भारत में हेल्थटेक की लहर, क्या यह गेम चेंजर है?

भारत में हेल्थटेक की लहर, क्या यह गेम चेंजर है?
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भारत का हेल्थकेयर सेक्टर तेजी से बदल रहा है, जो डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से चल रहा है। पहले इमरजेंसी में मेडिकल सलाह लेना मुश्किल और समय लेने वाला था। लेकिन, टेक्नोलॉजी के अपनाने और तरक्की ने सेक्टर को बदल दिया, जिससे मेडिकल मदद आसान और तेज हुई। डेलोइट इंडिया रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थकेयर में AI का अपनाना 40% से ज्यादा हो गया, जो FMCG (30%) और मैन्युफैक्चरिंग (25%) से आगे है।

आइए जानें कि हेल्थकेयर सेक्टर टेक्नोलॉजी कैसे अपना रहा है और निवेशक को कहाँ ध्यान देना चाहिए।

भारत में हेल्थ टेक इंडस्ट्री की मौजूदा स्थिति

आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, भारत का हेल्थकेयर पर सार्वजनिक खर्च FY24 में GDP का 1.9% हो गया, जो FY23 में 1.6% था।

भारत का हेल्थ टेक सेगमेंट, जो FY23 में हेल्थकेयर इनोवेशन का 25% था, इंडस्ट्री FY20 में US$ 3 बिलियन से बढ़कर FY23 में US$ 7 बिलियन हो गई, जो इसकी तेज तरक्की दिखाती है।

इसके अलावा, भारत में हेल्थ टेक सॉल्यूशंस दो हिस्सों में बंटे हैं:

  • कंज्यूमर-फेसिंग सॉल्यूशंस: इसमें टेलीमेडिसिन, ई-फार्मेसी, ई-डायग्नोस्टिक्स, और वेलनेस प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
  • एंटरप्राइज-फेसिंग सॉल्यूशंस: इसमें B2B ई-कॉमर्स, SaaS-बेस्ड हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम, और क्लिनिक व फार्मेसी मैनेजमेंट टूल्स शामिल हैं।

कोविड-19 महामारी ने हेल्थकेयर में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के लिए उत्प्रेरक का काम किया, जिसने इन टेक्नोलॉजी को अपनाने की रफ्तार बढ़ाई। हालांकि, तरक्की के बावजूद, हेल्थकेयर में AI का अपनाना बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज से पीछे है।

भारत में हेल्थ-टेक की जरूरत

भारत में अभी डॉक्टर-टू-पेशेंट रेशियो 1:1,500 है और प्रति 1,000 लोगों पर सिर्फ 1.7 नर्स हैं, जो बढ़ती आबादी की हेल्थकेयर जरूरतों के लिए काफी कम है। 2030 तक भारत में हर 800 मरीजों के लिए एक डॉक्टर होने का अनुमान है। इसके अलावा, भारत में हेल्थकेयर की बढ़ती डिमांड को देखते हुए 1.54 मिलियन डॉक्टर और 2.4 मिलियन नर्स की जरूरत है।

मेडिकल प्रोफेशनल्स की भारी कमी और GDP के प्रतिशत के रूप में कम हेल्थकेयर खर्च से हेल्थकेयर सेक्टर में टेक्नोलॉजी की तत्काल जरूरत दिखती है।

इसके अलावा, भारत में हॉस्पिटल बेड की कमी है और 2025 तक प्रति 1,000 लोगों पर 3 हॉस्पिटल बेड का लक्ष्य है, जिसके लिए 3 मिलियन अतिरिक्त बेड चाहिए।

हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी में सरकारी पहल

मेडटेक मित्रा पहल: मेडटेक इनोवेशन को बढ़ावा देने, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने और आयात पर निर्भरता कम करने का प्लेटफॉर्म, जिसका विजन 2047 तक भारत के हेल्थकेयर सेक्टर को बदलना है।

डिजिटल डॉक्टर लीडरशिप मैच्योरिटी मॉडल (DDLMM): द हेल्थ पार्लियामेंट ने शुरू किया ताकि क्लिनिशियन टेक्नोलॉजी को अपनाएं और क्लिनिकल प्रोसेस व परिणामों पर इसका असर मापें।

मिशन SCALE: डिजिटल हेल्थ स्टार्टअप्स की ग्रोथ तेज करने के लिए ग्लोबल लीडर्स, स्टार्टअप फाउंडर्स और निवेशकों को जोड़कर हेल्थकेयर में इनोवेशन बढ़ाना।

टैक्स छूट: देश में बने मेडिकल टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स के लिए 15 साल की इनकम टैक्स छूट है।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन: यूनिक हेल्थ IDs के जरिए हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स और मरीजों को जोड़कर एक डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम बनाना, इन्फ्रास्ट्रक्चर, सर्विलांस और रिसर्च को बेहतर करना। यह शहरी और
ग्रामीण हेल्थकेयर को मजबूत करता है और हेल्थ क्राइसिस में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करता है।

ई-संजीवनी: डिजिटल हेल्थ इक्विटी और यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) को बढ़ावा देता है। यह स्मार्टफोन से डॉक्टर तक तेज पहुंच और आयुष्मान भारत हेल्थ और वैलनेस सेंटर्स के जरिए रिमोट हेल्थकेयर सर्विसेज देता है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

प्रैक्टो, फ़ार्मइजी, नेटमेड्स, कल्ट फिट, और टाटा समर्थित 1mg जैसे अनलिस्टेड प्लेयर्स हेल्थ-टेक क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहे हैं। जहां एक ओर स्टार्टअप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश कर रहे हैं, वहीं अपोलो, फोर्टिस हेल्थकेयर, नारायण हेल्थ, मैक्स हेल्थकेयर, मेदांता और एस्टर DM हेल्थकेयर जैसे बड़े अस्पताल भी AI आधारित टूल्स का इस्तेमाल करके अपनी मेडिकल सेवाएं बेहतर बना रहे हैं।

भविष्य की बातें

भारत का हेल्थकेयर सेक्टर एक शानदार डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से गुजर रहा है। कोविड-19 के बाद न सिर्फ कंज्यूमर स्वीकृति बढ़ी, बल्कि हेल्थ-टेक स्टार्टअप्स का उभार और कॉर्पोरेट इंटरेस्ट भी पेशेंट केयर, डायग्नोस्टिक्स और पहुंच को बदल रहा है।

हालांकि, डॉक्टर्स की कमी और इन्फ्रास्ट्रक्चर गैप जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी इन गैप्स को भरने में अहम रोल निभा सकती है।

इसके अलावा, AI के 2025 तक भारत के GDP में $25-30 बिलियन जोड़ने की उम्मीद है, और टेलीमेडिसिन मार्केट उसी दौरान US$ 5.4 बिलियन तक पहुंचेगा, जो रिमोट हेल्थकेयर सॉल्यूशंस की बढ़ती मांग और टेक्नोलॉजी की तरक्की से चलेगा। मौजूदा डिमांड और स्वीकृति को देखते हुए 2.7-3.5 मिलियन नई टेक जॉब्स बनने की उम्मीद है।

*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर

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