पेट्रोलियम मिनिस्ट्री ने पहली बार देश के अलग-अलग रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए LPG (कुकिंग गैस) प्रोडक्शन के अधिकतम टारगेट तय किए हैं जो भारत की डोमेस्टिक LPG प्रोडक्शन का दोगुने से ज्यादा है। यह कदम वेस्ट एशिया युद्ध के बाद आयातेड कुकिंग गैस में डिसरप्शन से उपजी कमजोरी को दूर करने के लिए उठाया गया है।
आइए इस LPG सिक्योरिटी नेट को विस्तारपूर्वक समझें और जानें क्या यह सेक्टर के लिए अच्छी खबर है।
क्या है मामला?
पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मिनिस्ट्री ने 13 अगस्त को जारी ऑर्डर में 21 रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए अधिकतम LPG प्रोडक्शन लेवल तय किए हैं। कुल मिलाकर यह प्रोडक्शन पोटेंशियल 63,810 टन प्रतिदिन है, जो FY25-26 के डोमेस्टिक LPG प्रोडक्शन का दोगुने से ज्यादा और देश की दैनिक खपत का करीब 70% है।
यह फ्रेमवर्क पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स (मेंटेनेंस ऑफ प्रोडक्शन, स्टोरेज एंड सप्लाई) ऑर्डर, 1999, में संशोधन करके लाया गया है। यह टारगेट तभी लागू होंगे जब सप्लाई में कमी या डिसरप्शन की स्थिति पैदा हो।
भारत ने FY25-26 में 33.2 मिलियन टन LPG की खपत की, यानी करीब 91,000 टन प्रतिदिन। इसमें से डोमेस्टिक प्रोडक्शन सिर्फ 13.1 मिलियन टन (लगभग 35,900 टन प्रतिदिन) था, जबकि बाकी का 21.3 मिलियन टन (लगभग 58,400 टन प्रतिदिन) आयात किया गया। इसका मतलब है कि 64% से ज्यादा LPG जरूरत आयात पर निर्भर थी।
रिलायंस को सबसे बड़ा टारगेट
रिलायंस इंडस्ट्रीज के पुराने जामनगर रिफाइनरी को सबसे बड़ा टारगेट दिया गया है, 18,000 टन LPG प्रतिदिन। यह रिफाइनरी 33 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाली DTA (डोमेस्टिक टैरिफ एरिया) रिफाइनरी है, जिसका प्रोडक्शन स्थानीय मार्केट में बेचा जाता है।
इसके अलावा, 18 सरकारी ऑइल कंपनियों की रिफाइनरियों को मिलाकर 31,470 टन प्रतिदिन का टारगेट दिया गया है। रूस की रोसनेफ्ट-समर्थित नायारा एनर्जी की वाडीनार रिफाइनरी (20 मिलियन टन क्षमता) को 4,480 टन प्रतिदिन का टारगेट मिला है। वहीं, ONGC और गेल जैसे अपस्ट्रीम गैस प्रोड्यूसर्स को मिलाकर 6,460 टन प्रतिदिन का टारगेट दिया गया है।
इस ऑर्डर में 18 पब्लिक सेक्टर रिफाइनरियों, 3 प्राइवेट सेक्टर कंपनियों और 3 अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए प्रोडक्शन लेवल तय किए गए हैं। रिलायंस के बाद BPCL की कोच्चि रिफाइनरी को 4.80 KTPD और नायारा एनर्जी को 4.48 KTPD का टारगेट मिला है, तीनों मिलाकर कुल पोटेंशियल का 27.28 KTPD हिस्सा रखते हैं।
वेस्ट एशिया संकट से सबक
यह संकट तब पैदा हुआ जब ईरान युद्ध की शुरुआत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया। इस रास्ते से भारत को सऊदी अरब जैसे देशों से अपने 90% LPG आयात मिलते थे।
सप्लाई प्रभावित होने पर सरकार ने मार्च में रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन के लिए इस्तेमाल होने वाली स्ट्रीम्स को LPG प्रोडक्शन में डायवर्ट करने का आदेश दिया। इंडस्ट्रियल और कमर्शियल यूजर्स को बिक्री रोकी गई, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रिफिल बुकिंग की आवृत्ति बढ़ाई गई और उन्हें पाइप्ड नेचुरल गैस पर शिफ्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
संकट अधिक होने पर डोमेस्टिक LPG प्रोडक्शन बढ़ाकर करीब 55,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया था। मध्य जून से सप्लाई में सुधार के बाद इमरजेंसी ऑर्डर धीरे-धीरे वापस ले लिए गए। अब नए ऑर्डर में इमरजेंसी निर्देशों के बजाय फैसिलिटी-वार प्रोडक्शन लेवल तय किए गए हैं।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
इस फ्रेमवर्क के तहत कंपनियों को LPG स्टोरेज, इवैक्युएशन और ट्रांसपोर्टेशन के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए रखने का आदेश दिया गया है। साथ ही, नेफ्था (naphtha)-टू-LPG कन्वर्जन और गैसोलीन-बेस्ड फ्लूइड कैटेलिटिक क्रैकिंग यूनिट को पेट्रो-फ्लूइड कैटेलिटिक क्रैकिंग यूनिट में अपग्रेड करने जैसे तकनीकी उपाय अपनाने को कहा गया है ताकि मौजूदा रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से ज्यादा LPG निकाला जा सके।
सरकार ने खुद को यह अधिकार दिया है कि जब भी वह पब्लिक इंटरेस्ट में जरूरी समझे, रिफाइनर्स, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और अपस्ट्रीम प्रोड्यूसर्स को तय मात्रा और अवधि के लिए LPG प्रोडक्शन बढ़ाने का निर्देश दे सकती है। नियमों के उल्लंघन पर एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट, 1955, के तहत दंड का प्रावधान है। इससे रिलायंस, नायारा जैसी रिफाइनिंग कंपनियों के ऑपरेशनल निर्णयों में सरकार की भूमिका बढ़ती है।
भविष्य की बातें
सरकार हर छह महीने में यानी 1 जनवरी और 1 जुलाई को प्रोडक्शन शेड्यूल अपडेट करेगी। इसमें नई रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों के साथ-साथ टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड से बढ़ने वाली अतिरिक्त क्षमता को भी शामिल किया जाएगा।
सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी या कोई अन्य अधिकृत एजेंसी इस फ्रेमवर्क के इम्प्लीमेंटेशन की निगरानी करेगी। इस कदम का मकसद यह है कि भविष्य में LPG आयात में कोई डिसरप्शन हो, तो वह पिछले संकट जैसे शॉर्टेज और राशनिंग में न बदले। वेस्ट एशिया संकट से सबक लेकर सरकार ने अब देश की रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम प्रोड्यूसर्स को एक स्थायी फ्रेमवर्क के तहत ला दिया है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।