भारत का टेलीकॉम सेक्टर अब केवल मोबाइल कनेक्टिविटी और इंटरनेट सेवाओं तक सीमित नहीं रह गया है। तेजी से बढ़ता डेटा इस्तेमाल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती जरूरतें इस सेक्टर में नए अवसर पैदा कर रही हैं।
इस बदलाव के साथ भारत विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने और डोमेस्टिक स्तर पर टेलीकॉम इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेष रूप से 5G नेटवर्क, नेटवर्किंग इक्विपमेंट और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों के लिए संभावनाएं बढ़ रही हैं।
आइए भारत के टेलीकॉम इक्विपमेंट मार्केट को विस्तार से समझें और जानें कि इसकी बढ़ती डिमांड भारतीय कंपनियों और निवेशकों के लिए कितना बड़ा अवसर बन सकती है।
क्या है मामला?
KPMG की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का टेलीकॉम और नेटवर्क इक्विपमेंट मार्केट वित्त वर्ष 2024-25 के 25 बिलियन डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2031-32 तक 50 बिलियन डॉलर पहुंच सकता है। यानी अगले कुछ वर्षों में मार्केट का साइज लगभग दोगुना होने का अनुमान है।
इस दौरान भारतीय मार्केट की सालाना ग्रोथ करीब 10% रहने का अनुमान है, जबकि ग्लोबल टेलीकॉम इक्विपमेंट मार्केट लगभग 5.3% की दर से बढ़ सकता है। ग्लोबल मार्केट वित्त वर्ष 2022-23 के 498 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2029-30 तक 714 बिलियन डॉलर पहुंचने का अनुमान है।
भारत में 5G नेटवर्क का तेजी से विस्तार इस ग्रोथ का महत्वपूर्ण आधार है। देश में 5.63 लाख से अधिक 5G बेस स्टेशन स्थापित हो चुके हैं। वहीं, स्वदेशी तकनीक के जरिए BSNL के 97,000 से अधिक 4G साइट्स को सपोर्ट मिल रहा है।
यह विस्तार भारत को केवल टेलीकॉम सेवाओं का बड़ा मार्केट नहीं, बल्कि नेटवर्क इक्विपमेंट और संबंधित तकनीकों का महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग हब भी बना सकता है।
डेटा की बढ़ती डिमांड, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ सीमित
टेलीकॉम सेक्टर के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ते डेटा इस्तेमाल को अधिक रेवेन्यू में बदलना है। KPMG के अनुसार, वर्ष 2025 से 2030 के बीच मोबाइल नेटवर्क ट्रैफिक करीब 17% सालाना बढ़ने का अनुमान है, जबकि टेलीकॉम ऑपरेटर्स की रेवेन्यू ग्रोथ केवल 2.7% रह सकती है।
ग्लोबल स्तर पर मोबाइल नेटवर्क ट्रैफिक 203 एक्साबाइट प्रति महीने से बढ़कर 515 एक्साबाइट पहुंचने का अनुमान है। वहीं, ऑपरेटर्स का रेवेन्यू 1.19 लाख करोड़ डॉलर से बढ़कर 1.36 लाख करोड़ डॉलर हो सकता है। इसका मतलब है कि डेटा इस्तेमाल लगभग छह गुना तेज रफ्तार से बढ़ेगा, लेकिन उससे कमाई अपेक्षाकृत धीमी रहेगी।
ऐसे में टेलीकॉम कंपनियों को नेटवर्क विस्तार के साथ अपनी कॉस्ट एफिशिएंसी और नई डिजिटल सर्विसेज से रेवेन्यू बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। AI, क्लाउड और एडवांस्ड नेटवर्किंग टेक्नोलॉजी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी आत्मनिर्भरता
भारत में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग तेजी से विकसित हो रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का मोबाइल हैंडसेट उत्पादन ₹6.27 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जबकि निर्यात लगभग ₹2.59 लाख करोड़ रहा। पिछले दशक में मोबाइल फोन का उत्पादन 33 गुना और निर्यात 165 गुना बढ़ा है। इसके अलावा, टेलीकॉम इक्विपमेंट में आयात सब्स्टीट्यूशन करीब 60% तक पहुंच चुका है। हालांकि, डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन अभी भी 20% से नीचे है और कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के लिए 80% से अधिक आयात पर निर्भरता बनी हुई है।
टेलीकॉम इक्विपमेंट का सालाना निर्यात लगभग 60 करोड़ से 1 बिलियन डॉलर है, जबकि आयात 4 से 5 बिलियन डॉलर के बीच है। इससे स्पष्ट है कि असेंबली बढ़ने के बावजूद डोमेस्टिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग में काफी संभावनाएं बाकी हैं। सरकार की PLI स्कीम से जुड़ी कंपनियों ने ₹1.01 लाख करोड़ से अधिक की बिक्री दर्ज की है। आगे सेमीकंडक्टर, रिसर्च और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत कर सकता है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
टेलीकॉम इक्विपमेंट मार्केट के विस्तार से 5G डिवाइस, नेटवर्किंग इक्विपमेंट और संबंधित तकनीक बनाने वाली कंपनियों के लिए अवसर बढ़ सकते हैं। इस सेक्टर में HFCL, Tejas Networks और Dixon Technologies प्रमुख लिस्टेड कंपनियों में शामिल हैं।
HFCL ने 8 लाख से अधिक स्वदेशी 5G डिवाइस सप्लाई किए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रेवेन्यू 21.77% बढ़कर ₹4,949.3 करोड़ और नेट प्रॉफिट 90.14% बढ़कर ₹329.44 करोड़ रहा। Tejas Networks 5G रेडियो और नेटवर्क इक्विपमेंट विकसित कर रही है। हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 में इसका रेवेन्यू 87.6% घटकर ₹1,103.3 करोड़ रहा और कंपनी को ₹908.9 करोड़ का घाटा हुआ। वहीं, Dixon Technologies का रेवेन्यू 25.8% बढ़कर ₹48,872.8 करोड़ और रिपोर्टेड नेट प्रॉफिट 31.3% बढ़कर ₹1,438.6 करोड़ रहा। कंपनी 5G नेटवर्किंग इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार कर रही है।
निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि मार्केट की ग्रोथ के साथ कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी, ऑर्डर बुक और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन का आकलन भी जरूरी है।
भविष्य की बातें
आने वाले वर्षों में भारत के टेलीकॉम सेक्टर की ग्रोथ केवल नेटवर्क विस्तार तक सीमित नहीं रहेगी। AI, सेमीकंडक्टर, क्लाउड और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का बढ़ता उपयोग एडवांस्ड टेलीकॉम इक्विपमेंट की डिमांड को गति दे सकता है। KPMG के अनुसार, भारत के लिए अगली बड़ी चुनौती केवल बड़े पैमाने पर उत्पादन करना नहीं, बल्कि अधिक डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी विकसित करना है।
इसके लिए रिसर्च, स्वदेशी तकनीक, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल पार्टनरशिप पर ध्यान देना होगा। यदि कंपनियां इन अवसरों को सफलतापूर्वक रेवेन्यू और प्रॉफिट में बदल पाती हैं, तो भारतीय टेलीकॉम इक्विपमेंट इंडस्ट्री ग्लोबल मार्केट में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकती है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।