भारतीय कैपिटल में निवेशकों की सुरक्षा और मार्केट दक्षता को बढ़ाने के लिए निरंतर सुधार हो रहे हैं। इन सुधारों के तहत सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) के ट्रेडिंग नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। यह बदलाव ETF की प्राइस को उनके अंडरलाइंग एसेट्स के प्राइस के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने का प्रयास है, जिससे प्राइस डिस्कवरी में सुधार होगा और ट्रेडिंग अधिक कुशल बनेगी।
आइए SEBI के इन नए नियमों को विस्तारपूर्वक समझें और जानें कि यह बदलाव ETF मार्केट, कंपनियों और निवेशकों के लिए कैसे नए अवसर और दिशा प्रदान कर रहा है।
क्या है मामला?
वर्तमान में इक्विटी, डेब्ट और कमोडिटी ETFs पर 20% का फिक्स्ड प्राइस लिमिट लागू है, जबकि ओवरनाइट ETFs पर 5% का बैंड है। ये बैंड ETF के नेट एसेट वैल्यू (NAV) पर आधारित होते हैं, जो दो ट्रेडिंग दिन पहले (T-2) का होता है। SEBI का मानना है कि इस फ्रेमवर्क में एक दिन की देरी और फिक्स्ड बैंड्स अंडरलाइंग एसेट्स के मूवमेंट को ठीक से कैप्चर नहीं कर पाते है।
नए फ्रेमवर्क के तहत ETF का बेस प्राइस पिछले ट्रेडिंग दिन का क्लोजिंग मार्केट प्राइस होगा, जो ट्रेडिंग के आखिरी 30 मिनट के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) से कैलकुलेट किया जाएगा। अगर उस अवधि में ट्रेड नहीं हुआ तो लास्ट ट्रेडेड प्राइस इस्तेमाल होगा। पूरे दिन कोई ट्रेड न होने पर लेटेस्ट उपलब्ध क्लोजिंग NAV बेस प्राइस बनेगा। स्टॉक एक्सचेंजेस और म्यूचुअल फंड हाउसेस को T-1 क्लोजिंग NAV को बेस प्राइस बनाने के लिए 1 अप्रैल 2027 से ऑपरेशनल चुनौतियों का समाधान करने को कहा गया है।
डायनामिक प्राइस बैंड्स और कैटेगरी-वाइज बदलाव
SEBI ने ज्यादातर ETFs के लिए फिक्स्ड बैंड की जगह डायनामिक प्राइस लिमिट मैकेनिज्म पेश किया है।
इक्विटी और डेब्ट ETFs (लिक्विड और ओवरनाइट को छोड़कर) के लिए शुरुआती ट्रेडिंग 10% बैंड के अंदर होगी। अगर ट्रेड 9.9% या उससे ऊपर बैंड लिमिट पर पहुंचे तो 15 मिनट का कूलिंग-ऑफ पीरियड ट्रिगर होगा। इसके बाद बैंड को बेस प्राइस के 5% से बढ़ाया जा सकता है। यह प्रक्रिया एक दिशा में दो बार हो सकती है, जिससे प्रभावी बैंड 20% तक पहुंच सकता है।
आखिरी 30 मिनट में ट्रिगर होने पर कूलिंग-ऑफ 5 मिनट का होगा। बैंड का विस्तार सभी एक्सचेंजेस पर लागू होगा और केवल प्राइस मूवमेंट की दिशा में होगा।
लिक्विड और ओवरनाइट ETFs पर 5% का फिक्स्ड बैंड जारी रहेगा। गोल्ड और सिल्वर बैक्ड कमोडिटी ETFs के लिए शुरुआती 6% प्राइस बैंड होगा, जो 3% के स्टेज में बढ़ाया जा सकता है। इनके लिए कूलिंग-ऑफ 5.9% पर ट्रिगर होगा और बैंड विस्तार की संख्या पर कोई कैप नहीं है। असाधारण परिस्थितियों में इंटरनेशनल कमोडिटी प्राइसेस के आधार पर और रिलैक्सेशन संभव है।
प्राइस डिस्कवरी में सुधार के नए कदम
SEBI ने गोल्ड और सिल्वर ETFs के लिए प्री-ओपन सेशन में कॉल ऑक्शन मैकेनिज्म को भी अनिवार्य करने का फैसला किया है।
इसका प्रमुख कारण यह है कि गोल्ड और सिल्वर जैसी कमोडिटीज ग्लोबल मार्केट्स में लगभग पूरे दिन ट्रेड होती हैं, जबकि भारत में ETF यूनिट्स केवल डोमेस्टिक मार्केट समय के दौरान ही खरीदी और बेची जा सकती हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय प्राइस और डोमेस्टिक ETF प्राइस के बीच अंतर पैदा हो सकता है।
प्री-ओपन कॉल ऑक्शन की व्यवस्था मार्केट खुलने से पहले बेहतर प्राइस निर्धारण में मदद करेगी और ETF प्राइस को ग्लोबल मार्केट संकेतों के अधिक करीब लाएगी।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
ये बदलाव निवेशकों के लिए ETF ट्रेडिंग को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने वाले हैं। पुराने फिक्स्ड बैंड्स और T-2 NAV की देरी के कारण ETF प्राइस कभी-कभी अंडरलाइंग एसेट्स से विचलित हो जाती थीं।
नया डायनामिक सिस्टम प्राइस मूवमेंट को बेहतर तरीके से अनुमति देगा, जिससे लिक्विडिटी बढ़ेगी और निवेशक बेहतर एंट्री-एग्जिट पा सकेंगे। खासकर गोल्ड और सिल्वर ETFs में अंतरराष्ट्रीय प्राइस मूवमेंट्स को बेहतर रिफ्लेक्ट करने से निवेशकों को फायदा होगा। कुल मिलाकर, यह फ्रेमवर्क मार्केट दक्षता बढ़ाएगा और ETF को एक आकर्षक निवेश विकल्प बनाए रखेगा।
भविष्य की बातें
सार्वजनिक परामर्श, स्टॉक एक्सचेंजों की सिफारिशों और SEBI की विभिन्न समितियों की चर्चा के बाद तैयार किए गए ये नए नियम सितंबर 2026 से लागू होंगे। इन बदलावों का उद्देश्य ETF ट्रेडिंग को मार्केट की वास्तविक परिस्थितियों के अधिक अनुरूप बनाना है।
आने वाले वर्षों में इन सुधारों से ETF मार्केट में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने की उम्मीद है। 2027 में प्रस्तावित T-1 NAV ट्रांजिशन के बाद ETF की प्राइस उनके अंडरलाइंग एसेट्स को और बेहतर तरीके से दर्शा सकेंगी। इससे इक्विटी, डेब्ट और कमोडिटी ETFs की लोकप्रियता बढ़ सकती है, जबकि निवेशकों को बेहतर प्राइस डिस्कवरी और कम प्राइस विचलन का लाभ मिलेगा। लंबे समय में ये सुधार भारतीय कैपिटल मार्केट को अधिक मजबूत और परिपक्व बनाने में योगदान दे सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।