वर्तमान समय में, भारतीय शेयर मार्केट करेक्शन फेज से गुजर रहा है जिसकी वजह से न सिर्फ निवेशकों का भारी नुकसान हुआ है बल्कि प्राइमरी मार्केट में भी सुस्ती छाई हुई है। जिस वजह से कंपनियां IPO लाने से कतरा रही है क्योंकि उन्हें गिरते मार्केट में हायर वैल्यूएशन मिलने में मुश्किल हो सकती है।
इसलिए, SEBI से मंजूरी प्राप्त कर चुकी दो दर्जन से अधिक कंपनियां अभी तक अपने IPO लॉन्च नहीं कर पाई हैं। आइए समझते हैं कि सेकेंडरी मार्केट की गिरावट ने प्राइमरी मार्केट में रिटेल निवेशकों की रुचि को कैसे प्रभावित किया है।
क्या है मामला?
बिज़नेस टुडे के अनुसार, इस साल के पहले दो महीनों में SME IPO ने अच्छी गति दिखाई, जहां जनवरी और फरवरी में प्रत्येक महीने 20 SME IPO लॉन्च हुए। हालांकि, मार्च में अब तक केवल 6 SME IPO लॉन्च हुए हैं, जिनसे 170 करोड़ रुपये जुटाए गए। अब तक, 2025 के पहले तीन महीनों में, SME कंपनियों ने कुल 1,980 करोड़ रुपये जुटाए हैं।
मेनबोर्ड IPO की बात करें तो मार्च 2025 में अब तक कोई भी IPO लॉन्च नहीं हुआ है, और न ही किसी नए IPO की घोषणा की गई है। जनवरी 2025 में 6 मेनबोर्ड IPO ने 4,845 करोड़ रुपये जुटाए, जबकि पिछले महीने 3 IPO ने 10,878 करोड़ रुपये इकट्ठा किए। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, NSDL और एथर एनर्जी जल्द ही अपना IPO लॉन्च कर सकते हैं।
IPO मार्केट में मंदी
2024 भारतीय IPO मार्केट के लिए एक ऐतिहासिक साल रहा। इस दौरान 91 कंपनियों ने मेन बोर्ड IPO लॉन्च किए और कुल मिलाकर 1.6 लाख करोड़ रुपये जुटाए। यह उल्लेखनीय उपलब्धि मजबूत रिटेल निवेशकों की भागीदारी, अच्छी अर्थव्यवस्था और प्राइवेट केपेक्स में तेजी के कारण संभव हुई। हालांकि, 2025 में मार्केट की वोलैटिलिटी के कारण IPO गतिविधियों में कुछ धीमापन देखा जा रहा है।
प्राइम डेटाबेस के अनुसार, वर्तमान वित्तीय के पहले 6 महीनों में SEBI से मंजूरी प्राप्त कर चुकी 26 डोमेस्टिक कंपनियां अभी तक प्राइमरी मार्केट में प्रवेश नहीं कर पाई हैं। इन कंपनियों का लक्ष्य IPO के जरिए 72,000 करोड़ रुपये जुटाना है।
SEBI से मंजूरी मिलने के बाद किसी कंपनी के पास IPO लॉन्च करने के लिए 12 महीने का समय होता है। हालांकि, मार्केट में गिरावट और निवेशकों के विश्वास में कमी के कारण कंपनियां मार्केट के संभलने का इंतजार कर रही है।
सेकेंडरी मार्केट में गिरावट का असर
पिछले कई महीनों से भारतीय शेयर मार्केट लगातार गिरावट का सामना कर रहा है। इस गिरावट के पीछे ग्लोबल व्यापार विवाद, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की निकासी, कॉर्पोरेट अर्निंग्स को लेकर चिंताएं और वैल्यूएशन का दबाव जैसे फैक्टर्स जिम्मेदार हैं।
ट्रेंडलाइन के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक महीने में 17 मार्च 2025 तक निफ्टी 50 में 1.83% की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि तिमाही आधार पर यह गिरावट 8.75% तक पहुंच गई है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
मार्केट में गिरावट के कारण IPO में रिटेल निवेशकों की रुचि कम होती जा रही है। जब सेकेंडरी मार्केट में निवेशकों को नुकसान होता है, तो निवेशक नई लिस्टिंग में पैसा लगाने से हिचकते हैं और IPO एक बार का अवसर होता है, और कंपनियां अपने स्टेक को कम वैल्यूएशन पर बेचने से बचती हैं। इसके परिणामस्वरूप, 2019 से अब तक 94 कंपनियों ने अपने IPO मंजूरी को लैप्स कर दिया है, जो लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपये के बराबर है।
भविष्य की बातें
IPO मार्केट की स्थिति अब सेकेंडरी मार्केट की रिकवरी पर निर्भर करती है। यदि सेंसेक्स और निफ्टी में सुधार होता है और विदेशी निवेशकों (FPIs) की बिकवाली कम होती है, तो कंपनियां अपने IPO लॉन्च करने के लिए फिर से सक्रिय हो सकती हैं। सेकेंडरी मार्केट में स्थिरता आने से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और कंपनियों को अपने IPO के लिए बेहतर वैल्यूएशन मिल सकेगा।
हालांकि, मार्केट में वोलैटिलिटी के बावजूद, 2025 में कई बड़ी कंपनियां अपने पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी कर रही हैं, जो आने वाले समय में IPO मार्केट को गति दे सकती हैं।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर