भारत में प्लास्टिक इंडस्ट्री का बढ़ता मार्केट: एक्सपोर्ट और ग्रोथ

भारत में प्लास्टिक इंडस्ट्री का बढ़ता मार्केट: एक्सपोर्ट और ग्रोथ
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प्लास्टिक इंडस्ट्री, आज भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी है। यह इंडस्ट्री न केवल लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करती है, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य, पैकेजिंग, ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता वस्तुओं जैसे डाइवर्सिफाइड क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कर चुका है। ग्लोबल मंच पर प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ-साथ, भारत की प्लास्टिक इंडस्ट्री ने निर्यात के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय प्रगति की है।

आज जब दुनिया पर्यावरणीय संतुलन, सस्टेनेबल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही है, भारत की प्लास्टिक इंडस्ट्री के सामने भी अनेक अवसर और चुनौतियां हैं।

इस आर्टिकल में हम भारत की प्लास्टिक इंडस्ट्री की वर्तमान स्थिति, उसके प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर्स, आयात-निर्यात के आँकड़े, निवेशकों के लिए संभावनाओं और भविष्य की दिशा का विस्तृत विश्लेषण करेंगे

इंडस्ट्री का इतिहास और वर्तमान स्थिति

भारत की प्लास्टिक इंडस्ट्री देश की अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में स्थापित है। इसकी शुरुआत 1957 में पॉलिस्टीरिन के प्रोडक्शन के साथ हुई, और तब से यह इंडस्ट्री तेजी से विकसित हुई है। आज यह इंडस्ट्री पूरे देश में फैल चुकी है, जिसमें 2,500 से अधिक निर्यातक और 30,000 प्रोसेसिंग यूनिट्स शामिल हैं, जिनमें से 85-90% छोटे और मध्यम इंटरप्राइजेज़ हैं। यह इंडस्ट्री लगभग 40 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करती है, जो इसे भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रोजगार क्रिएटर बनाता है।

भारत के प्लास्टिक निर्यात में 25.95% के साथ सबसे बड़ा हिस्सा रॉ मटेरियल का है।

भारत में प्लास्टिक और लिनोलियम, घरेलू सामान, मछली पकड़ने के जाल, फर्श कवरिंग, चिकित्सा उपकरण, पैकेजिंग सामग्री, प्लास्टिक फिल्म, पाइप और कच्चे माल जैसे डाइवर्सिफाइड प्रोडक्ट्स का निर्माण होता है। निर्यात के मामले में, भारत मुख्य रूप से प्लास्टिक कच्चा माल, फिल्म, शीट, बुने हुए बोरे, कपड़े और तिरपाल का निर्यात करता है।

IBEF के अनुसार, वर्तमान में इस इंडस्ट्री की इकोनॉमिक वैल्यू 3 लाख करोड़ रुपये (37.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर) है, जिसे सरकार अगले चार-पाँच वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये (126 बिलियन अमेरिकी डॉलर) तक ले जाने का लक्ष्य रखती है।

भारत के प्लास्टिक निर्यात में तेजी

FY2025 (जनवरी 2025 तक) में, भारत का प्लास्टिक निर्यात 89,296 करोड़ रुपये (10.34 बिलियन डॉलर) के ऐतिहासिक स्तर को छू गया, जो देश के प्लास्टिक इंडस्ट्री की गतिशीलता और ग्लोबल डिमांड में बढ़ोतरी को दर्शाता है।

इस अवधि में, प्लास्टिक फिल्म्स एवं शीट्स के निर्यात में 19.6% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जबकि FIBC (बड़े बोरे) और बुने हुए बोरे का निर्यात 17.2% बढ़ा। इसके अलावा, वॉवन फैब्रिक्स, तिरपाल तथा लचीले व कठोर पैकेजिंग आइटम्स ने 10.1% की स्थिर वृद्धि दिखाई, जिससे भारत ग्लोबल प्लास्टिक मार्केट में एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है। सिर्फ इतना ही नहीं, FY25 (अप्रैल-जनवरी) का कुल निर्यात 9.6% की वार्षिक वृद्धि के साथ 10.34 बिलियन डॉलर पर पहुँच गया।

भारत के प्लास्टिक और लिनोलियम निर्यात FY22 में सबसे ऊंचे स्तर 13.3 बिलियन डॉलर पर पहुंचे।

