भारत के ग्लोबल पार्टनर: व्यापार और निवेश की नई दिशा

भारत के ग्लोबल पार्टनर: व्यापार और निवेश की नई दिशा
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भारत पिछले कुछ दशकों में ग्लोबल व्यापार और निवेश में अपनी स्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है। वर्तमान में भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत की रणनीतिक स्थिति, विशाल कंस्यूमर बेस और नीतिगत सुधार इसे ग्लोबल व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाते हैं।

इसके साथ ही, ‘मेक इन इंडिया’ और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना जैसी पहलों के जरिए देश निर्यात और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने पर फोकस कर रहा है।

आइए समझते हैं कि भारत के व्यापार और निवेश सहयोग से ग्लोबल मार्केट में क्या बदलाव आ रहे हैं और इसका भारतीय अर्थव्यवस्था और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

क्या है मामला?

भारत पिछले कुछ दशकों में ग्लोबल व्यापार और निवेश में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। FY23 में भारत का कुल व्यापार 1.63 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो FY17 के 660.20 बिलियन डॉलर से काफी अधिक है। निर्यात की बात करें तो FY23 में यह 776.68 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें प्रमुख योगदान इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मास्युटिकल्स और टेक्सटाइल्स का रहा।

भारत की व्यापार नीति ग्लोबल मार्केट में गहरी पैठ (Penetration) बनाने पर केंद्रित है। भारत ने ASEAN, यूरोपीय संघ (EU) और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) जैसे संगठनों के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध बनाए हैं और अफ्रीका तथा लैटिन अमेरिका जैसे नए मार्केट्स की भी तलाश कर रहा है।

अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार सहयोग

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक पार्टनर है, और FY24 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 119.71 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। इस व्यापार में इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स और फार्मास्युटिकल्स का बड़ा योगदान रहा। FY24 में भारत ने अमेरिका को 77.52 बिलियन डॉलर की वैल्यू के गुड्स का निर्यात किया, जिसमें इंजीनियरिंग गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक गुड्स आदि शामिल थे।

इसके साथ ही, हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा ने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने की पहल की है। इस यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने ‘मिशन 500’ के तहत 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

सिर्फ इतना ही न हीं, यूरोपीय संघ (EU) के साथ भी भारत का व्यापारिक संबंध मजबूत हो रहा है और भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। 2023 में दोनों के बीच 129 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ। भारत और EU के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत चल रही है, जिससे क्लीन एनर्जी, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज को बढ़ावा मिलेगा।

ASEAN और मध्य पूर्व के साथ भारत के व्यापारिक संबंध

भारत का ASEAN के साथ व्यापार 2023 में 110 बिलियन डॉलर को पार कर गया, जिससे यह भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक पार्टनर बन गया। जापान और भारत दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कार्यों में मिलकर काम कर रहे हैं।

साथ ही, मध्य पूर्व (GCC देशों) के साथ भारत का व्यापार 2023 में 240 बिलियन डॉलर से अधिक था। भारत अपनी क्रूड ऑइल और प्राकृतिक गैस की जरूरतों के लिए मुख्य रूप से सऊदी अरब, UAE और कतर पर निर्भर है।
भारत-UAE CEPA समझौते के तहत, FY24 में भारत और UAE के बीच व्यापार 83.6 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो FY22 के 73 बिलियन डॉलर से 15% अधिक था।

निवेशकों के लिए इसमें क्या हैं?

भारत में निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जा रहा है। FY24 में FDI 70.94 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो FY14 के 36 बिलियन डॉलर की तुलना में लगभग दोगुना है।

इसके साथ ही, सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना ने निवेशकों को आकर्षित किया है, जिससे एप्पल, सैमसंग और टेस्ला जैसी कंपनियां भारत में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ा रही हैं। FY25 के पहले सात महीनों (अप्रैल-अक्टूबर 2024) में भारत में iPhone उत्पादन 10 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें से 70% (7 बिलियन डॉलर) का निर्यात हुआ और 3 बिलियन डॉलर का उत्पादन डोमेस्टिक मार्केट के लिए था।

इसके साथ ही, PLI योजना से 2026 तक 60 लाख से अधिक नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है, जिससे लॉजिस्टिक्स, निर्यात-ओरिएंटेड और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी।

भविष्य की बातें

भारत की ग्लोबल व्यापार रणनीति बहुआयामी है, जिसमें इनोवेशन, डायवर्सिफिकेशन और स्थिरता प्रमुख घटक हैं। सरकार क्लीन एनर्जी और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे 2023 में 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता का लक्ष्य रखा गया है।

भारत ‘चीन प्लस वन’ रणनीति के तहत ग्लोबल सप्लाई चैन का एक प्रमुख केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ और PLI योजनाओं के माध्यम से मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने से भारत बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए एक आकर्षक निवेश स्थल बनता जा रहा है, जिसका फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था और निवेशकों दोनों को होगा।

*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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