भारतीय शेयर मार्केट लगातार ऐसे मोड़ पर आगे बढ़ रहा है जहां डायवर्सिफिकेशन और मार्केट कवरेज पहले से कहीं अधिक विस्तृत हो रही है। इसी व्यापक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए NSE ने एक नया इंडेक्स लॉन्च किया है निफ्टी स्मॉलकैप 500। यह इंडेक्स स्मॉलकैप यूनिवर्स को बड़े स्तर पर कवर करने की कोशिश करता है, जिससे निवेशकों को भारत के छोटे लेकिन उभरते कारोबारों की दिशा को और साफ़ तौर पर समझने का मौका मिलता है।
आइए निफ्टी स्मॉलकैप 500 इंडेक्स के बारे में विस्तारपूर्वक समझते है और निवेशकों के लिए इसके क्या मायने है।
क्या है मामला?
NSE द्वारा लॉन्च किया गया यह नया इंडेक्स कुल 500 स्मॉलकैप कंपनियों के प्रदर्शन को ट्रैक करता है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि निफ्टी मिडकैप 150 के बाद आने वाले पूरे स्मॉलकैप सेगमेंट को व्यापक रूप से शामिल किया जा सके। इंडेक्स का निर्माण फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइज़ेशन के आधार पर किया गया है, ताकि वेटेज वास्तविक मार्केट हिस्सेदारी को दर्शा सके।
निफ्टी स्मॉलकैप 500 को 23 जनवरी 2026 को लॉन्च किया गया। इसका बेस ईयर 2005 और बेस वैल्यू 1,000 रखी गई है। इंडेक्स की गणना एंड-ऑफ-डे आधार पर की जाती है, और इसका उद्देश्य स्मॉलकैप मार्केट का एक संतुलित और गहरा प्रतिनिधित्व देना है।
यह इंडेक्स बेंचमार्किंग, इंडेक्स फंड, ETF लॉन्च, और विभिन्न स्ट्रक्चर्ड प्रोडक्ट्स के लिए भी आधार बन सकता है, जिससे निवेशकों को स्मॉलकैप मार्केट में पारदर्शी एक्सेस मिलता है।
इंडेक्स की कार्यप्रणाली और पात्रता
इस इंडेक्स की कार्यप्रणाली (Methodology) काफी सख्त और पारदर्शी है। इसमें शामिल होने के लिए कंपनियों को कुछ विशिष्ट पात्रता मानदंडों को पूरा करना होता है:
- रैंकिंग: कंपनियों को पिछले छह महीनों के औसत दैनिक टर्नओवर और औसत दैनिक फुल मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर शीर्ष 1000 कंपनियों में स्थान बनाना होता है।
- बहिष्करण (Exclusions): जो स्टॉक निफ्टी 100 या निफ्टी मिडकैप 150 का हिस्सा हैं, वे इस इंडेक्स के लिए पात्र नहीं हैं। साथ ही, यदि किसी कंपनी की रैंक औसत दैनिक फुल मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर शीर्ष 225 के भीतर है, तो उसे भी इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।
- अनिवार्य समावेशन: निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स का हिस्सा बनने वाले सभी स्टॉक हर समय निफ्टी स्मॉलकैप 500 इंडेक्स का हिस्सा रहेंगे।
- रीबैलेंसिंग: इंडेक्स को साल में दो बार, यानी अर्ध-वार्षिक (Semi-Annually) आधार पर रीबैलेंस किया जाएगा। इसके लिए कट-ऑफ तिथियां 31 जनवरी और 31 जुलाई निर्धारित की गई हैं।
सेक्टर और स्टॉक का प्रदर्शन
अगर हम इस इंडेक्स के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो यह विभिन्न सेक्टर्स का एक दिलचस्प मिश्रण प्रस्तुत करता है। 31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, ‘फाइनेंशियल सर्विसेज’ सेक्टर का इंडेक्स में सबसे अधिक 20.76% बेटेज है। इसके बाद ‘कैपिटल गुड्स’ 14.40% और ‘हेल्थकेयर’ 12.46% के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। अन्य प्रमुख सेक्टर्स में केमिकल्स (6.63%), ऑटोमोबाइल (6.37%), और फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (5.01%) शामिल हैं।
