भारत में त्योहारों का सीजन हमेशा से खरीदारी और कंजम्पशन के लिए महत्वपूर्ण रहा है। कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, ज्वेलरी, डोमेस्टिक सामान और ट्रैवल जैसी कैटेगरी में इस दौरान डिमांड बढ़ती है। हालांकि, इस बार शहरी उपभोक्ताओं के खरीदारी करने के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है।
बढ़ती महंगाई, महंगे होते लोन और भविष्य के खर्चों को लेकर अनिश्चितता के कारण परिवार अब गैर-जरूरी खरीदारी पर अधिक सावधानी बरत रहे हैं। उपभोक्ता खरीदारी पूरी तरह बंद करने के बजाय अपने बजट, जरूरत और मिलने वाली वैल्यू को प्राथमिकता दे रहे हैं।
आइए भारत के फेस्टिव सीजन में बदलते कंजम्पशन ट्रेंड को विस्तार से समझें और जानें कि इसका रिटेल सेक्टर, कंपनियों और निवेशकों पर क्या असर पड़ सकता है।
क्या है मामला?
लोकलसर्कल्स के सर्वे के अनुसार, शहरी भारतीय परिवार इस फेस्टिव सीजन में गैर-जरूरी खरीदारी पर औसतन करीब ₹20,000 खर्च कर सकते हैं। वर्ष 2026 में कुल फेस्टिव खर्च लगभग 6% घटकर ₹1.97 लाख करोड़ रहने का अनुमान है, जबकि 2025 में यह ₹2.10 लाख करोड़ और 2024 में ₹1.85 लाख करोड़ था।
यह सर्वे देश के 307 जिलों से मिले 67,000 से अधिक जवाबों पर आधारित है। इसमें 57% शहरी परिवारों ने खरीदारी की योजना जताई, जबकि 31% परिवार कोई अतिरिक्त खर्च नहीं करना चाहते। करीब 18% परिवार ₹10,000 से कम, 15% परिवार ₹10,001 से ₹25,000 और 9% परिवार ₹25,001 से ₹50,000 खर्च करने की योजना बना रहे हैं। वहीं, 6% का बजट ₹50,001 से ₹1 लाख और 9% का ₹1 लाख से अधिक है।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि फेस्टिव डिमांड खत्म नहीं हुई है, बल्कि उपभोक्ता अब खर्च करने में अधिक सावधानी बरत रहे हैं।
महंगाई और बढ़ती ब्याज दरों से दबाव
फेस्टिव खर्च घटने की प्रमुख वजह डोमेस्टिक बजट पर बढ़ता दबाव है। सितंबर 2026 में रिटेल इन्फ्लेशन अगस्त के 4.83% से बढ़कर 5.54% पहुंच गया, जबकि फूड इन्फ्लेशन 5.97% से बढ़कर 7.74% हो गया। इसके अलावा, RBI ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया। इससे कर्ज की लागत बढ़ने की आशंका है। उदाहरण के लिए, ₹50 लाख के 25 साल के होम लोन पर पूरी बढ़ोतरी लागू होने से EMI लगभग ₹817 मासिक बढ़ सकती है।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 का इन्फ्लेशन अनुमान 5% से बढ़ाकर 5.2% किया है और अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में महंगाई 6% तक पहुंचने का अनुमान जताया है। दूसरी तरफ, परिवारों की फाइनेंशियल लायबिलिटीज मार्च 2026 तक GDP के 45.8% पहुंच गई थीं। ऐसे में जरूरी खर्च पूरे करने के बाद अतिरिक्त खरीदारी के लिए उपलब्ध पैसा सीमित हो रहा है।
खरीदारी का बदला ट्रेंड
फेस्टिव सीजन में कपड़े, फुटवियर और एक्सेसरीज सबसे लोकप्रिय कैटेगरी हैं। सर्वे के अनुसार, खरीदारी की योजना बनाने वाले 72% परिवार इन पर खर्च करेंगे। वहीं, होम अप्लायंसेज और फर्नीचर तथा ट्रैवल पर 45-45%, जबकि फूड और गिफ्टिंग पर 39% परिवार खर्च करने की योजना बना रहे हैं।
मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर 22%, होम रेनोवेशन पर 22%, ऑटोमोबाइल पर 10% और ज्वेलरी पर केवल 6% परिवारों की खरीदारी की योजना है। खास बात यह है कि 83% परिवार खरीदारी के लिए अपनी सेविंग्स का कुछ हिस्सा इस्तेमाल कर सकते हैं। लगभग 34% परिवार फेस्टिव बजट का कम से कम एक चौथाई हिस्सा बचत से निकालेंगे, जबकि 16% पूरी खरीदारी सेविंग्स से करेंगे।
YouGov के अलग सर्वे में 26% उपभोक्ता अपना सामान्य बजट बनाए रखते हुए स्मार्ट शॉपिंग करना चाहते हैं, जबकि 23% गैर-जरूरी खरीदारी घटाने की योजना बना रहे हैं।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
फेस्टिव खर्च में संभावित गिरावट रिटेल, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, ज्वेलरी और ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए मिला-जुला संकेत है।
एक तरफ कंज्यूमर खर्च में सावधानी बढ़ रही है, दूसरी तरफ ऑनलाइन सेल्स मजबूत रहने की उम्मीद है। डेटम इंटेलिजेंस के अनुसार, ऑनलाइन फेस्टिव सेल्स 2025 के ₹1.20 लाख करोड़ से बढ़कर 2026 में ₹1.50-1.55 लाख करोड़ पहुंच सकती है।
ऑटो सेक्टर में भी मजबूती है। सितंबर में वाहन रजिस्ट्रेशन 31.82% बढ़कर रिकॉर्ड 25.37 लाख यूनिट पहुंच गए। हालांकि, महंगी ज्वेलरी की डिमांड पर दबाव है। गणेश चतुर्थी के दौरान गोल्ड सेल्स वॉल्यूम लगभग 15% घटा।
निवेशकों के लिए कंपनियों की सेल्स वॉल्यूम, प्रॉफिट मार्जिन, डिस्काउंट और कंज्यूमर डिमांड पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। बढ़ती बिक्री जरूरी नहीं कि समान अनुपात में मुनाफा भी बढ़ाए।
भविष्य की बातें
आने वाले समय में भारतीय कंजम्पशन मार्केट की दिशा महंगाई, ब्याज दरों, डोमेस्टिक आय और उपभोक्ताओं के भरोसे पर निर्भर करेगी। RBI ने FY27 का GDP ग्रोथ अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% किया है, लेकिन उपभोक्ताओं में खर्च को लेकर सावधानी बनी हुई है।
YouGov के सर्वे में केवल 14% उपभोक्ताओं ने पिछले साल से अधिक खर्च करने की योजना जताई। वहीं, 49% खरीदारी में प्रोडक्ट क्वालिटी और 42% कीमत या डिस्काउंट को महत्वपूर्ण मानते हैं।
इससे संकेत मिलता है कि भविष्य में कंपनियों को केवल फेस्टिव ऑफर्स पर निर्भर रहने के बजाय बेहतर क्वालिटी, किफायती प्राइस और ग्राहकों की जरूरतों पर अधिक ध्यान देना होगा। जो कंपनियां इन बदलती प्राथमिकताओं के अनुरूप अपनी रणनीति बनाएंगी, वे डिमांड में बदलाव का बेहतर सामना कर सकती हैं।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
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