भारत का IPO मार्केट: क्या यह अब तक का सबसे बड़ा साल है?

भारत का IPO मार्केट: क्या यह अब तक का सबसे बड़ा साल है?
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भारत का प्राइमरी मार्केट इस समय एक अभूतपूर्व तेजी के दौर से गुजर रहा है। साल 2025 न केवल पुराने रिकॉर्ड तोड़ रहा है, बल्कि यह भारत के अब तक के ‘सबसे बड़े IPO वर्ष’ के रूप में अपनी जगह पक्की कर चुका है। जैसे-जैसे हम साल के अंत की ओर बढ़ रहे हैं, दिसंबर का महीना एक ग्रैंड फिनाले की तरह उभर रहा है, जहाँ कई दिग्गज कंपनियां मार्केट में दस्तक देने के लिए तैयार हैं।

अभी भारतीय मार्केट एक ऐतिहासिक दिसंबर की तैयारी कर रहा है। यह उत्साह केवल डोमेस्टिक कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी और मल्टीनेशनल कंपनियां भी अपनी भारतीय यूनिट्स को यहां लिस्ट कराने के लिए कतार में हैं। यह तेजी भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और निवेशकों के बढ़ते भरोसे का प्रतीक है।

आइए समझते हैं कि भारतीय प्राइमरी मार्केट को इस बार सबसे बड़े IPO वर्ष के रूप में देखा जा रहा है और यह स्थिति निवेशकों के लिए क्या मायने रखती है।

क्या है मामला?

भारत का प्राइमरी मार्केट 2025 में रिकॉर्ड फंडरेजिंग की ओर बढ़ रहा है। अब तक लगभग ₹1.5 लाख करोड़ जुटाए जा चुके हैं और इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि दिसंबर में ही ₹35,000–40,000 करोड़ का बड़ा पाइपलाइन तैयार है बशर्ते सेकेंडरी मार्केट में कोई तेज गिरावट न आए। अगर यह रफ्तार बनी रहती है, तो साल का कुल आंकड़ा ₹1.8–1.9 लाख करोड़ के बीच पहुंच सकता है, जो 2024 के लगभग ₹1.6 लाख करोड़ के पिछले ऑल-टाइम हाई को भी पीछे छोड़ देगा।

प्राइम डाटाबेस के अनुसार, 2022 और 2023 में फंडरेजिंग अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन 2024 में यह चक्र अचानक पलट गया और फंड रेजिंग तीन गुना बढ़ गयी। 2025 में नवंबर तक ही मार्केट पिछले पूरे साल के आंकड़े को लगभग छू चुका है। दिसंबर की मजबूत पाइपलाइन यह सुनिश्चित करती है कि 2025, 2024 को काफी पीछे छोड़ते हुए भारत का अब तक का सबसे बड़ा फंडरेजिंग वर्ष बनेगा।

विदेशी कंपनियों का आकर्षण और ‘प्रीमियम’ वैल्यूएशन

भारतीय IPO मार्केट की सफलता की कहानी का एक दिलचस्प पहलू मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs) का बढ़ता आकर्षण है। ग्लोबल कंपनियां देख रही हैं कि भारतीय मार्केट उनकी लोकल बिज़नेस यूनिट्स को उनकी मूल कंपनियों की तुलना में बहुत अधिक प्रीमियम पर महत्व दे रहा है।

इस संदर्भ में सबसे चौंकाने वाला उदाहरण LG इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया का है। हालिया लिस्टिंग के बाद, LG की भारतीय यूनिट का मार्केट कैप $12.6 बिलियन तक पहुंच गया, जबकि कोरिया में स्थित इसकी पैरेंट कंपनी का वैल्यूएशन लगभग $10.1 बिलियन ही है। इसके अलावा, हुंडई मोटर इंडिया ने भी भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO पेश किया, जिसके जरिए $3.3 बिलियन जुटाए गए।

CNBC TV18 के अनुसार, एनालिस्ट का मानना है कि भारत में मजबूत डोमेस्टिक लिक्विडिटी और रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के कारण, विदेशी कंपनियां यहां लिस्टिंग को प्राथमिकता दे रही हैं। कोका-कोला जैसी दिग्गज कंपनियां भी अपनी भारतीय यूनिट्स को लिस्ट कराने पर विचार कर रही हैं क्योंकि यहां उन्हें बेहतर वैल्यूएशन मिल रहा है। यह ट्रेंड भारतीय मार्केट की गहराई और मजबूती को दर्शाती है।