स्टॉक्स की बात करें तो, ‘मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (MCX) 2.03% वेटेज के साथ इंडेक्स में सबसे ऊपर है। इसके बाद ‘लौरस लैब्स लिमिटेड’ (1.54%) और ‘रेडिको खेतान लिमिटेड’ (0.92%) का स्थान है।
रिटर्न के मामले में, 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुए वर्ष में इस इंडेक्स ने थोड़ा संघर्ष किया है। पिछले 1 वर्ष में इसने -7.38% का प्राइस रिटर्न और -6.89% का कुल रिटर्न दिया है। हालांकि, लंबी अवधि में तस्वीर सकारात्मक है। पिछले 5 वर्षों में इंडेक्स ने 23.58% (प्राइस रिटर्न) और 24.47% (कुल रिटर्न) का रिटर्न दिया है। अपनी शुरुआत से लेकर अब तक, इसने 15.14% CAGR (प्राइस रिटर्न) और 16.49% (कुल रिटर्न) दर्ज किया है।
फंडामेंटल वैल्युएशन के मोर्चे पर, इंडेक्स का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 28.94 और प्राइस-टू-बुक (P/B) रेश्यो 3.37 है, जबकि डिविडेंड यील्ड 0.73% है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
निफ्टी स्मॉलकैप 500 का लॉन्च निवेशकों के लिए कई नए द्वार खोलता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह इंडेक्स फंड पोर्टफोलियो को बेंचमार्क करने के लिए एक सटीक मानक प्रदान करता है। अब फंड मैनेजर अपने स्मॉल-कैप ओरिएंटेड फंड्स के प्रदर्शन की तुलना एक व्यापक 500-स्टॉक इंडेक्स से कर सकते हैं, जो पहले सीमित था।
इसके अलावा, यह इंडेक्स नए निवेश प्रोडक्ट्स के लिए आधार बनेगा। इसका उपयोग इंडेक्स फंड्स, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) और स्ट्रक्चर्ड प्रोडक्ट्स लॉन्च करने के लिए किया जा सकता है। इसका मतलब है कि भविष्य में निवेशक सीधे इस इंडेक्स में पैसा लगाकर एक साथ 500 स्मॉल-कैप कंपनियों में डायवर्सिफिकेशन प्राप्त कर सकेंगे। यह उन निवेशकों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जो व्यक्तिगत स्टॉक चुनने के जोखिम के बिना स्मॉल-कैप ग्रोथ स्टोरी का हिस्सा बनना चाहते हैं।
भविष्य की बातें
भले ही पिछले एक साल में -7.38% का नकारात्मक रिटर्न देखा गया हो, लेकिन 5 साल का 23.58% का रिटर्न स्मॉल-कैप क्षेत्र की वोलैटिलिटी और उच्च विकास क्षमता दोनों को उजागर करता है। जैसे-जैसे भारतीय अर्थव्यवस्था आगे बढ़ेगी, यह इंडेक्स एसेट मैनेजर्स और पैसिव निवेशकों दोनों के लिए एक अनिवार्य उपकरण बनने की उम्मीद है।
इसके साथ ही, ऐतिहासिक ट्रेंड चार्ट बताता है कि 2005 से 2025 तक स्मॉलकैप इंडेक्स में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन लंबी अवधि का ट्रेंड मजबूत रहा है। यह दर्शाता है कि भारत का स्मॉलकैप यूनिवर्स समय के साथ परिपक्व हो रहा है और अच्छी गुणवत्ता वाली कंपनियाँ लंबे समय में वैल्यू जनरेट करती हैं।
साथ ही, जैसे-जैसे भारतीय अर्थव्यवस्था का साइज बढ़ेगा, स्मॉलकैप स्पेस में नई कंपनियों का प्रवेश, सेक्टर-वाइज विस्तार बढ़ेगा। यह इंडेक्स भविष्य में भारतीय स्मॉलकैप मार्केट का मुख्य बेंचमार्क बन सकता है।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर