PLI स्कीम फिर शुरू: व्हाइट गुड्स सेक्टर के लिए वरदान?

PLI स्कीम फिर शुरू: व्हाइट गुड्स सेक्टर के लिए वरदान?
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भारत सरकार ने देश में एयर कंडीशनर (AC) और LED लाइट्स बनाने वाली कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत आवेदन करने का एक और मौका दिया है। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि कंपनियां इस क्षेत्र में काफी दिलचस्पी दिखा रही हैं और मार्केट भी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।

इस कदम से भारत में व्हाइट गुड्स बनाने की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी, जिससे न केवल बड़े निवेशक आकर्षित होंगे, बल्कि डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा मिलेगा।

तो आइए समझते हैं कि यह कदम व्हाइट गुड्स कंपनियों के लिए क्या मायने रखता है और निवेशक क्या उम्मीद कर सकते है।

क्या है मामला?

सरकार ने AC और LED लाइट्स बनाने वाली कंपनियों के लिए PLI स्कीम में अप्लाई करने का मौका चौथी बार खोला है। जो भी कंपनियां इसमें शामिल होना चाहती हैं, वे 15 सितंबर 2025 से 14 अक्टूबर 2025 के बीच आवेदन कर सकती हैं। इस योजना की शुरुआत अप्रैल 2021 में हुई थी और इसके लिए सरकार ने कुल ₹6,238 करोड़ का बजट रखा था।

इसका मकसद AC और LED लाइट्स के पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग भारत में ही करना है। यह योजना 2021-22 से 2028-29 तक चलेगी। इसके तहत, कंपनियों को उनकी बढ़ी हुई सेल्स पर 4% से 6% तक का इंसेंटिव दिया जाता है। अब तक इस योजना के तहत कंपनियों को लगभग ₹287 करोड़ दिए जा चुके हैं।

अब तक की सफलता और दोबारा खोलने का कारण

इस योजना को कंपनियों की तरफ से बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है, जो इसकी सफलता को दिखाता है। अब तक 83 कंपनियों को इस योजना के लिए चुना जा चुका है, जिन्होंने मिलकर ₹10,406 करोड़ का निवेश करने का वादा किया है। यह रकम सरकार के कुल बजट ₹6,238 करोड़ से भी ज्यादा है। इससे पता चलता है कि निवेशकों को इस योजना पर कितना भरोसा है।

कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए ही आवेदन का मौका फिर से दिया गया है। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि किसी भी प्रकार के भेदभाव से बचने के लिए, योजना के नए आवेदक और मौजूदा लाभार्थी दोनों अतिरिक्त निवेश करने के इच्छुक होने पर आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते वे तय गाइडलाइंस का पालन करें।

इस योजना में वोल्टास, ब्लू स्टार, हिंडाल्को, डाइकिन, पैनासोनिक और एलजी जैसी कई बड़ी कंपनियां पहले से ही शामिल हैं।

योजना का उद्देश्य

इस PLI योजना का मुख्य लक्ष्य भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था बढ़े और लोगों को रोजगार मिले। यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का ही एक हिस्सा है। योजना का मकसद सिर्फ असेंबल करना नहीं, बल्कि AC और LED लाइट्स बनाने के लिए जरूरी सभी छोटे-बड़े कंपोनेंट्स को भारत में ही तैयार करना है।

इससे आयात पर देश निर्भरता कम होगी और देश में ही गुड्स बनाने का एक मजबूत सिस्टम तैयार होगा। सरकार को उम्मीद है कि इस निवेश से वे जरूरी पार्ट्स भी देश में बनने लगेंगे जो अभी पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते, जिससे भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकेगा।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

यह योजना उन कंपनियों के लिए एक बड़ी सकारात्मक खबर है जो AC और LED लाइट्स के कारोबार में हैं। इस योजना के लाभार्थियों में वोल्टास, ब्लू स्टार, हिंडाल्को और ऊनो मिंडा जैसी कई कंपनियां शामिल हैं। निवेशकों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि इस योजना से इन कंपनियों को सीधा फायदा हो सकता है।

जब ये कंपनियां अपना उत्पादन और बिक्री बढ़ाएंगी, तो उन्हें सरकार से 4% से 6% तक का अतिरिक्त वित्तीय लाभ मिलेगा, जिससे उनका मुनाफा बढ़ सकता है।

बढ़ा हुआ मुनाफा अक्सर कंपनी के शेयर की प्राइस पर अच्छा असर डालता है। इसके अलावा, यह योजना कंपनियों को भारत में ही पार्ट्स बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे उनकी विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी। यह उन्हें विदेशी करेंसी के उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की समस्याओं से बचा सकता है, जिससे उनकी लागत स्थिर रहेगी और मार्जिन में सुधार हो सकता है। लंबी अवधि में, इस योजना से लाभान्वित होने वाली कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है, जो उन्हें निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बना सकती है।

भविष्य की बातें

व्हाइट गुड्स PLI योजना का दोबारा खुलना भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बड़ा अवसर लेकर आया है। अब तक कंपनियों ने करीब ₹10,406 करोड़ के निवेश का वादा किया है, जो इस बात का संकेत है कि भारत धीरे-धीरे AC और LED पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग का हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब व्हाइट गुड्स सेक्टर को हाल ही में हुई GST रेशनलाइजेशन से भी फायदा मिलने वाला है। क्योंकि पहले जहां AC जैसे हाई-वैल्यू कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर 28% तक का GST लगता था, वहीं रेशनलाइजेशन के बाद अब सिर्फ 18% टैक्स लगेगा। इससे न सिर्फ डिमांड बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को भी उत्पादन और निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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