दिसंबर का मेगा लाइन-अप

दिसंबर की पाइपलाइन में कई बिग-टिकट IPO शामिल हैं, जो मार्केट को दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकते है।

Meesho सबसे प्रमुख ऑफरिंग है, जो लगभग ₹6,500 करोड़ का IPO लाने जा रही है जिसमें ₹4,250 करोड़ का फ्रेश इश्यू शामिल है। कंपनी लगभग $6 बिलियन के वैल्यूएशन की ओर देख रही है और इसके 21.3 करोड़ वार्षिक ट्रांजैक्टिंग यूज़र इसकी मजबूत पकड़ दर्शाते हैं।

फ्रैक्टल एनालिटिक्स, भारत की पहली AI कंपनी के रूप में, ₹4,900–5,000 करोड़ के IPO की तैयारी में है। इसमें ₹1,279.3 करोड़ का फ्रेश इश्यू होगा। FY25 में कंपनी ने ₹2,765.4 करोड़ का रेवेन्यू और ₹220 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है।

ICICI प्रूडेंशियल AMC लगभग ₹10,000 करोड़ के OFS-आधारित IPO के साथ आ रही है। मार्च 31, 2025 के अनुसार, भारत के दूसरे सबसे बड़े म्यूचुअल फंड हाउस के पास ₹9.14 लाख करोड़ का AUM और 13.3% मार्केट हिस्सेदारी है।

रिन्यूएबल स्पेस की क्लीन मैक्स एनवायरो एनर्जी सॉल्यूशंस लगभग ₹5,200 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। वहीं, अमागी मीडिया लैब्स करीब ₹1,020 करोड़ का फ्रेश इश्यू लाएगी और सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज 2.76 करोड़ शेयर्स के OFS के रूप में मार्केट में आएगी।

कुल मिलाकर, यह मजबूत लाइन-अप दिसंबर को 2025 की रिकॉर्ड फंडरेजिंग रफ्तार को और तेज करने वाला महीना बनाता है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

निवेशकों के लिए मौजूदा IPO माहौल अवसरों से भरा है। मार्केट किसी एक सेक्टर पर निर्भर नहीं है बल्कि टेक, कंज्यूमर, फिनटेक, AI और रिन्यूएबल जैसे डाइवर्सिफाइड सेक्टर्स से मजबूत पाइपलाइन सामने आ रही है, जिससे निवेशकों को विभिन्न सेक्टर्स में निवेश का अवसर मिल रहा है।

नवंबर में आए कई IPO ने कमजोर ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) के बावजूद बेहतर लिस्टिंग दी। फिजिक्सवाला केवल ₹10 के GMP के बावजूद 33% प्रीमियम पर लिस्ट हुआ, जबकि पाइन लैब्स ने ₹5 के GMP पर भी 9.5% प्रीमियम दिया। यह दर्शाता है कि डिमांड की वास्तविक मजबूती GMP से कहीं अधिक है।

फिर भी, निवेशकों को सावधान रहना चाहिए। कुछ IPO हाई वैल्यूएशन पर आ सकते हैं, जैसा LG इलेक्ट्रॉनिक्स के मामले में देखा गया। इसलिए कंपनी के फंडामेंटल्स को ध्यान में रखकर ही निवेश निर्णय लेना समझदारी होगी।

भविष्य की बातें

यदि आपको लगता है कि 2025 का अंत धमाकेदार है, तो 2026 की शुरुआत और भी भव्य होने का संकेत दे रही है। क्योंकि द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, Equirus कैपिटल के अनुमान बताते हैं कि 2026 में देश में लगभग $20 बिलियन तक की नई लिस्टिंग देखने को मिल सकती हैं। इस पाइपलाइन में जिओ, NSE, SBI म्यूचुअल फंड, OYO, फोनपे और फ्लिपकार्ट जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जो भारतीय मार्केट इतिहास के सबसे व्यापक इश्यू कैलेंडर में से एक बना सकते हैं।

सिर्फ इतना ही नहीं, अगर दिसंबर की डील्स तय समय पर पूरी होती हैं, तो 2025 न सिर्फ 2024 को बड़े अंतर से पीछे छोड़ेगा, बल्कि भारत को दुनिया के सबसे सक्रिय प्राइमरी मार्केट्स में मजबूती से स्थापित करेगा। इसके पीछे डोमेस्टिक निवेशकों की मजबूत लिक्विडिटी, स्थिर सेकेंडरी मार्केट और टेक, कंज्यूमर, रिन्यूएबल और फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों की बढ़ती लिस्टिंग योजनाएं प्रमुख फैक्टर्स हैं।

*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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