भारतीय प्लास्टिक निर्यात के प्रमुख डेस्टिनेशन

भारत की प्लास्टिक इंडस्ट्री 200 से अधिक देशों में अपने प्रोडक्ट निर्यात करती है, जो इसकी ग्लोबल पहुंच को दर्शाता है। FY2023 में, अमेरिका भारत के प्लास्टिक प्रोडक्ट्स का सबसे बड़ा उपभोक्ता रहा, जिसके साथ 2.31 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.71% कम था। यह कुल प्लास्टिक निर्यात का 19.37% हिस्सा था। चीन दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता था, जिसके साथ 690.95 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, जो कुल निर्यात का 5.78% था।

FY24 के दौरान, भारत के प्लास्टिक प्रोडक्ट्स के निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिका (USA) का रहा।

FY24 में भारत से फ्रांस को कुल प्लास्टिक निर्यात लगभग 1,692 करोड़ रुपये (195.93 मिलियन डॉलर) का रहा। इस व्यापार को और बढ़ावा देने के लिए, PLEXCONCIL (प्लास्टिक्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल) ने FY22 की पहली तिमाही में इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के साथ सहयोग किया था।

सिर्फ इतना ही नहीं, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में प्लास्टिक उद्योग से अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को अपनाने पर जोर दिया, ताकि ‘मेड इन इंडिया’ प्लास्टिक प्रोडक्ट्स ग्लोबल सप्लाई चेन में और मजबूती से स्थापित हो सकें।

भारत सरकार की पहल

भारत सरकार ने प्लास्टिक इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जो इस क्षेत्र को ग्लोबल स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद कर रहे हैं:

  • प्लास्टिक पार्क योजना: देश में चरणबद्ध तरीके से प्लास्टिक पार्क स्थापित किए जा रहे हैं, जो प्रोडक्शन को बढ़ाएंगे। सरकार प्रत्येक प्रोजेक्ट के लिए 50% लागत या अधिकतम 40 करोड़ रुपये (5 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  • सरकारी पहलें: ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’, और ‘स्किल इंडिया’ जैसी योजनाएँ इंडस्ट्री को गति दे रही हैं। ‘डिजिटल इंडिया’ के तहत आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य स्थानीय प्लास्टिक पार्ट्स निर्माताओं को लाभ पहुँचा रहा है।
  • सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoEs): सरकार ने पेट्रोकेमिकल तकनीक को उन्नत करने और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए CoEs स्थापित करने का प्रोग्राम शुरू किया है, जो पॉलिमर और प्लास्टिक के नए अनुप्रयोगों को प्रोत्साहित करेगा।
  • CIPET की स्थापना: रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में कौशल विकास के लिए 23 सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (CIPET) को मंजूरी दी गई है, जो तकनीकी और वित्तीय सहयोग को बढ़ाएंगे।

स्टॉक्स जिन पर नजर रखनी चाहिए

भारत की प्लास्टिक प्रोसेसिंग इंडस्ट्री मुख्य रूप से भारतीय व्यवसायों द्वारा संचालित है। मार्केट का लगभग 85% हिस्सा छोटे और मध्यम उद्यमों के पास है। इस क्षेत्र में कई प्लेयर्स असंगठित हैं, लेकिन संगठित क्षेत्र में कुछ प्रमुख कंपनियां अपने-अपने क्षेत्रों में अग्रणी हैं।

भारतीय प्लास्टिक इंडस्ट्री का भविष्य

भारत की प्लास्टिक इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रहा है और ग्लोबल मार्केट में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है और सरकार की पहल जैसे ‘मेक इन इंडिया’ और प्लास्टिक पार्क की स्थापना इंडस्ट्री को और मजबूती प्रदान कर रही हैं। प्लास्टिक्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (PLEXCONCIL) ने 2027 तक निर्यात को 25 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, भारत ने UAE और ऑस्ट्रेलिया के साथ हाल के फ्री ट्रेड समझौतों से नए मार्केट्स में अवसर बढ़े हैं, जो निर्यात को और प्रोत्साहित करेंगे।

हालाँकि, इंडस्ट्री को पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भारत में प्रतिवर्ष 3.46 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से सिर्फ 8% ही रीसाइकिल हो पाता है। सेंटर फॉर इंटरनेशनल एन्वायरनमेंटल लॉ की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, 2050 तक प्लास्टिक से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 56 गीगाटन से अधिक हो सकता है, जो शेष कार्बन बजट का 10-13% है।

*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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