सितंबर के आखिरी सप्ताह में अमेरिकी टैरिफ और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के कारण आई तेज गिरावट के बाद, अक्टूबर का महीना भारतीय शेयर मार्केट के लिए एक शानदार वापसी का महीना साबित हुआ। महीने की शुरुआत जिन उम्मीदों के साथ हुई थी, वे हकीकत में बदलती दिखीं।
एक तरफ जहाँ Q2 FY26 के बेहतर कॉर्पोरेट रिजल्ट्स ने मार्केट को सहारा दिया, वहीं US-चीन ट्रेड कम्युनिकेशन में सकारात्मक प्रगति और US फेड द्वारा रेट कट की उम्मीद ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया। त्योहारी सीजन की मजबूत खरीदारी और FII के धीरे-धीरे लौटने से मार्केट में तेजी देखी गई। महीने के अंत तक, सेंसेक्स और निफ्टी 13 महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गए, जिसने सितंबर की सारी नकारात्मकता को पीछे छोड़ दिया।
आइए समझते हैं कि अक्टूबर 2025 में मार्केट कैसा रहा और आगे नवंबर में क्या उम्मीद की जा सकती है।
अक्टूबर 2025: मार्केट का प्रदर्शन
अक्टूबर 2025 का महीना भारतीय शेयर मार्केट के लिए बेहद सकारात्मक रहा। महीने की शुरुआत में निफ्टी लगभग 24,600 के स्तर से शुरू हुआ था, जो 23 अक्टूबर को 26,000 के स्तर से भी ऊपर निकल गया। हालांकि बाद में थोड़ा करेक्शन आया है। इसी तरह, सेंसेक्स भी करीब 80,150 से बढ़कर 85,200 से भी ऊपर पहुंच गया, जो लगभग 5,000 पॉइंट्स की रिकवरी दर्शाता है।
01 अक्टूबर को निफ्टी की शुरुआत 24,620.55 के स्तर पर हुई थी, जो 30 अक्टूबर को 25,877.85 के स्तर बंद हुआ है। प्रतिशत की टर्म में बात करे तो 5.11% की ग्रोथ है। जबकि सेंसेक्स में 5.23% की बढ़त देखने को मिली। ऐतिहासिक हिसाब से अक्टूबर महीना ने पिछले कई महीनों में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जिसमें फेस्टिव डिमांड, दिवाली सेंटीमेंट, US- इंडिया ट्रेड डील की उम्मीद और Q2 के नतीजों ने अहम भूमिका निभाई है।
अक्टूबर के बड़े ट्रिगर्स
US में मजबूत आर्थिक डेटा और US-चीन ट्रेड डील की उम्मीद: अक्टूबर में सबसे बड़ी सकारात्मक खबर US-चीन की ट्रेड कम्युनिकेशन में प्रगति से आई। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक प्रारंभिक ट्रेड डील का फ्रेमवर्क तैयार किया, जिसे US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी प्रेसिडेंट शी जिनपिंग की समीक्षा के लिए प्रस्तुत किया गया। इस सकारात्मक डेवलपमेंट ने ग्लोबल व्यापार तनाव को कम करने की उम्मीद बढ़ाई और भारतीय मार्केट को सपोर्ट दिया।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता नजदीक: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई। अधिकारी ने संकेत दिया कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के ‘बहुत करीब’ हैं। यह डील 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान $191 बिलियन से दोगुना कर $500 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखती है। हालांकि, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी समझौते में जल्दबाजी नहीं करेगा।
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी: महीने की शुरुआत में, 1 अक्टूबर को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट को 5.50% पर अपरिवर्तित रखा और अपना रुख ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा। इस बैठक का सबसे बड़ा संदेश यह था कि RBI को भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर पूरा भरोसा है। RBI ने FY2025-26 के लिए भारत की GDP ग्रोथ दर का अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया, जिसने मार्केट को एक सकारात्मक दिशा दी।
फेस्टिव डिमांड: त्योहारों के लंबे सीजन और गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) में कटौती ने देशभर में कार बिक्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। इस अवधि में उपभोक्ताओं की खरीदारी भावना मजबूत रही, जिससे कई प्रमुख कार ब्रांड्स ने अपने अब तक के सबसे अधिक बुकिंग रिकॉर्ड दर्ज किए।
FII का रुख सकारात्मक: अक्टूबर 2025 में FII का रवैया बदला हुआ नजर आया। तीन महीनों की लगातार बिकवाली के बाद, 29 अक्टूबर तक FII ने ₹7,500 करोड़ की नेट खरीदारी की, जबकि DII ने ₹43,256 करोड़ की भारी खरीदारी की, यानि अक्टूबर में FIIs और DIIs ने मार्केट में नेट खरीदारी के साथ सकारात्मक रुख अपनाया, जिसका असर हमें मार्केट में भी देखने को मिला।
अक्टूबर 2025: सेक्टोरल प्रदर्शन
अक्टूबर में सेक्टोरल प्रदर्शन लगभग सकारात्मक रहा। महीने भर में PSU बैंक, कैपिटल मार्केट्स और रियल्टी सेक्टर ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। वहीं, सिर्फ मीडिया सेक्टर में मामूली गिरावट देखने को मिली।

अक्टूबर में निवेशकों का रुख अधिकतम सेक्टर्स को लेकर सकारात्मक रहा, सिर्फ मीडिया सेक्टर में मामूली गिरावट देखी गयी।
नवंबर से क्या उम्मीद करें?
भारत-अमेरिका के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की दिशा में बड़ी प्रगति देखने को मिल सकती है। दोनों देश साल के अंत तक इस समझौते के पहले चरण को पूरा करना चाहते हैं। यदि यह डील भारतीय गुड्स पर टैरिफ को घटाकर 15% तक लाने में सफल रहती है, तो यह निवेशकों और उद्योग जगत के लिए बड़ा भरोसा बढ़ाने वाला कदम होगा।
वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $191 बिलियन है, जिसे 2030 तक बढ़ाकर $500 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत ने रूसी आयात में कटौती के बदले टैरिफ में राहत पर सहमति जताई है, क्योंकि भारतीय गुड्स पर लगे 50% अमेरिकी टैरिफ का आधा हिस्सा रूस से ऑइल खरीद के दंड के रूप में लगाया गया था।
साथ ही, ग्लोबल जियोपॉलिटिकल इवेंट्स और FIIs का इनफ्लो और आउटफ्लो मार्केट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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