जुलाई में मार्केट का प्रदर्शन: 10 वर्षों का विश्लेषण

जुलाई में मार्केट का प्रदर्शन: 10 वर्षों का विश्लेषण
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भारतीय शेयर मार्केट, विशेष रूप से निफ्टी 50 और सेंसेक्स, ने पिछले एक दशक में जुलाई के महीने में उल्लेखनीय प्रदर्शन दिखाया है। ऐतिहासिक डेटा, और डोमेस्टिक व ग्लोबल आर्थिक इंडिकेटर्स के आधार पर, निवेशकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि जुलाई 2025 में मार्केट की दिशा क्या हो सकती है।

यह आर्टिकल निफ्टी 50 और सेंसेक्स के पिछले 10 वर्षों के जुलाई प्रदर्शन, सेक्टर-स्पेसिफिक ट्रेंड, और जुलाई 2025 के लिए विस्तृत दृष्टिकोण का विश्लेषण करता है।

निफ्टी 50 और सेंसेक्स का ऐतिहासिक प्रदर्शन

पिछले 10 वर्षों (2015-2024) में, निफ्टी 50 ने जुलाई में 9 बार सकारात्मक रिटर्न दिया है, केवल 2019 में -5.69% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि औसतन, जुलाई में निफ्टी 50 का प्रदर्शन 3.57% रहा है, जो इसे निवेशकों के लिए आकर्षक महीना बनाता है। इसके साथ ही, सेंसेक्स ने भी समान ट्रेंड दिखाया और औसतन 3.43% की वृद्धि दर्ज की है।

जुलाई में मार्केट की औसत वृद्धि यह दर्शाती है कि जुलाई 2025 में मार्केट के लिए सकारात्मक प्रदर्शन की उम्मीद है।

सेक्टर प्रदर्शन: जुलाई में कौन सा सेक्टर चमका?

पिछले 10 वर्षों में विभिन्न सेक्टर्स ने जुलाई में विविध प्रदर्शन दिखाया है। डेटा के आधार पर, कुछ सेक्टर्स ने असाधारण वृद्धि दर्ज की, जबकि अन्य में उतार-चढ़ाव देखा गया। आइए पिछले 10 वर्षों में किस सेक्टर ने कितनी बार 5% से अधिक का रिटर्न दिया देखते है:

नोट: यह एनालिसिस 2015 से 2024 के डेटा के आधार पर कैलकुलेट किया गया है।

पिछले 10 वर्षों में जुलाई के दौरान PSU बैंक सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा है।

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि एनर्जी, PSU बैंक, कमोडिटीज और PSE जैसे सेक्टर्स जुलाई में मजबूत प्रदर्शन करते हैं। इसके साथ ही, अगर हम पिछले 10 वर्षों में 10% से अधिक रिटर्न की बात करें तो, PSU बैंक (4), मेटल (3), और IT, एनर्जी फार्मा एवं रियल्टी ने 2 बार रिटर्न दिया है।

जुलाई में FII और DII का कैसा रहा निवेश ट्रेंड?

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) मार्केट की गति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पिछले 5 वर्षों में जुलाई के महीने में निवेश के रुझान इस प्रकार हैं:

जुलाई 2023 में FIIs का ₹33,994 करोड़ और जुलाई 2024 में DIIs का ₹23,486 करोड़ के साथ सर्वाधिक निवेश रहा।

2024 में FII और DII दोनों ने मजबूत निवेश किया, जो मार्केट की सकारात्मक मूवमेंट को दर्शाता है। अब जुलाई 2025 में निवेशकों को FII और DII की गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि FII और DII फ्लो निवेशकों के सेंटीमेंट को काफी हद तक प्रभावित करते है।

जुलाई 2025 मार्केट कैसा रह सकता है?

