आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज भारत की आर्थिक और तकनीकी विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। भारत में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, डेटा की बढ़ती उपलब्धता और टेक्नोलॉजी एडॉप्शन के कारण AI इंडस्ट्री तेज़ी से विकसित हो रही है। सरकारी पहल, प्राइवेट सेक्टर इनोवेशन और ग्लोबल प्रतिस्पर्धा ने मिलकर भारत को AI इकोसिस्टम में एक मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है।
आइए इस आर्टिकल में हम भारतीय AI इंडस्ट्री की वर्तमान स्थिति, विकास, आर्थिक प्रभाव, सरकारी पहल, चुनौतियां और भविष्य की संभावनाओं के बारें में जानें।
ग्लोबल AI मार्केट में भारत कहां है?
दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मार्केट अब तेज़ी से विस्तार के दौर में प्रवेश कर चुका है। अनुमान है कि 2025 से 2030 के बीच यह मार्केट 36.6% की CAGR से बढ़कर वर्ष 2030 तक लगभग 1,811.75 बिलियन US डॉलर के स्तर पर पहुँच जाएगा। यह तेज़ी दर्शाती है कि AI अब केवल एक तकनीकी अवधारणा नहीं रहा, बल्कि हेल्थकेयर, फाइनेंस, मैन्युफैक्चरिंग और गवर्नेंस जैसे हर क्षेत्र में बदलाव का बड़ा इंजन बन चुका है।
ग्लोबल AI प्रतिस्पर्धा में संयुक्त राज्य अमेरिका (US) शीर्ष पर है, जहाँ मजबूत रिसर्च इकोसिस्टम, भारी पब्लिक-प्राइवेट निवेश और नीतिगत समर्थन इनोवेशन को गति देता है। इसके बाद चीन है, जो बड़े सरकारी निवेश और व्यापक रेगुलेटरी स्ट्रक्चर की मदद से तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं भारत तीसरे स्थान पर है और लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है भले ही कंप्यूटिंग क्षमता, एडवांस रिसर्च और इनोवेशन अवसंरचना जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हों। इसके बावजूद, भारत की बढ़ती रफ्तार यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में देश ग्लोबल AI परिदृश्य में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है।
सरकारी पहल और इंडिया AI मिशन
सरकार ने AI को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मार्च 2024 में कैबिनेट ने इंडिया AI मिशन को मंजूरी दी, जिसका बजट ₹10,371.92 करोड़ है, जो पांच वर्षों में खर्च होगा। इस मिशन के तहत अब तक 38,000 से अधिक GPUs डिप्लॉय किए जा चुके हैं (आरंभिक लक्ष्य 10,000 था), जो ₹65 प्रति घंटा की सब्सिडी दर पर उपलब्ध हैं।
मिशन के सात स्तंभ हैं: कंप्यूट, एप्लिकेशन डेवलपमेंट, डेटासेट प्लेटफॉर्म (AIKosh), फाउंडेशन मॉडल्स, फ्यूचर स्किल्स, स्टार्टअप फाइनेंसिंग और सेफ एंड ट्रस्टेड AI। AIKosh पर 5,500 से अधिक डेटासेट्स और 251 AI मॉडल्स उपलब्ध हैं, जिन्हें 20 सेक्टर्स में इस्तेमाल किया जा रहा है। 12 स्टार्टअप्स को इंडियन लैंग्वेज फाउंडेशन मॉडल्स के लिए चुना गया है, जैसे सरवम AI, भारतजेन आदि।
फ्यूचर स्किल्स के तहत 500 PhD फेलो, 5,000 पोस्टग्रेजुएट और 8,000 अंडरग्रेजुएट को सपोर्ट मिल रहा है। 31 डेटा एंड AI लैब्स टियर-2 और टियर-3 शहरों में लॉन्च हो चुके हैं। इसके साथ ही, रामदेव अग्रवाल ने सरकार द्वारा बजट 2026 में 2047 तक डेटा सेंटर्स के लिए 100% टैक्स हॉलिडे जैसी नीति को एक गेम-चेंजर बताया है, जो भारत को ग्लोबल AI इंफ्रास्ट्रक्चर रेस में अग्रणी बनाने की क्षमता रखता है।
इन कदमों से स्पष्ट है कि भारत न केवल AI उपयोगकर्ता बन रहा है, बल्कि AI मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का एक ग्लोबल हब भी बन सकता है।
एजेंटिक AI और अपनापन की स्थिति
