मार्केट क्रैश या करेक्शन? 2024 के 40% IPO इश्यू प्राइस से नीचे!

मार्केट क्रैश या करेक्शन? 2024 के 40% IPO इश्यू प्राइस से नीचे!
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शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव आम बात है, लेकिन 2024 की शुरुआत में IPO बूम के बाद जो गिरावट देखने को मिल रही है, उसने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। 2024 में लॉन्च हुए IPO में से 40% अपने इशू प्राइस से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। कई कंपनियों के स्टॉक्स, जो लिस्टिंग के समय आकर्षण का केंद्र थे, अब निवेशकों के लिए घाटे का सौदा बन गए हैं।

हालात ऐसे हैं कि यह समझना मुश्किल हो गया है कि यह मार्केट करेक्शन है या मार्केट क्रैश की चेतावनी के रूप में देख रहे हैं। इस आर्टिकल में हम मौजूदा स्थिति, IPO मार्केट की वास्तविकता और निवेशकों के लिए आगे की रणनीति को विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे।

क्या है मामला?

2024 की शुरुआत में भारतीय मार्केट में IPO का बूम देखने को मिला। जनवरी में ही 24 कंपनियों के IPO आए, जिनमें से 87% ने 100 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन हासिल किया। निवेशकों ने भारी उत्साह दिखाया, और कई कंपनियों के शेयर लिस्टिंग पर शानदार प्रदर्शन करने में सफल रहे। लेकिन यह तेजी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाई।

भारतीय मार्केट में IPO का बूम

इन कंपनियों के शेयर्स ने लिस्टिंग के समय अच्छा रिटर्न दिया था, लेकिन अब ये नीचे ट्रेड कर रहे हैं।

इसके साथ ही, 2024 में स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हुईं 91 कंपनियों में से लगभग 40% अपने इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड कर रही हैं। इसी तरह, पहले से लिस्टेड कंपनियों ने QIP के जरिए जो पूंजी जुटाई है, उनमें से भी 50% कंपनियों के शेयर प्राइस इश्यू प्राइस से नीचे हैं।

IPO और QIP के शेयर्स में गिरावट के पीछे की वजह

मनी कंट्रोल के अनुसार, हाल ही में लिस्ट हुए IPO (इनिशियल पब्लिक ऑफर) और QIP (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट) के शेयर्स में गिरावट का सीधा संबंध सेकेंडरी मार्केट की स्थिति से है। पिछले साल सितंबर में ऑल-टाइम हाई छूने के बाद से बेंचमार्क इंडेक्स या तो गिरावट में हैं या साइडवेज ट्रेंड में हैं। यह स्थिति नए लिस्टेड शेयर्स के प्रदर्शन को प्रभावित कर रही है।

एक और बड़ी वजह है इन IPO और QIP का एग्रेसिव ऑफर प्राइस। रिटेल निवेशक अक्सर लिस्टिंग गेन के लालच में IPO में निवेश करते हैं। लेकिन, लिस्टिंग के बाद जैसे ही यह गेम खत्म होता है, शेयर्स का प्रीमियम घटने लगता है। साथ ही, लिस्टिंग के एक महीने बाद इंस्टीट्यूशनल निवेशकों के लॉक-इन पीरियड खत्म होने पर मार्केट में शेयर्स की सप्लाई बढ़ जाती है, जिससे स्टॉक्स में गिरावट देखने को मिलती है।

यह करेक्शन है या बड़ी गिरावट की शुरुआत?

इस सवाल का जवाब देना अभी मुश्किल है, लेकिन कई संकेत बताते हैं कि यह सिर्फ एक अस्थायी करेक्शन हो सकता है। Goldman Sachs के टॉप फाइनेंशियल एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि 2025 में अमेरिकी शेयर बाजार बड़ी गिरावट का सामना कर सकता है। हाल के महीनों में बाजार में आई तेजी को देखते हुए यह करेक्शन लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह अस्थायी गिरावट होगी या लंबे समय तक बाजार पर असर डालेगी।

अगर ऐसा होता है, तो भारतीय बाजार पर भी इसका प्रभाव दिख सकता है। ग्लोबल निवेशक अमेरिकी बाजार से निकासी कर सकते हैं, जिससे इमर्जिंग मार्केट्स में अस्थिरता बढ़ सकती है। ऐसे में भारतीय निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और मार्केट के ट्रेंड पर नज़र बनाए रखनी चाहिए।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

साल 2024 में भारत ने IPO के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 2024 में 332 से अधिक IPO लिस्ट हुए, जिनमें से 81 मेनबोर्ड और 236 SME सेगमेंट के थे। यह रिकॉर्ड संख्या भारत को पहली बार ग्लोबल स्तर पर IPO वॉल्यूम के मामले में शीर्ष स्थान दिलाने में कामयाब रही। भारत ने अमेरिका और यूरोप को पीछे छोड़ते हुए अमेरिका से दोगुने और यूरोप से ढाई गुना ज्यादा IPO लिस्ट कराए।

हालांकि, इस उछाल के बीच निवेशकों को सतर्क रहना जरूरी है। हर IPO में निवेश करने के बजाय, कंपनियों के फंडामेंटल और वैल्यूएशन को गहराई से समझना चाहिए। वह स्टॉक्स जो गिरावट के दौर में भी मजबूत बिजनेस मॉडल और बेहतर बैलेंस शीट रखते हैं, लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न दे सकते हैं। इसलिए, निवेश के समय सही रणनीति और धैर्य बनाए रखना जरूरी है।

भविष्य की बातें

CNBC के अनुसार, मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के सह-संस्थापक प्रमोद गुब्बी का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार फिलहाल साइक्लिकल कंसोलिडेशन से गुजर रहा है, जो पिछले चार वर्षों की मजबूत वृद्धि के बाद एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। इसे एक हेल्थी करेक्शन के रूप में देखा जाना चाहिए।

अगर इस गिरावट के कारण वैल्यूएशन अच्छी हो जाती हैं, तो यह उन नए निवेशकों को आकर्षित कर सकता है, जो अभी तक हायर वैल्यूएशन की वजह से मार्केट में प्रवेश करने से हिचक रहे थे। इसलिए, यह करेक्शन शॉर्टटर्म वोलैटिलिटी के बावजूद, लॉन्गटर्म निवेशकों के लिए एक अवसर बन सकता है।

*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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