जुलाई 2025 के लिए मार्केट का दृष्टिकोण ऐतिहासिक ट्रेंड, और डोमेस्टिक व ग्लोबल आर्थिक इंडिकेटर्स के आधार पर सकारात्मक दिखाई देता है। निम्नलिखित फैक्टर्स जुलाई 2025 की गति को प्रभावित कर सकते हैं:

ऐतिहासिक मजबूती: निफ्टी 50 और सेंसेक्स ने पिछले 10 वर्षों में जुलाई में 9 बार सकारात्मक रिटर्न दिया है, जिसमें 2022 में 8.73% और 8.58% की प्रभावशाली वृद्धि शामिल है। केवल 2019 में (-5.69%) नकारात्मक प्रदर्शन देखा गया। यह मजबूत ऐतिहासिक रिकॉर्ड जुलाई 2025 के लिए आशावाद को बढ़ाता है।

सेक्टर-विशिष्ट अवसर: IT, PSU बैंक, और एनर्जी जैसे सेक्टर्स ने जुलाई में लगातार मजबूत प्रदर्शन दिखाया है। उदाहरण के लिए, जुलाई 2020 में IT (22.48%) और 2022 में PSU बैंक (14.38%) ने असाधारण वृद्धि दर्ज की।

FII और DII गतिविधियाँ: जुलाई 2023 और 2024 में FII और DII के मजबूत निवेश (2024 में FII: 27,958 करोड़ रुपये, DII: 23,486 करोड़ रुपये) ने मार्केट को समर्थन दिया। यदि जुलाई 2025 में समान निवेश फ्लो जारी रहता है, तो मार्केट में सकारात्मक गति बनी रह सकती है।

डोमेस्टिक आर्थिक इंडीकेटर्स: जुलाई 2025 में जून के मासिक GST कलेक्शन, ऑटो सेल्स आंकड़े, ट्रेड डेफिसिट, इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट, HSBC मैन्युफैक्चरिंग/कंपोजिट/सर्विसेज PMI, फिस्कल डेफिसिट, इंफ्रास्ट्रक्चर आउटपुट, बैंक लोन ग्रोथ, और FX रिजर्व्स जैसे डेटा रिलीज होंगे।

ग्लोबल आर्थिक इंडीकेटर्स: जुलाई 2025 में फेड ऑफिशियल्स की स्पीच, S&P ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग/कंपोजिट/सर्विसेज PMI, ISM मैन्युफैक्चरिंग न्यू ऑर्डर्स और PMI, और इनिशियल जॉबलेस क्लेम्स जैसे वैश्विक डेटा मार्केट को प्रभावित करेंगे। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के 90-दिन के टैरिफ पॉज की समय सीमा 9 जुलाई को समाप्त हो रही है, इससे संबंधित कोई भी घोषणा मार्केट में वोलैटिलिटी ला सकती है।

निष्कर्ष

जुलाई 2025 भारतीय शेयर मार्केट के लिए एक तेज और सकारात्मक महीना हो सकता है। ऐतिहासिक रूप से निफ्टी और सेंसेक्स ने इस महीने औसतन 3.57% और 3.43% का रिटर्न दिया है। लेकिन सिर्फ ऐतिहासिक ट्रेंड ही नहीं, कुछ मूलभूत आर्थिक संकेतक भी मार्केट को सहारा दे रहे हैं। हाल ही में कच्चे तेल की कीमतों में 11% से अधिक की गिरावट आई है, जिससे महंगाई पर दबाव घटा है। वहीं, रुपये में 1.3% की मजबूती देखी गई, यह जनवरी 2023 के बाद से सबसे अच्छी साप्ताहिक बढ़त है।

इसके अलावा, Q1 FY26 के कॉरपोरेट नतीजे भी जल्द आने वाले हैं, जिससे निवेशकों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, मोतीलाल ओसवाल के सिद्धार्थ खेमका का मानना है कि “बेहतर संस्थागत निवेश, US-इंडिया ट्रेड डील की संभावनाएं, RBI की लिक्विडिटी पॉलिसी, FII की वापसी, टेक्निकल इंडिकेटर्स से मिले सपोर्ट और अच्छा मानसून, इन सब वजहों से मार्केट में बढ़त बनी रह सकती है।”

*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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