15 अगस्त 2025 को भारत ने आज़ादी के 79 साल पूरे किए। इन सात दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। आज़ादी के समय भारत का GDP सिर्फ ₹2.7 लाख करोड़ थी, जो बढ़कर 2030 तक $7.3 ट्रिलियन तक पहुँच सकती है। इस सफर में 1966, 1981 और 1991 जैसे आर्थिक संकट के साल भी आए, लेकिन हर बार भारत ने इन चुनौतियों से निकलकर आगे बढ़ने का रास्ता बनाया और आज यह दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ-साथ सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन चुका है।
आइए स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारत की आर्थिक यात्रा के सफर पर चले, और देखें कैसे भारत विश्व गुरु बनने की रह पर आगे बढ़ रहा है।
आज़ादी के समय भारत की आर्थिक स्थिति
1947 में जब भारत ने आज़ादी हासिल की, तब देश की जनसंख्या लगभग 34 करोड़ थी और साक्षरता दर केवल 12% के आसपास थी। उस समय भारत की GDP मात्र ₹2.7 लाख करोड़ थी, जो विश्व की कुल GDP का सिर्फ 3% थी। लगभग दो सदियों के शासन में भारत से ब्रिटेन को लगातार आय का बड़ा हिस्सा स्थानांतरित होता रहा।
अर्थशास्त्री एंगस मैडिसन के अनुसार, 1857 से 1947 के बीच भारत की प्रति व्यक्ति आय लगभग स्थिर रही, जबकि इसी अवधि में ब्रिटेन की प्रति व्यक्ति आय दोगुनी से अधिक हो गई। नतीजतन, स्वतंत्र भारत ने एक कमजोर, कृषि-प्रधान और उच्च निरक्षरता वाली अर्थव्यवस्था विरासत में पाई।
योजनाओं से विकास का दौर (1951-1990)
1951 में पहली पंचवर्षीय योजना शुरू हुई, जो कृषि और सिंचाई पर केंद्रित थी, ताकि खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाया जा सके और अनाज आयात पर विदेशी करेंसी का दबाव कम हो। इसके बाद, 1956 में शुरू हुई दूसरी पंचवर्षीय योजना ने देश के आर्थिक आधुनिकीकरण की नींव रखी, जिसमें भारी इंडस्ट्रीज और कैपिटल गुड्स के उत्पादन पर फोकस किया गया, ताकि भारत की लॉन्गटर्म विकास आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
इसी बीच, राजीव गांधी ने देश को टेक्नोलॉजी के नए दौर में ले जाने की शुरुआत की। रेलवे रिज़र्वेशन का कंप्यूटरीकरण, कम्युनिकेशन का विस्तार और IT में नई पहलें इसी समय हुईं। यही वो दौर था जब भारत का सॉफ्टवेयर सर्विस इंडस्ट्री का जन्म हुआ।
इसके अलावा, 1950 के दशक से 1991 तक सरकार ने कई इंडस्ट्रीज और कंपनियों का राष्ट्रीयकरण किया। 28 मई 1953 को लागू हुए एयर कॉरपोरेशंस एक्ट के तहत संसद ने नौ एयरलाइन, एयर इंडिया, एयर सर्विसेज ऑफ इंडिया, एयरवेज (इंडिया), भारत एयरवेज, डेक्कन एयरवेज, हिमालयन एविएशन, इंडियन नेशनल एयरवेज, कलिंग एयरलाइंस और एयर इंडिया इंटरनेशनल का भी राष्ट्रीयकरण किया।
अगला बड़ा राष्ट्रीयकरण 1969 में हुआ, जब 19 जुलाई की रात प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश के 14 प्रमुख बैंक्स का राष्ट्रीयकरण घोषित किया। इसका उद्देश्य था व्यापार को प्रोत्साहन देना और देश की अर्थव्यवस्था की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा करना।
संकट से विकास की ओर भारत का सफर (1991–2000)
1991 में भारत गंभीर बैलेंस-ऑफ-पेमेंट संकट में था, विदेशी करेंसी रिज़र्व सिर्फ दो सप्ताह के आयात के लिए बचा था। इस आर्थिक इमरजेंसी ने भारत को IMF और विश्व बैंक से मदद लेने पर मजबूर किया। प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में बड़े आर्थिक सुधार शुरू हुए, जिसमें औद्योगिक लाइसेंस प्रणाली में ढील, आयात शुल्क में कटौती, विदेशी निवेश नियम आसान करना, और एक्सचेंज दर को बाजार आधारित बनाना जैसे कदम उठाए गए।
इन सुधारों का असर दिखने में लगभग एक दशक लगा, लेकिन इसके बाद भारत ने मजबूत आर्थिक वृद्धि देखी और फिर कभी बैलेंस-ऑफ-पेमेंट संकट का सामना नहीं किया। हालांकि, उम्मीद के विपरीत, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का GDP में हिस्सा खास नहीं बढ़ा, जबकि सुधारों का मुख्य फोकस यही था।
आज़ादी से आधुनिक युग तक का सफ़र
2000 के बाद भारत तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना, जिसमें डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और लगातार GDP ग्रोथ का बड़ा योगदान रहा। 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विदेशी निवेश आकर्षित करने और डोमेस्टिक उत्पादन बढ़ाने के लिए कई पहलें हुईं, जिनमें कॉरपोरेट टैक्स घटाकर मौजूदा कंपनियों के लिए 30% से 22% और नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए 15% किया गया, और GST लागू कर बिखरी हुई अप्रत्यक्ष टैक्स व्यवस्था को एकीकृत किया गया।
हालांकि, 2016 के बाद गति धीमी हुई। नोटबंदी ने आर्थिक गतिविधियों को बाधित किया, लेकिन अपने घोषित उद्देश्यों में खास सफलता नहीं पाई। प्राइवेट निवेश में गिरावट, बढ़ती आय असमानता और कमजोर कंज्यूमर डिमांड ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को दबाव में रखा।
फिर भी, आत्मनिर्भर भारत के विज़न और डोमेस्टिक सुधारों के बल पर 2025 में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना, 6.5% रियल GDP ग्रोथ और नॉमिनल GDP ₹106.57 लाख करोड़ (2014-15) से बढ़कर ₹331.03 लाख करोड़ (2024-25) हो गई।
भारत का आर्थिक भविष्य
ब्रिटिश शासन से हमें एक कमजोर भारत विरासत में मिला, लेकिन विभिन्न चुनौतियों का सामना करते हुए भारत ने खुद को एक अलग पहचान दी है। आज भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, और यह तो बस शुरुआत है। 2028 तक भारत जर्मनी को भी पीछे छोड़ते हुए तीसरे स्थान पर पहुंचने की राह पर है। अगले दशक में भारत हर 12-18 महीने में अपने GDP में लगभग 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर जोड़ने का लक्ष्य रख रहा है।
जबकि, मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया के सबसे बड़े कंस्यूमर मार्केट्स में से एक बन जाएगा। मजबूत डोमेस्टिक डिमांड, एनर्जी ट्रांज़िशन की गति और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का विस्तार इस वृद्धि के प्रमुख इंजन होंगे।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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