भारत और कनाडा ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) की भारत यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। जो एनर्जी, क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी और द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देगा। यह समझौता भारत-कनाडा रिश्तों को कई सालों के तनाव के बाद फिर से मजबूती से जोड़ने का संकेत देता है।
आइए समझते है कि भारत और और कनाडा के बीच क्या समझौता हुआ है और यह इस तनावपूर्ण स्थिति में निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है।
क्या है मामला?
2 मार्च 2026 को नई दिल्ली में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच बातचीत के दौरान यह समझौता हुआ। दोनों देशों ने C&2.6 बिलियन (लगभग $1.9 बिलियन) के यूरेनियम सप्लाई डील और आवश्यक खनिज पर एक MoU साइन किया है, जिसका लक्ष्य दोनों देशों के बीच एनर्जी और टेक्नोलॉजी संबंधों को मजबूत करना है।
इस डील के तहत कनाडाई कंपनी कैमेको कॉर्प (Cameco Corp) भारत को 22 मिलियन पाउंड (लगभग 11,000 टन) यूरेनियम सप्लाई करेगी, जिसे 2027 से 2035 के बीच प्रदान किया जाएगा। यह समझौता विशेष रूप से भारत की न्यूक्लियर जेनरेशन क्षमता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि देश अपनी न्यूक्लियर पावर क्षमता को 2047 तक मौजूदा 8.8 गीगावाट से बढ़ाकर 100 गीगावाट तक ले जाने की योजना बना रहा है।
भारत–कनाडा सहयोग
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भारत और कनाडा के बीच न्यूक्लियर पावर, रिन्यूएबल एनर्जी, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और स्पेस सेक्टर में सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौते हुए। कनाडा, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक है और ग्लोबल उत्पादन का लगभग 13–15% हिस्सा रखता है, अपने अधिकांश यूरेनियम को अमेरिका, यूरोप और एशिया के न्यूक्लियर मार्केट्स में निर्यात करता है।
अब दोनों देशों ने न सिर्फ यूरेनियम बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, सुपरकंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर जैसे इमर्जिंग सेक्टर्स में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। साथ ही, स्पेस सेक्टर में स्टार्टअप्स और इंडस्ट्री के बीच कनेक्शन मजबूत करने का निर्णय लिया गया, जिससे भविष्य की टेक्नोलॉजी इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा।
साझेदारी की नई संभावनाएं
भारत की बढ़ती एनर्जी और क्रिटिकल मिनरल्स की जरूरतों को देखते हुए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कनाडा को गैस और महत्वपूर्ण खनिजों का भरोसेमंद सप्लायर बताया। उन्होंने कहा कि भारत के मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन टेक्नोलॉजी और न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स के लिए आवश्यक क्रिटिकल मिनरल्स उपलब्ध कराने में कनाडा एक मजबूत रणनीतिक साझेदार बन सकता है। भारत के 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता बढ़ाने और एनर्जी मिश्रण में LNG की हिस्सेदारी दोगुनी करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, कनाडा को लो-कार्बन LNG का विश्वसनीय स्रोत बताया गया।
इसके साथ ही, दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर मजबूत संबंधों को भी साझेदारी की बड़ी ताकत माना गया। कनाडा में लगभग 20 लाख भारतीय मूल के लोग बिजनेस, साइंस, संस्कृति और सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, कनाडा में करीब 4 लाख भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जो अमेरिका से भी अधिक और UK की तुलना में लगभग चार गुना हैं। यह मजबूत मानव संबंध भविष्य में व्यापार, शिक्षा और तकनीकी सहयोग को और तेज करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
भारत और कनाडा के बीच बढ़ता सहयोग निवेशकों के लिए एनर्जी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में नए लॉन्गटर्म अवसर पैदा कर सकता है। दोनों देशों ने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG), सोलर पावर, ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी स्टोरेज जैसे भविष्य के एनर्जी सेक्टर्स में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई है। इस साल आयोजित होने वाली “इंडिया-कनाडा रिन्यूएबल एनर्जी एंड स्टोरेज समिट” निवेश, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और संयुक्त प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दे सकती है, जिससे भारत की क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन को गति मिलने की संभावना है।
इस सहयोग का सीधा लाभ भारत के रिन्यूएबल एनर्जी, बैटरी एवं एनर्जी स्टोरेज, ऑयल & गैस (LNG) और IT सेक्टर को मिल सकता है। कुल मिलाकर, यह साझेदारी एनर्जी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात-ओरिएंटेड भारतीय कंपनियों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा सकती है।
भविष्य की बातें
भारत और कनाडा अब अपने आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने की ओर बढ़ रहे हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने नई दिल्ली दौरे के दौरान कहा कि दोनों देश इस वर्ष के अंत तक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रख रहे हैं, जिससे पिछले वर्षों के कूटनीतिक तनाव के बाद व्यापारिक संबंध फिर से मजबूत हो सकें।
2024 में दोनों देशों के बीच गुड्स का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 13.32 बिलियन कैनेडियन डॉलर और सर्विसेज का व्यापार 19.61 बिलियन कैनेडियन डॉलर रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष ने क्रिटिकल मिनरल्स, यूरेनियम सप्लाई और फ्री ट्रेड डील पर बातचीत को आगे बढ़ाते हुए 2030 तक कुल व्यापार को 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही डिफेंस और सिक्योरिटी सहयोग को भी गहरा करने पर सहमति बनी है, जो भविष्य में रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करेगा।
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