EY की सर्वे के अनुसार, भारतीय एंटरप्राइजेज जेनरेटिव AI और एजेंटिक AI में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। 47% संगठनों में कई यूज केस प्रोडक्शन में लाइव हैं, 10% स्केलिंग कर रहे हैं। 76% बिजनेस लीडर्स मानते हैं कि जेनAI का महत्वपूर्ण प्रभाव होगा, जबकि 63% खुद को तैयार मानते हैं।
24% संगठनों ने एजेंटिक AI डिप्लॉय किया है, जो वर्कफ्लो ऑटोमेशन, को-पायलट्स और मल्टी-मॉडल AI पर फोकस करता है। 71% हाइब्रिड क्लाउड पसंद करते हैं। चुनौतियां जैसे हेलुसिनेशन्स और सेफ्टी हैं, लेकिन रिस्किलिंग पर जोर है।
2026 तक AI ऑपरेशंस, कस्टमर सर्विस और सप्लाई चेन में एम्बेडेड होगा, जहां एजेंट्स इनफिनिट डिजिटल वर्कफोर्स बनाएंगे। स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स (SLMs) इंडिक लैंग्वेजेस के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
भारत का AI सफर
भारत अपने AI विकास के एक महत्वपूर्ण चरण से गुजर रहा है, जहाँ सरकार स्टार्टअप्स, इनोवेशन और तकनीकी हब को मजबूत आधार दे रही है। इंडिया AI मिशन, BHASHINI, इंडियाAI डाटासेट प्लेटफार्म, स्थानीय फाउंडेशन मॉडल्स, AI स्किलिंग प्रोग्राम और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तेजी से विस्तार कर रहे हैं। इसका प्रभाव महाकुंभ 2025 में साफ दिखा, जहाँ Bhashini-आधारित चैटबॉट और AI-आधारित भीड़ मनैजमेंट ने बड़े स्तर पर दक्षता दिखाई।
भारत का AI गवर्नेंस स्ट्रक्चर ‘पहले सक्षम बनाओ, फिर नियंत्रित करो’ की सोच पर आधारित है। इनोवेशन को प्रोत्साहित करते हुए, सुरक्षा और नैतिकता को भी प्राथमिकता दी जा रही है। DPDP एक्ट 2023 और हाल में जारी AI गवर्नेंस गाइडलाइंस जिनमें ट्रस्ट, निष्पक्षता, जवाबदेही, सुरक्षा और स्थिरता जैसे सात सिद्धांत शामिल हैं AI को जिम्मेदार और समावेशी उपयोग की दिशा में मार्गदर्शन देते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘AI for All’ दृष्टि के अनुरूप, भारत का लक्ष्य AI को आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ सामाजिक लाभ का साधन बनाना है।
भविष्य की संभावनाएं
PwC की एक रिपोर्ट के अनुसार आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI) 2035 तक भारत की अर्थव्यवस्था में लगभग 607 बिलियन डॉलर का योगदान दे सकती है। इसका प्रभाव कृषि, हेल्थकेयर, एनर्जी, शिक्षा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे पाँच प्रमुख क्षेत्रों में सबसे अधिक देखने को मिलेगा। रिपोर्ट यह भी बताती है कि ग्लोबल स्तर पर AI की प्रगति 2035 तक दुनियाभर के GDP में लगभग 15% वृद्धि का कारण बनेगी, क्योंकि AI अब रिसर्च लैब्स से बाहर निकलकर रोज़मर्रा की सर्विसेज, प्रोडक्ट्स और बिज़नेस प्रक्रियाओं का हिस्सा बन रहा है। भारत इस तेजी का लाभ उठाने के लिए नीतिगत सुधारों और केंद्रित निवेशों के ज़रिए AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने पर काम कर रहा है।
रिपोर्ट का अनुमान है कि सिर्फ पाँच प्रमुख सेक्टर्स में ही AI का योगदान 550.2 बिलियन डॉलर से 607.3 बिलियन डॉलर के बीच रह सकता है। इनमें कृषि सबसे अहम है, जो आज भी भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। आंकड़ों के अनुसार, कृषि क्षेत्र की GVA को FY25 के लगभग 637 बिलियन डॉलर से बढ़कर FY47 तक 2,359 बिलियन डॉलर तक पहुंचना होगा, ताकि विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सके।
यह साफ दिखाता है कि आने वाले वर्षों में AI केवल तकनीकी बदलाव का हिस्सा नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक वृद्धि का सबसे मजबूत आधार बनने जा रहा है।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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