भारत सरकार ने क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को अधिक सस्टेनेबल बनाने के उद्देश्य से हाइड्रोजन-ईंधन चलित बसों और ट्रक्स के संचालन के लिए पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किए हैं। यह पहल नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत की गई है, जिसके अंतर्गत 10 अलग-अलग मार्गों पर इन वाहनों का परीक्षण किया जाएगा।
आइए समझते है कि इस पहल का उद्देश्य क्या है और यह प्रोजेक्ट्स निवेशकों के लिए क्या मायने रखते है।
क्या है मामला?
भारत सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत हाइड्रोजन-ईंधन चलित बस और ट्रक्स के लिए पाँच पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए हैं। द मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी (MNRE) ने 03 मार्च 2025 को यह जानकारी दी। इस पहल के तहत देश भर के 10 रूट्स पर 37 हाइड्रोजन-ईंधन वाले वाहन चलाए जाएंगे, जिनमें 15 फ्यूल-सेल वाहन और 22 इंटरनल कंबस्शन इंजन शामिल हैं। इसके अलावा, इस पहल के तहत 9 हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन भी स्थापित किए जाएंगे।
यह कदम भारत में क्लीन एनर्जी की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सहायक होगा।
मिशन का उद्देश्य
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का मुख्य उद्देश्य बस और ट्रक्स में हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में अपनाने और हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है।
इस मिशन के तहत, पायलट प्रोजेक्ट्स के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से बसों और ट्रक्स में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए हाइड्रोजन-आधारित वाहनों और रिफ्यूलिंग स्टेशन की सुरक्षित और प्रभावी संचालन क्षमता का परीक्षण किया जाएगा। जिससे, हाइड्रोजन-चलित वाहनों और ईंधन भरने वाले स्टेशन को सफलतापूर्वक अपनाया जा सके।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
सरकार द्वारा शुरू किए गए हाइड्रोजन-ईंधन चलित बस और ट्रक्स के ये पायलट प्रोजेक्ट देश की कुछ प्रमुख कंपनियों को सौंपे गए हैं। इनमें टाटा मोटर्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, NTPC, ANERT, अशोक लीलैंड, HPCL, BPCL और IOCL जैसी बड़ी कंपनियाँ शामिल हैं। इन कंपनियों को इस प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है।
भारत सरकार ने इन पायलट प्रोजेक्ट्स के लिए ₹208 करोड़ की वित्तीय सहायता स्वीकृत की है और यह पायलट प्रोजेक्ट अगले 18-24 महीनों में पूरी तरह चालू हो सकते हैं।
भविष्य की बातें
भारत सरकार ने 4 जनवरी 2023 को नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की शुरुआत की थी, जिसके लिए वित्त वर्ष 2029-30 तक ₹19,744 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। यह मिशन भारत को क्लीन एनर्जी के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और ग्लोबल स्तर पर क्लीन एनर्जी ट्रांजीशन के लिए एक प्रेरणा के रूप में काम करेगा।
यह पहल देश की आर्थिक संरचना को डिकार्बनाइज़ करने, फॉसिल फ्यूल्स के आयात पर निर्भरता कम करने और भारत को ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी एवं मार्केट में अग्रणी बनाने में सहायक होगी।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर