भारत का हाउसिंग मार्केट कुछ वर्षों की तेज ग्रोथ के बाद अब कंसोलिडेशन फेज में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। घरों की कुल बिक्री स्थिर बनी हुई है, लेकिन नई लॉन्चिंग उससे तेज है और खरीदारों की पसंद भी स्पष्ट रूप से महंगे घरों की ओर बढ़ रही है।
इस बदलाव के बीच अलग-अलग शहरों और प्राइस सेगमेंट्स का प्रदर्शन काफी अलग है। अफोर्डेबल हाउसिंग में कमजोरी है, जबकि प्रीमियम सेगमेंट में डिमांड मजबूत बनी हुई है।
आइए भारत के हाउसिंग मार्केट को विस्तारपूर्वक समझें और जानें कि क्या यह वास्तविक सुस्ती है या नए दौर का प्रारंभ।
क्या है मामला?
जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान आठ बड़े हाउसिंग मार्केट्स में 2,58,238 घर बिके, जो पिछले साल के लगभग समान स्तर पर रहे। इसके विपरीत, नए लॉन्च 4% बढ़कर 2,79,899 यूनिट हो गए। अकेले Q3 2026 में 86,767 घर बिके, जो 1% कम थे, जबकि लॉन्च 4% बढ़कर 92,549 यूनिट रहे।
यह लगातार 16वीं तिमाही थी जब नई सप्लाई बिक्री से अधिक रही। इसका असर इन्वेंट्री एब्जॉर्प्शन पर दिख रहा है। घर बेचने में लगने वाला औसत समय Q3 2025 के 5.8 तिमाही से बढ़कर Q3 2026 में 6.1 तिमाही हो गया, जो लगातार चौथी तिमाही की वृद्धि और Q2 2023 के बाद सबसे हाई स्तर है। हालांकि 2018-2021 के दौरान यह सामान्यतः 7-11 तिमाही के बीच था।
शहरों में क्यों अलग दिख रही है डिमांड?
मुंबई 72,804 यूनिट्स की बिक्री के साथ सबसे बड़ा मार्केट रहा और यहां सालाना ग्रोथ 1% रही। बेंगलुरु में बिक्री 5% बढ़कर 43,140 यूनिट्स हुई, जबकि पुणे में 36,402 यूनिट्स के साथ बिक्री लगभग स्थिर रही। हैदराबाद, अहमदाबाद, चेन्नई और कोलकाता में 2-4% ग्रोथ दर्ज हुई और NCR को छोड़कर बाकी सात मार्केट्स की संयुक्त बिक्री 2% बढ़ी।
NCR इसका अपवाद रहा। यहां बिक्री 11% घटकर 35,574 यूनिट्स रह गई। हालांकि गुरुग्राम के बाहर NCR की बिक्री 3% बढ़ी। कमजोरी का बड़ा हिस्सा ₹5-10 करोड़ सेगमेंट से आया, जहां बिक्री 39% गिरकर 4,033 यूनिट रही, जबकि 5,002 नए घर लॉन्च किए गए। गुरुग्राम अकेले NCR की 57% अनसोल्ड इन्वेंट्री रखता है।
प्रीमियम घरों की तरफ बढ़ता मार्केट
हाउसिंग मार्केट का सबसे बड़ा बदलाव प्राइस मिक्स में दिखाई देता है। ₹1 करोड़ से ऊपर के घरों की हिस्सेदारी 9M CY26 में कुल बिक्री का 55% हो गई, जो एक साल पहले 50% थी। व्यापक लॉन्ग-टर्म ट्रेंड में यह हिस्सेदारी 2018 के करीब 16% से बढ़कर लगभग 56% तक पहुंच चुकी है।
₹1-2 करोड़ सेगमेंट में बिक्री 6.8% बढ़कर 77,087 यूनिट रही और इसका हिस्सा 30% रहा, जो पिछले साल 28% था। बेंगलुरु ने इसमें 19,713 यूनिट्स बेचीं। ₹2-5 करोड़ सेगमेंट 19.4% बढ़कर 51,501 यूनिट हुआ और कुल बिक्री का 19.9% रहा; बेंगलुरु 12,965 यूनिट्स के साथ आगे रहा, जबकि चेन्नई में इस सेगमेंट की ग्रोथ 54% रही।
इसके विपरीत, ₹50 लाख से कम घरों की बिक्री 14% गिरकर 47,660 यूनिट रह गई और हिस्सेदारी 22% से घटकर 18% हो गई। ₹50 लाख-₹1 करोड़ सेगमेंट भी 5.9% गिरकर 69,380 यूनिट और 26.9% हिस्सेदारी पर रही।
लग्जरी सेगमेंट और प्राइस की तस्वीर
₹5-10 करोड़ सेगमेंट की कुल बिक्री 9% घटकर 9,397 यूनिट रही। वहीं ₹10-20 करोड़ सेगमेंट 16% बढ़कर 2,587 यूनिट हुआ, जिसमें NCR की 1,536 यूनिट्स थीं। ₹20-50 करोड़ सेगमेंट 69% बढ़कर 571 यूनिट पहुंचा और इनमें 58% बिक्री मुंबई में हुई। ₹50 करोड़ से ऊपर 53 घर बिके, जिसमें मुंबई सबसे आगे रहा।
बिक्री की गति धीमी होने के बावजूद प्राइस में गिरावट नहीं आई। विभिन्न मार्केट्स में प्राइस 3-17% तक बढ़ीं। NCR में दिल्ली 17%, गाजियाबाद 14%, ग्रेटर नोएडा और बेंगलुरु 11%, नोएडा तथा फरीदाबाद 7% और गुरुग्राम 4% महंगा हुआ। अधिकांश अन्य शहरों में वृद्धि 3-6% रही।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
मौजूदा डेटा पूरे हाउसिंग मार्केट में एक जैसी कमजोरी नहीं दिखाता। कुल बिक्री स्थिर है, लेकिन अफोर्डेबल सेगमेंट सिकुड़ रहा है और महंगे घरों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। इसी समय लॉन्च बिक्री से ऊपर बने हुए हैं और इन्वेंट्री क्लियर होने में थोड़ा अधिक समय लग रहा है।
इसलिए मार्केट की दिशा समझने में केवल कुल बिक्री के बजाय शहर, प्राइस सेगमेंट, नई सप्लाई, अनसोल्ड इन्वेंट्री और प्राइस को साथ देखना महत्वपूर्ण होगा। NCR का प्रदर्शन यह भी दिखाता है कि किसी एक प्राइस सेगमेंट या शहर की कमजोरी पूरे राष्ट्रीय मार्केट की तस्वीर नहीं बताती।
भविष्य की बातें
मैक्रो स्तर पर अप्रैल-जून 2026 में GDP 7.8% बढ़ी। RBI का पहले 7% का अनुमान था, जबकि अगस्त में FY27 ग्रोथ फोरकास्ट 6.7% किया गया और रेपो रेट 5.25% पर अपरिवर्तित रहा।
आगे फेस्टिव सीजन, आय वृद्धि, स्थानीय डिमांड और सही प्राइस पर उपलब्ध सप्लाई हाउसिंग मार्केट की दिशा तय करने वाले प्रमुख फैक्टर्स होंगे। मौजूदा आंकड़े व्यापक गिरावट से ज्यादा सामान्यीकरण और खरीदारों की बदलती प्राथमिकताओं की ओर इशारा करते हैं। असली परीक्षा यह होगी कि बढ़ती लॉन्चिंग के बीच बिक्री और इन्वेंट्री एब्जॉर्प्शन कितना संतुलित रहता है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।