गोल्ड अपने ATM से 24% टूटा, निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

गोल्ड अपने ATM से 24% टूटा, निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
Share

भारत समेत ग्लोबल मार्केट्स में गोल्ड की प्राइस में तेज गिरावट देखी जा रही है, जो हाल के वर्षों के उल्लेखनीय उछाल के बाद एक नाटकीय उलटफेर का संकेत दे रही है। यह गिरावट न केवल प्राइस को प्रभावित कर रही है बल्कि गोल्ड की पारंपरिक सुरक्षित आश्रय की भूमिका को भी चुनौती दे रही है।

आइए इस डेवलपमेंट को विस्तार से समझें और जानें कि निवेशकों के लिए इसमें क्या मायने रखता है।

क्या है मामला?

गोल्ड की प्राइस अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर $5,417 प्रति औंस से लगभग 24% नीचे आ चुकी हैं। जून तिमाही में गोल्ड करीब 12% गिर चुका है, जो दिसंबर 2016 के बाद सबसे तेज तिमाही गिरावट है। सिल्वर की स्थिति और भी खराब है, जो इस तिमाही में 17.6% लुढ़क चुकी है जो जून 2022 के बाद सबसे बड़ी गिरावट और जनवरी में $117 प्रति औंस के ऑल-टाइम हाई से अब लगभग 47% नीचे है।

एशियाई कारोबार में स्पॉट गोल्ड $4,100 प्रति औंस से नीचे आ गया, जबकि US गोल्ड फ्यूचर्स भी कमजोर रहे। यह गिरावट ब्रॉडर मार्केट स्ट्रेस के दौरान सुरक्षित आश्रय वाली एसेट्स पर भी दबाव पड़ने की विडंबना को उजागर करती है।

गोल्ड के प्राइस में गिरावट के प्रमुख कारण

गोल्ड की हालिया कमजोरी के पीछे कई मैक्रो और मार्केट-ड्रिवन फैक्टर्स काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा दबाव ग्लोबल टेक और AI-संचालित इक्विटीज़ में आई तेज बिकवाली से आया है, जिसने निवेशकों को मार्जिन कॉल और लिक्विडिटी जरूरतों के लिए गोल्ड पोजीशन्स बेचने पर मजबूर किया। इसी के साथ, वॉल स्ट्रीट पर टेक-लेड रूट ने बुलियन होल्डिंग्स की बड़े पैमाने पर लिक्विडेशन को तेज कर दिया।

दूसरी तरफ, अमेरिका में टाइटर मॉनेटरी पॉलिसी और फेड के हॉकिश रुख ने डॉलर को मजबूत किया है, जिससे नॉन-यील्डिंग एसेट्स जैसे गोल्ड की अपील घट गई है। डॉलर इंडेक्स एक साल के उच्च स्तर पर पहुंचने से इंटरनेशनल लेवल पर गोल्ड महंगा हुआ और डिमांड पर दबाव बढ़ा। इसके साथ ही, इस साल तीन संभावित रेट हाइक की उम्मीदों ने गोल्ड की आकर्षकता और कम कर दी है, क्योंकि बढ़ी हुई ब्याज दरें यील्ड देने वाले एसेट्स को प्राथमिकता देती हैं।

हालांकि जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं मौजूद हैं, लेकिन US-ईरान तनाव में नरमी और शांति प्रयासों ने सेफ-हेवन डिमांड को सीमित कर दिया है। कुल मिलाकर, मौद्रिक सख्ती, मजबूत डॉलर और इक्विटी मार्केट से आए लिक्विडेशन प्रेशर ने मिलकर गोल्ड पर लगातार दबाव बनाया है, जबकि जियोपॉलिटिकल फैक्टर्स फिलहाल इसे पर्याप्त सपोर्ट नहीं दे पा रहे हैं।

गोल्ड ETF में रिकॉर्ड आउटफ्लो और मुनाफावसूली

मई में भारतीय गोल्ड ETF बाजार में तेज उलटफेर देखने को मिला। ग्रॉस रिडेम्प्शन्स ₹3,330 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए, जबकि नेट आउटफ्लो ₹725 करोड़ रहा, जो अप्रैल 2025 के बाद पहली मासिक निकासी थी। यह दबाव मुख्य रूप से गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी 9% बढ़ने के बाद डोमेस्टिक प्राइस में आई तेजी और निवेशकों की मुनाफावसूली से आया। कीमतों में करीब 6% की बढ़ोतरी के बाद कई निवेशकों ने प्रॉफिट लॉक करना शुरू कर दिया।

