 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 6.9754% पर पहुंच गई। इंट्राडे में इसने 7% का स्तर भी छुआ। पिछले पांच सेशन्स में भारतीय 10-ईयर यील्ड करीब 13 बेसिस पॉइंट्स बढ़ चुकी है।
सिर्फ इतना ही नहीं, इक्विटी मार्केट में सेंसेक्स 704.15 पॉइंट्स यानी 0.92% गिरकर 76,240.13 पर और निफ्टी 237 पॉइंट्स यानी 0.99% गिरकर 23,818.80 पर पहुंच गया। इससे BSE की कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन से करीब ₹5 लाख करोड़ की वेल्थ कम हुई। बॉन्ड प्राइस और यील्ड उलटे चलते हैं। इसलिए यील्ड बढ़ने पर बॉन्ड ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं और इक्विटी पर दबाव आ सकता है।
ग्लोबल बॉन्ड सेलऑफ के ट्रिगर्स
ग्लोबल बॉन्ड सेलऑफ के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा ट्रिगर मिडिल ईस्ट में बढ़ता कॉन्फ्लिक्ट है। US-ईरान तनाव बढ़ने से ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स एशियन ट्रेड में 6 सप्ताह के हाई $95 प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल की कीमतों में इस उछाल से महंगाई की चिंता बढ़ी है, जिससे बॉन्ड मार्केट पर दबाव बढ़ा।
दूसरा बड़ा कारण बढ़ता गवर्नमेंट डेट और फिस्कल प्रेशर है। अमेरिका में करीब $40 ट्रिलियन के डेट के बीच बढ़ती डिफेंस स्पेंडिंग और डेट सर्विसिंग कॉस्ट ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। इसके अलावा, बदलती ट्रेजरी ऑक्शन डायनेमिक्स भी बॉन्ड यील्ड को ऊपर धकेल रही हैं।
इसका असर दूसरे बड़े बॉन्ड मार्केट में भी दिखा। जापान की 10-ईयर यील्ड 3% के ऊपर, जबकि ऑस्ट्रेलिया की यील्ड 5.198% तक पहुंच गई। वहीं, बिग टेक कंपनियों की रिकॉर्ड बॉन्ड बिक्री ने भी मार्केट में सप्लाई बढ़ाकर यील्ड पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
सेंसेक्स-निफ्टी: बड़ा करेक्शन या सिर्फ वैल्यूएशन रीसेट?
द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, एनालिस्ट्स की राय अलग है कि 5% US यील्ड से सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ा करेक्शन आएगा या यह सिर्फ वैल्यूएशन रीसेट होगा।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वी के विजयकुमार के अनुसार, बढ़ती US बॉन्ड यील्ड भारतीय स्टॉक मार्केट के लिए बड़ा खतरा है। अगर 10-ईयर यील्ड 5% तक पहुंचती है, तो ग्लोबल इक्विटी मार्केट में बड़ा करेक्शन आ सकता है।
INVasset PMS के हर्षल दसानी के अनुसार, इसका असर भारतीय इक्विटी पर अर्निंग्स से ज्यादा वैल्यूएशन मल्टीपल के जरिए होगा। ज्यादा ग्लोबल रिस्क-फ्री रेट से P/E रेश्यो पर दबाव आ सकता है। उनके अनुसार, महंगे कंज्यूमर स्टॉक्स, न्यू-एज टेक्नोलॉजी और स्मॉल एवं मिडकैप्स पर ज्यादा दबाव आ सकता है।
दूसरी ओर, एक्सिस डायरेक्ट के उत्तम कुमार श्रीमल को बड़ा करेक्शन नहीं दिखता। उनके अनुसार, बढ़ी बॉन्ड यील्ड इमर्जिंग मार्केट फ्लो के लिए नेगेटिव है, लेकिन Q1 FY27 GDP ग्रोथ मजबूत है। निफ्टी करीब 18x की हिस्टोरिकल वैल्यूएशन पर है। अगर निफ्टी 23,000 की ओर गिरता है, तो क्वालिटी स्टॉक्स को लोअर लेवल पर एक्यूमुलेट किया जा सकता है।
SBI सिक्योरिटीज के सुदीप शाह के अनुसार, क्रूड में लगातार तेजी से रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और बढ़ी ग्लोबल बॉन्ड यील्ड से इमर्जिंग मार्केट एसेट्स कम आकर्षक हो सकते हैं।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
निवेशकों के लिए FII फ्लो और बॉन्ड-इक्विटी रोटेशन पर नजर रखना जरूरी है। 364-डे ट्रेजरी-बिल ऑक्शन में भारत ने 5.91% पर बिल बेचे, जबकि पिछले सप्ताह यह 5.80% था। OIS रेट्स अगले 12 महीनों में 75 बेसिस पॉइंट्स RBI रेट हाइक की संभावना दिखा रहे हैं।
US 10-ईयर यील्ड 5% के करीब पहुंचने पर US बॉन्ड ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। इससे इमर्जिंग मार्केट्स से FII आउटफ्लो का दबाव बढ़ सकता है।
भविष्य की बातें
आगे US FOMC की बैठक, सरकार का दूसरे छमाही का बॉरोइंग प्रोग्राम, क्रूड ऑइल की कीमतों में बदलाव और फूड इंफ्लेशन मार्केट के लिए प्रमुख इंडीकेटर्स रहेंगे। इन फैक्टर्स से बॉन्ड यील्ड और शेयर मार्केट की दिशा प्रभावित हो सकती है।
इस बीच, भारत OIS रेट्स में अलग-अलग दिशा देखने को मिली। 1-ईयर रेट 1.5 बेसिस पॉइंट घटकर 6% हो गई, जबकि 2-ईयर रेट 1 बेसिस पॉइंट बढ़कर 6.22% और 5-ईयर रेट 2.5 बेसिस पॉइंट बढ़कर 6.53% हो गई। यह संकेत देता है कि ट्रेडर्स आगे ब्याज दरों में बदलाव की संभावना को लेकर सतर्क हैं। इसलिए अगले कुछ निवेशकों को इन सभी डेवलपमेंट पर नजर रखने की आवश्यकता है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।