डायमंड्स की दुनिया में एक नया मोड़ आया है। पिछले कुछ वर्षों में लैब-ग्रोन डायमंड या प्रयोगशाला में निर्मित डायमंड को भविष्य का प्रोडक्ट माना जा रहा था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। जहां एक तरफ इस सेक्टर में भारत ने ग्लोबल नेतृत्व की दिशा में कदम बढ़ाए थे, वहीं अब मार्केट में आई अचानक गिरावट ने पूरे इंडस्ट्री को नई चुनौतियों से रूबरू करा दिया है।
आइए भारतीय लैब-ग्रोन डायमंड इंडस्ट्री को गहराई से समझते है और जानने का प्रयास करते है कि इस इंडस्ट्री में क्या हो रहा है।
लैब-ग्रोन डायमंड: क्या है और कैसे बनते हैं?
लैब-ग्रोन डायमंड वास्तविक डायमंड ही होते हैं, जो रासायनिक, भौतिक और ऑप्टिकल रूप से नेचुरल डायमंड्स के समान होते हैं। इन्हें केमिकल वेपर डिपोजिशन (CVD) और हाई-प्रेशर हाई-टेम्परेचर (HPHT) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से तैयार किया जाता है। सरल शब्दों में, ये कृतिम रूप से विकसित किए जाते हैं।
अनुभवी जेमोलॉजिस्ट भी बिना एडवांस उपकरणों के इन्हें नेचुरल डायमंड्स से अलग नहीं कर सकते। नेचुरल डायमंड्स में नाइट्रोजन के छोटे निशान होते हैं, जबकि लैब-ग्रोन डायमंड नाइट्रोजन-मुक्त होते हैं, जो प्रोफेशनल द्वारा पहचान का एक अहम् फैक्टर है।
लैब-ग्रोन डायमंड में भारत की स्थिति
2024 तक दुनिया के लगभग 90% डायमंड्स की प्रोसेसिंग भारत में होती है, जो ग्लोबल टर्नओवर का लगभग 75% वैल्यू के आधार पर है। इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन ब्यूरो (iNDEXTb) के अनुसार, भारत अब केवल पॉलिशिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादन में भी सक्रिय है।
वजिर एडवाइजर्स के अनुसार, भारत का अनुमानित नेचुरल डायमंड मार्केट FY2025 में $6.2 बिलियन का है, जो FY2028 तक $8.2 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 12% की CAGR की उम्मीद है।

FY25 में कुल डायमंड मार्केट लगभग $6.6 बिलियन था, जिसमें नेचुरल डायमंड्स का दबदबा रहा। FY28 तक इसके बढ़कर $9.2 बिलियन पहुंचने का अनुमान है।
लैब-ग्रोन डायमंड का मार्केट छोटा लेकिन महत्वपूर्ण है। FY25 में इसकी मार्केट वैल्यू लगभग $400 मिलियन अनुमानित है और FY28 तक $600 मिलियन तक बढ़ने की संभावना है, जिसमें 14% की CAGR ग्रोथ शामिल है। 2023 में भारत ने 30 लाख से अधिक लैब-ग्रोन डायमंड का उत्पादन किया, जो दुनिया के कुल उत्पादन का 15% से अधिक था।
सरकारी समर्थन और नीतिगत पहल
भारत सरकार ने लैब-ग्रोन डायमंड की संभावनाओं को पहचानते हुए कई सहायक उपाय किए हैं। FY2024 के केंद्रीय बजट में सरकार ने IIT मद्रास में लैब-ग्रोन डायमंड केंद्र स्थापित करने के लिए पांच साल के लिए ₹242 करोड़ ($28 मिलियन) का सीड ग्रांट प्रदान किया।
वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने FY2026 के केंद्रीय बजट में घोषणा की कि कार्बन बीज के आयात पर कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी, जिससे यह इस वित्तीय वर्ष में ड्यूटी-मुक्त हो जाएगा। इस उपाय का उद्देश्य स्थानीय उत्पादन की लागत कम करना और अधिक प्रतिस्पर्धी बनना है।
इसके अलावा, जेम्स और ज्वैलरी सेक्टर में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति है, जो अंतरराष्ट्रीय निवेश को बढ़ावा देती है।
प्राइस में गिरावट और मार्केट में संकट
लैब-ग्रोन डायमंड सेक्टर में 2018 के बाद से प्राइस में काफी गिरावट देखी गई है। एक कैरेट और दो कैरेट दोनों प्रकार के लैब-ग्रोन डायमंड की प्राइस में 96% की गिरावट आई है। यह तेज गिरावट मुख्य रूप से चीन और भारत में बढ़े हुए उत्पादन, मार्केट में अधिक सप्लाई और सिंथेटिक डायमंड्स में कंस्यूमर विश्वास में गिरावट के कारण है।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, डायमंड ट्रेड एनालिस्ट पॉल जिम्निस्की ने बताया कि लैब-ग्रोन डायमंड वर्तमान में समान नेचुरल डायमंड्स की तुलना में 90% छूट पर बिक रहे हैं, जबकि 2015 में ये नेचुरल डायमंड्स की तुलना में केवल 10% सस्ते थे।