इस दौरान फिजिकल डिमांड (ज्वेलरी, बार और कॉइन) भी कमजोर रही, जिससे ETF में निवेशकों की रुचि और घट गई। नतीजा यह रहा कि मई में इन्वेस्टर फोलियो में रिकॉर्ड 1.34 लाख की गिरावट आई और कुल एक्टिव फोलियो घटकर लगभग 1.23 करोड़ रह गए।

कुछ फंड हाउसेस ने भारी निवेश पर अस्थायी लिमिट भी लगाई, जिससे बाजार में फ्लो और अधिक नियंत्रित हुआ। कुल मिलाकर, यह डेटा दिखाता है कि हालिया कीमतों की तेजी ने निवेशकों को एग्जिट और प्रॉफिट बुकिंग की तरफ ज्यादा प्रेरित किया, न कि नए निवेश की तरफ, जो गोल्ड मार्केट के मौजूदा करेक्शन फेज को और मजबूत करता है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

यह गिरावट निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। पिछले दो वर्षों में गोल्ड ने 2024 में 28% और 2025 में 65% से अधिक की बढ़ोतरी की थी, जबकि सिल्वर में 2025 में 148% उछाल आया था। वर्तमान करेक्शन प्रॉफिट बुकिंग और पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग का अवसर प्रस्तुत कर सकता है, लेकिन शॉर्ट टर्म में दबाव बना रह सकता है।

भारतीय निवेशकों को गोल्ड ETF में आउटफ्लो के बावजूद जून में वापसी देखकर सतर्क रहना चाहिए। प्राइस में पुलबैक के साथ कुछ डिमांड उभरी है, लेकिन समग्र माहौल सतर्क है। निवेशकों को फेड की पॉलिसी, US इन्फ्लेशन डेटा (PCE इंडेक्स) और डॉलर की गति पर नजर रखनी चाहिए।

भविष्य की बातें

एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में गोल्ड और सिल्वर की दिशा मुख्य रूप से US फेड की नीति और डॉलर इंडेक्स पर निर्भर रहेगी। मनी कंट्रोल के अनुसार, एक्सिस डायरेक्ट की देव्या गगलानी का कहना है कि, जिओपॉलिटिकल तनाव कम होने और क्रूड ऑइल में नरमी के बावजूद फेड का हॉकिश रुख और डॉलर का एक साल के उच्च स्तर पर पहुंचना बुलियन पर दबाव बनाए हुए है। जब तक डॉलर ₹100 से ऊपर बना रहता है, गोल्ड में कमजोरी बनी रह सकती है।

शिकागो फेड के ऑस्टन गूल्सबी (Austan Goolsbee) ने भी महंगाई को लेकर चिंता जताई है और संकेत दिया है कि प्राइस का दबाव अभी स्थायी रूप से कम नहीं हुआ है। इससे ब्याज दरों में राहत की उम्मीदें कमजोर बनी हुई हैं। अब मार्केट की नजर US PCE महंगाई डेटा पर है। अगर इसमें बढ़ोतरी दिखती है, तो फेड का सख्त रुख जारी रह सकता है और गोल्ड पर दबाव लंबे समय तक कायम रह सकता है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।

सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।

Teji Mandi Multiplier Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Flagship Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Xpress Options Xpress Options provides structured option trade setups published in a standardised format. Each strategy includes predefined entry, target, stop-loss, and expiry details to enable informed participation in derivatives markets. Subscription Fee ₹399/month* for 6 Months
Call TypeTrade Type

Teji Mandi Xpress Options

₹399/month* for 6 Months

Xpress Options provides structured option trade setups published in a standardised format. Each strategy includes predefined entry, target, stop-loss, and expiry details to enable informed participation in derivatives markets.

Strategy Type

Options Trading

Teji Mandi Xpress Subscription Fee
Total Calls

Total Calls

Recommended Articles
Scroll to Top