भारत के SME IPO मार्केट में SEBI एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य केवल अधिक कंपनियों के लिए SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग आसान करना नहीं है, बल्कि छोटे निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना और कंपनियों के लिए IPO की लागत कम करना भी है।
यह बदलाव ऐसे समय में प्रस्तावित है जब SME IPO मार्केट में गतिविधि काफी तेज बनी हुई है। ऐसे में प्रस्तावित सुधार SME मार्केट के अगले चरण की दिशा तय कर सकते हैं।
आइए समझते हैं कि SEBI के प्रस्तावित SME IPO रीफॉर्म में क्या बदलने वाला है और इसका कंपनियों व निवेशकों पर क्या असर हो सकता है।
क्या है मामला?
SEBI के प्राइमरी मार्केट एडवाइजरी कमेटी ने 12 अगस्त को SME लिस्टिंग से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की है। इसके बाद SEBI से जल्द एक कंसल्टेशन पेपर जारी करने और पब्लिक फीडबैक लेने की उम्मीद है। यानी फिलहाल ये बदलाव अंतिम नियम नहीं हैं, बल्कि प्रस्तावित सुधार हैं।
सबसे बड़ा बदलाव SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने वाली कंपनियों की पात्रता से जुड़ा है। प्रस्ताव के अनुसार, ₹4,000 करोड़ तक की मार्केट वैल्यू वाली कंपनियों को SME प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की अनुमति मिल सकती है। मौजूदा व्यवस्था में आमतौर पर ₹500 करोड़ से कम वैल्यूएशन वाली कंपनियां स्मॉल-कैप कैटेगरी से जुड़ी मानी जाती हैं, जबकि SME प्लेटफॉर्म पर आम तौर पर ₹5 बिलियन से कम वैल्यू वाली कंपनियां आती हैं।
इसके साथ ही, SME प्लेटफॉर्म के लिए पेड-अप कैपिटल की सीमा ₹25 करोड़ से बढ़ाकर ₹100 करोड़ करने का प्रस्ताव है। इससे ₹1,000 करोड़ से ₹4,000 करोड़ के बीच वैल्यू वाली कंपनियों को SME प्लेटफॉर्म और मेनबोर्ड, दोनों में से विकल्प चुनने की सुविधा मिल सकती है। यह SME प्लेटफॉर्म शुरू होने के बाद 2012 से अब तक का सबसे बड़ा ओवरहॉल हो सकता है।
₹2 लाख की ट्रेडिंग बाध्यता हटाने की तैयारी
SEBI SME शेयरों में ₹2 लाख की मिनिमम ट्रेडिंग साइज हटाने पर विचार कर रहा है। मौजूदा नियम के तहत बोलियां ₹2 लाख के मल्टीपल में लगानी होती हैं, जो छोटे निवेशकों के लिए बड़ी एंट्री बैरियर है। खास बात यह है कि SEBI ने दो साल से भी कम समय पहले ही इस सीमा को ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख किया था, ताकि SME प्राइमरी मार्केट में सट्टेबाजी को नियंत्रित किया जा सके।
प्रस्ताव लागू होने पर निवेशक छोटी रकम में SME शेयरों की खरीद-बिक्री कर सकेंगे, जिससे मार्केट की पहुंच और संभावित लिक्विडिटी बढ़ सकती है। इसके साथ ही, SEBI तीन साल तक डेजिग्नेटेड मार्केट मेकर रखने और मर्चेंट बैंकर्स से पूरे IPO को अंडरराइट कराने जैसी शर्तों को भी आसान करने पर विचार कर रहा है। इससे कंपनियों की लिस्टिंग कॉस्ट घट सकती है, हालांकि मार्केट-मेकिंग की मौजूदा लिक्विडिटी व्यवस्था में भी बदलाव आएगा।
SME IPO की लागत पर पड़ेगा सीधा असर
SEBI के प्रस्तावित बदलाव SME कंपनियों की लिस्टिंग कॉस्ट को कम कर सकते हैं। अभी मार्केट-मेकर्स को लगातार बाय और सेल कोट्स देने होते हैं, जबकि कमजोर मांग की स्थिति में अंडरराइटर्स की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। इससे कंपनियों पर अतिरिक्त खर्च आता है। Prime Database के अनुसार, SME IPO में इन्वेस्टमेंट-बैंकिंग फीस औसतन जुटाई गई रकम की 5.3% है, जबकि मेनबोर्ड IPO में यह करीब 2.2% है। यानी SME IPO की लागत मेनबोर्ड ऑफरिंग से काफी अधिक है।
SEBI मार्केट-मेकिंग और अंडरराइटिंग की इन शर्तों को आसान करने पर विचार कर रहा है। इससे SME प्लेटफॉर्म कंपनियों के लिए अधिक लागत-कुशल बन सकता है और बड़ी कंपनियों को भी इस प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग के लिए आकर्षित कर सकता है। हालांकि, यह बदलाव ऐसे समय में प्रस्तावित है जब SME मार्केट में रेगुलेटरी निगरानी पहले ही बढ़ाई गई है। 2026 में अब तक करीब 100 SME लिस्टिंग हो चुकी हैं, जबकि 2025 में 267 लिस्टिंग हुई थीं। 2026 की पहली छमाही में करीब 80 SMEs की लिस्टिंग भी हुई।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
निवेशकों के नजरिए से सबसे महत्वपूर्ण बदलाव ₹2 लाख की न्यूनतम ट्रेडिंग साइज को हटाना है। वर्तमान नियमों में ₹2 लाख के मल्टीपल में बोली लगाने की बाध्यता छोटे निवेशकों की भागीदारी को सीमित करती है। इसे हटाने से निवेशक छोटी मात्रा में SME शेयर खरीद या बेच सकेंगे।
यह बदलाव SME मार्केट को अधिक सुलभ बना सकता है और निवेशकों की संख्या बढ़ाने में मदद कर सकता है। साथ ही, ₹1,000 करोड़ से ₹4,000 करोड़ की वैल्यू वाली कंपनियों को SME प्लेटफॉर्म या मेनबोर्ड चुनने का विकल्प मिलने से निवेशकों के सामने आने वाली कंपनियों का दायरा भी बढ़ सकता है।
लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि आसान एंट्री अपने आप बेहतर निवेश का मतलब नहीं है। प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य मार्केट तक पहुंच बढ़ाना है; किसी SME कंपनी की बिजनेस क्वालिटी या वैल्यूएशन की गारंटी देना नहीं।
भविष्य की बातें
SEBI का यह प्रस्ताव SME IPO मार्केट को अधिक व्यापक, सस्ता और निवेशकों के लिए सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है। खासकर 2026 में अब तक करीब 100 SME लिस्टिंग और 2025 में 267 लिस्टिंग का आंकड़ा दिखाता है कि इस सेगमेंट में पहले से मजबूत गतिविधि है।
हालांकि, यह सुधार अभी प्रस्ताव के स्तर पर हैं और SEBI द्वारा कंसल्टेशन पेपर तथा आगे की प्रक्रिया के बाद ही तस्वीर स्पष्ट होगी। यदि ₹4,000 करोड़ तक की कंपनियों को SME प्लेटफॉर्म का विकल्प मिलता है, ₹2 लाख की न्यूनतम ट्रेडिंग साइज हटती है और मार्केट-मेकिंग तथा अंडरराइटिंग की अनिवार्यताओं में बदलाव होता है, तो SME IPO मार्केट की संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।