वर्ल्ड डायमंड काउंसिल की अध्यक्ष फेरिएल ज़ेरौकी ने कहा, “यदि आप नवीनतम ट्रेंड्स को देखें, तो लैब-ग्रोन डायमंड की प्राइस क्रैश हो रही हैं। यह लैब-ग्रोन में कंस्यूमर विश्वास को प्रभावित कर रही है”।
भारतीय लैब-ग्रोन डायमंड इंडस्ट्री पर प्रभाव
भारत के लिए यह स्थिति दोधारी तलवार है। सूरत और अन्य ऐसे रफ पॉलिशिंग और कटिंग हब में छोटी और मध्यम यूनिट्स ने 2022 के बाद अंतरराष्ट्रीय मार्केट में बदलाव के बाद सिंथेटिक डायमंड का उत्पादन करने के लिए डायवर्सिफिकेशन लाई है।
लेकिन सिंथेटिक डायमंड मार्केट ने गति नहीं रखी। 2024 में पॉलिश्ड लैब-ग्रोन डायमंड का निर्यात वॉल्यूम में 50% बढ़कर 64.5 लाख कैरेट हो गया, जो 2022 में 42.8 लाख कैरेट था। हालांकि, वैल्यू के संदर्भ में आय में 45% की गिरावट आई। इस वर्ष, वॉल्यूम वृद्धि और वैल्यू प्राप्ति दोनों में गिरावट आई है।
सूरत से मिली जानकारी के अनुसार, 6,000 सिंथेटिक डायमंड रिएक्टर स्थापित करने में भारी निवेश किया गया है, जो मूल कटिंग और पॉलिशिंग कार्यबल के 40% को रोजगार देते हैं। जून से मजदूर यूनियन यह इंगित कर रहे हैं कि सूरत में सिंथेटिक यूनिट्स में लगभग 4 लाख कर्मचारी वेतन के भुगतान में देरी या छंटनी का सामना कर रहे हैं।
ग्लोबल सिंथेटिक डायमंड उत्पादन 2024 में 17.1 बिलियन कैरेट तक पहुंच गया। जबकि सिंथेटिक डायमंड औद्योगिक और इलेक्ट्रॉनिक उपयोग में जारी रहेंगे, गेम्स और आभूषण में उनकी हिस्सेदारी, जो कभी लगभग 26 बिलियन डॉलर पर अनुमानित थी, गिर रही है।
नेचुरल डायमंड्स की वापसी और लुआंडा समझौता
नेचुरल डायमंड इंडस्ट्री, जिसने मध्य 2022 से प्राइस में गिरावट का अनुभव किया था, अब नए सिरे से रुचि देख रहा है। इस बदलाव का फायदा उठाने और नेचुरल डायमंड्स को बढ़ावा देने के लिए कई प्रमुख पहल शुरू की गई हैं।
लुआंडा समझौता अंगोला, बोत्सवाना, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका सहित प्रमुख डायमंड उत्पादक देशों के बीच एक समझौता है। इसके तहत, भाग लेने वाले देशों ने नेचुरल डायमंड्स को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक मार्केटिंग प्रयासों के लिए अपनी वार्षिक डायमंड बिक्री रेवेन्यू का 1% आवंटित करने पर सहमति व्यक्त की है।
वर्ल्ड डायमंड काउंसिल की अध्यक्ष फेरीएल ज़ेरूकी के अनुसार, लेब-ग्रोउन डायमंड्स की अधिक सप्लाई और गिरती प्राइस ने उनके आकर्षण को कमजोर किया है। ऐसे में लैब ग्रोन डायमंड्स के लिए यह समय चुनौतियों के साथ अपनी प्रामाणिकता और सौंदर्य के दम पर फिर से बाजार की चमक लौटाने का एक बड़ा अवसर भी लेकर आया है।
भविष्य की चुनौतियां और अवसर
भारत के लिए, जो रफ का खनन नहीं करता है बल्कि उन्हें आयात करता है और फिर वॉल्यूम के आधार पर दुनिया के 90% से अधिक डायमंड्स को पॉलिश करता है और कट और पॉलिश्ड डायमंड्स का सबसे बड़ा निर्यातक है, स्थिति जटिल है। 2023-24 में भारत ने लगभग $18.2 बिलियन वैल्यू के डायमंड्स का निर्यात किया।
सिद्धांत रूप में, भारत को सिंथेटिक डायमंड में अंतरराष्ट्रीय स्लाइड से सबसे बड़ा लाभ होना चाहिए। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने अधिकांश भारतीय गुड्स पर 50% से अधिक टैरिफ लगाया है। चूंकि हमारे पॉलिश्ड डायमंड्स और आभूषणों का 45% हिस्सा अमेरिका जाता है, इसलिए यह टैरिफ भारी पड़ा है। एनालिस्ट ने FY2026 में 28-30% की रेवेन्यू गिरावट का अनुमान लगाया है।
फिर भी, एक उम्मीद की किरण है। नेचुरल डायमंड्स की कटिंग और पॉलिशिंग इंडस्ट्री डोमेस्टिक डिमांड में स्थिर वृद्धि से प्रेरित रिबाउंड देख रहा है। इसने अंतरराष्ट्रीय मंदी के प्रभाव को कुछ हद तक ऑफसेट किया है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इंडस्ट्री के एनालिस्ट का कहना है कि डोमेस्टिक नेचुरल डायमंड मार्केट 2022 से सालाना 20% तक बढ़ा है और 2030 तक $4 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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