भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में गोल्ड लोन सेगमेंट को विनियमित करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सोने की बढ़ती कीमतों और गोल्ड लोन की बढ़ती डिमांड के बीच, ये नए नियम उधारकर्ताओं और वित्तीय संस्थानों दोनों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं।
आइए, इन नियमों के प्रमुख पहलुओं और उनके प्रभाव को समझते हैं।
क्या है मामला?
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में गोल्ड लोन से जुड़ी कई नई गाइडलाइन का ड्राफ्ट पेश किया है। यह कदम तब उठाया गया है जब गोल्ड लोन का आउटस्टैंडिंग अमाउंट और इससे जुड़े नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई है।
RBI के डेटा के अनुसार, दिसंबर 2024 तक बैंक्स और NBFC का कुल गोल्ड लोन आउटस्टैंडिंग ₹11,11,398 करोड़ तक पहुंच गया, जो दिसंबर 2023 में ₹8,73,701 करोड़ था। यानी इसमें 27.26% की वृद्धि हुई। जिसमें ₹9,23,636 करोड़ सिर्फ बैंक्स द्वारा गया लोन है।
इसी अवधि में, इस सेगमेंट के NPA ₹5,307 करोड़ से बढ़कर ₹6,824 करोड़ हो गए, जो कि लगभग 28.58% की सालाना बढ़ोतरी है। इस वृद्धि के पीछे गोल्ड की कीमतों में तेज़ उछाल और आसान प्रोसेसिंग के चलते उपभोक्ताओं की बढ़ती दिलचस्पी है।
नए नियम क्या कहते हैं?
9 अप्रैल 2025 को RBI ने ड्राफ्ट गाइडलाइन जारी कीं, जिनके प्रमुख पॉइंट्स निम्नलिखित हैं:
- कर्ज स्वीकृति अब आसान नहीं: अब बैंक और लेंडर्स आपकी रिपेमेंट कैपेसिटी जांचेंगे, तभी लोन मिलेगा। बिना आय की स्वीकृति के लोन नहीं मिलेगा।
- लोन रिन्यूअल या टॉप-अप पर रोक: अगर आपका लोन ‘स्टैंडर्ड’ श्रेणी में है और LVR (लोन-टू-वैल्यू) लिमिट के अंदर है, तभी इसे बढ़ाया या नवीनीकृत किया जा सकेगा।
- सोने की वैल्यूएशन में पारदर्शिता: अब सोने की शुद्धता और कीमत तय करने के लिए स्पष्ट नियम होंगे, जिससे उधारकर्ताओं को सही मूल्य मिलेगा।
- लोन के उद्देश्य को लेकर सख्ती: एक ही समय में व्यक्तिगत और व्यावसायिक उपयोग के लिए अलग-अलग गोल्ड लोन नहीं लिए जा सकेंगे।
- लोन के इस्तेमाल पर नजर: लेंडर्स को यह ट्रैक करना होगा कि आप लोन की राशि का उपयोग कैसे कर रहे हैं, ताकि गलत इस्तेमाल या विवादों से बचा जा सके।
सोने पर लोन लेने के लिए अब क्या है अनुमति?
- प्राथमिक सोने/चांदी या वित्तीय संपत्तियों पर लोन पर रोक: अब लेंडर्स इन पर लोन नहीं दे सकेंगे।
- सोने की मात्रा पर रोक: आप अधिकतम 1 किलो तक गहने या सोने के सिक्के गिरवी रख सकते हैं। लेकिन सिक्कों की मात्रा 50 ग्राम से ज़्यादा नहीं हो सकती, और वे भी केवल बैंक्स द्वारा जारी 22 कैरट या उससे ऊपर के विशेष सिक्के ही चलेंगे।
- पर्सनल लोन की अवधि सीमित: यदि आप बुलेट रिपेमेंट लोन (एकमुश्त चुकौती वाला कर्ज) लेते हैं, तो अधिकतम अवधि 12 महीने तय की गई है।
- छोटे बैंक्स के लिए लोन सीमा: सहकारी बैंक (को-ऑपरेटिव बैंक्स) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) अब ₹5 लाख तक ही गोल्ड लोन दे सकते हैं।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
RBI का यह कदम न केवल कर्ज लेने वालों के लिए पारदर्शिता लायेगा, बल्कि निवेशकों के लिए भी संकेत देता है कि यह सेगमेंट अब अधिक विनियमित होगा। दिसंबर 2024 तक बैंक्स का कुल गोल्ड लोन ₹9,23,636 करोड़ था, जो इस सेगमेंट में उनकी मजबूत हिस्सेदारी को दर्शाता है। निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि यह सेक्टर और अधिक औपचारिक और संगठित होता जा रहा है।
इसके अलावा, रेटिंग एजेंसी फिच का मानना है कि RBI के नए गोल्ड लोन नियम छोटे प्लेयर्स के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन मुथूट फाइनेंस और मणप्पुरम फाइनेंस जैसी बड़ी गोल्ड लोन कंपनियां इन बदलावों के साथ आसानी से एडजस्ट कर लेंगी।
भविष्य की बातें
जैसे-जैसे गोल्ड की कीमतें बढ़ती रहेंगी, इस सेगमेंट में कर्ज लेने की प्रवृत्ति बनी रहेगी। लेकिन RBI का नया नियमन यह सुनिश्चित करेगा कि लोन प्रक्रियाएं पारदर्शी और ग्राहक हितैषी हों। इससे न केवल बैंक्स और NBFCs का पोर्टफोलियो सुरक्षित रहेगा, बल्कि ग्राहक भी अधिक जिम्मेदारी से गोल्ड लोन का इस्तेमाल करेंगे।
इसके साथ ही, RBI ने अपने प्रस्तावित गोल्ड लोन दिशा-निर्देशों पर जनता और हितधारकों से फीडबैक मांगा है, जिसके बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे। ये नए नियम उधारकर्ताओं को सुरक्षा प्रदान करने और गोल्ड लोन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डिजाइन किए गए हैं।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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