भारत का पावर सेक्टर ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां केवल नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ना पर्याप्त नहीं होगा। रिन्यूएबल पावर का हिस्सा बढ़ने के साथ यह भी जरूरी है कि अलग-अलग समय पर बनने वाली बिजली को जरूरत के अनुसार स्टोर और इस्तेमाल किया जा सके। यही बदलाव एनर्जी स्टोरेज को पावर सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा है।
आइए भारत की बढ़ती एनर्जी स्टोरेज जरूरत को विस्तारपूर्वक समझें और जानें कि यह बदलाव निवेशकों के लिए किस तरह का अवसर तैयार कर सकता है।
क्या है मामला?
CareEdge Ratings के अनुसार, भारत को FY32 तक अपनी एनर्जी स्टोरेज जरूरतों को पूरा करने के लिए ₹4 लाख करोड़ से अधिक के स्टोरेज-रिलेटेड कैपेक्स की आवश्यकता पड़ सकती है। इसकी बड़ी वजह रिन्यूएबल पावर को बिजली व्यवस्था में प्रभावी तरीके से इंटीग्रेट करने की बढ़ती जरूरत है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की एनर्जी स्टोरेज आवश्यकता FY32 तक लगभग 411 GWh तक पहुंच सकती है। इसके मुकाबले जून 2026 तक ऑपरेशनल स्टोरेज कैपेसिटी करीब 54 GWh थी।
रिपोर्ट का कहना है कि पावर सेक्टर की चुनौती अब केवल जनरेशन कैपेसिटी बढ़ाने से बदलकर बढ़ती रिन्यूएबल कैपेसिटी को ग्रिड में सही तरीके से शामिल करने की ओर जा रही है। स्टोरेज वेरिएबल रिन्यूएबल सोर्सेज से बनने वाली बिजली को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद कर सकता है।
रिन्यूएबल पावर के साथ क्यों बढ़ रही स्टोरेज की जरूरत?
भारत की इंस्टॉल्ड पावर जनरेशन कैपेसिटी में नॉन-फॉसिल सोर्सेज की हिस्सेदारी करीब 50% है, लेकिन वास्तविक बिजली उत्पादन में उनका योगदान लगभग 29% है। यह अंतर बताता है कि केवल रिन्यूएबल कैपेसिटी जोड़ना पर्याप्त नहीं है; उससे बनने वाली बिजली को समय और डिमांड के अनुसार उपलब्ध कराने के लिए सपोर्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी जरूरी है।
रिपोर्ट के अनुसार, रिन्यूएबल पावर का विस्तार पारंपरिक बिजली स्रोतों को तुरंत पूरी तरह बदलने के बजाय पूरे पावर सिस्टम में नए निवेश की जरूरत पैदा कर सकता है। इस बदलाव का संकेत स्टैंडअलोन स्टोरेज-बेस्ड टेंडर्स में दिखता है। ऐसे टेंडर्स FY25 के 7 GW से बढ़कर FY26 में करीब 21 GW हो गए। यह एनर्जी स्टोरेज सेगमेंट में बढ़ती गतिविधि को दर्शाता है।
BESS, PSP और ट्रांसमिशन की बढ़ती भूमिका
CareEdge Ratings ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स यानी BESS और पंप्ड स्टोरेज प्लांट्स यानी PSPs को भारत के पावर ट्रांजिशन में एक-दूसरे को सपोर्ट करने वाली टेक्नोलॉजीज के रूप में देखा है। जैसे-जैसे रिन्यूएबल जनरेशन बढ़ेगा, दोनों स्टोरेज मॉडल पावर सिस्टम को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इसके साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार भी जरूरी होगा, क्योंकि स्टोरेज और नई जनरेशन कैपेसिटी तभी प्रभावी हो सकती है जब बिजली को ग्रिड के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया जा सके। रिपोर्ट FY27 से FY31 के दौरान ट्रांसमिशन सेक्टर में लगभग ₹5.19 लाख करोड़ के कैपेक्स का अनुमान लगाती है।
हालांकि इस सेक्टर में राइट-ऑफ-वे, फॉरेस्ट क्लियरेंस और कोऑर्डिनेशन जैसी एक्जीक्यूशन चुनौतियां मौजूद हैं। इसके बावजूद ऑपरेशनल ट्रांसमिशन एसेट्स का स्टेबल कैश फ्लो प्रोफाइल और लंबे कन्सेशन टेन्योर सेक्टर के क्रेडिट प्रोफाइल को सपोर्ट करते हैं।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
एनर्जी ट्रांजिशन का निवेश अवसर केवल रिन्यूएबल जनरेशन तक सीमित नहीं है। बढ़ती स्टोरेज जरूरत BESS और PSP जैसे सेगमेंट्स की भूमिका बढ़ा सकती है, जबकि बड़े ट्रांसमिशन कैपेक्स की जरूरत ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर को भी इस बदलाव का अहम हिस्सा बनाती है।
इसके साथ CareEdge Ratings का कहना है कि कोल-बेस्ड थर्मल पावर भी बेहतर क्रेडिट स्टेबिलिटी और नए इन्वेस्टमेंट रिलेवेंस के मल्टी-ईयर चरण में प्रवेश कर रहा है। अच्छी तरह कॉन्ट्रैक्टेड थर्मल पावर एसेट्स बढ़ती बिजली डिमांड पूरी करने और रिन्यूएबल कैपेसिटी को इंटीग्रेट करने के लिए जरूरी फ्लेक्सिबिलिटी देने में महत्वपूर्ण बने रह सकते हैं।
स्टोरेज, ट्रांसमिशन और फ्लेक्सिबल जनरेशन एक-दूसरे से जुड़े हिस्से हैं। निवेशकों के लिए अवसरों को समझते समय इस पूरे इकोसिस्टम और उससे जुड़ी एक्जीक्यूशन चुनौतियों को साथ देखना महत्वपूर्ण होगा।
भविष्य की बातें
भारत के पावर सेक्टर का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि बढ़ती रिन्यूएबल कैपेसिटी को ग्रिड में कितनी प्रभावी तरह से शामिल किया जाता है। जैसे-जैसे वेरिएबल रिन्यूएबल पावर बढ़ेगा, बिजली को स्टोर करने, जरूरत के समय उपलब्ध कराने और अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाने की क्षमता अधिक महत्वपूर्ण होती जाएगी।
CareEdge Ratings की रिपोर्ट संकेत देती है कि एनर्जी स्टोरेज और ट्रांसमिशन का विस्तार रिन्यूएबल ग्रोथ के साथ चलेगा, जबकि फ्लेक्सिबल थर्मल जनरेशन भी सिस्टम बैलेंस में भूमिका निभाता रहेगा।
आगे की चुनौती केवल नई कैपेसिटी बनाने की नहीं, बल्कि स्टोरेज, ग्रिड और जनरेशन के बीच ऐसा तालमेल तैयार करने की होगी जिससे बढ़ती बिजली डिमांड और रिन्यूएबल इंटीग्रेशन दोनों को संभाला जा सके। यही तालमेल तय करेगा कि भारत का पावर ट्रांजिशन कितनी प्रभावी तरीके से आगे बढ़ता है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
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