क्विक कॉमर्स ने रोजमर्रा की खरीदारी का तरीका बदल दिया है। अब ग्राहक ग्रॉसरी, स्नैक्स और घर की जरूरतों का सामान कुछ ही मिनटों में मंगा सकते हैं। लेकिन दिवाली से पहले सामने आए एक सर्वे से पता चलता है कि ग्राहकों के लिए सिर्फ तेज डिलीवरी ही मायने नहीं रखती। वे प्राइस, प्रोडक्ट की क्वालिटी और अतिरिक्त शुल्क पर भी ध्यान देते हैं।
LocalCircles के सर्वे के मुताबिक, करीब 69% ग्राहक आमतौर पर ₹200 से ₹999 तक के ऑर्डर करते हैं, जबकि सिर्फ 16% लोग ₹1,000 या उससे ज्यादा खर्च करते हैं। इससे संकेत मिलता है कि क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल अभी मुख्य रूप से रोजमर्रा की जरूरतों के लिए हो रहा है।
आइए समझते हैं कि ग्राहकों की यह आदत कंपनियों के कारोबार और निवेशकों की नजर से क्यों महत्वपूर्ण है।
क्या है मामला?
सर्वे में 130 जिलों के यूजर्स से 2.04 लाख से अधिक जवाब मिले। इसके नतीजे बताते हैं कि 71% ग्राहक ऐसे प्लेटफॉर्म को चुनना चाहते हैं जहां प्राइस बेहतर हो या खर्च के बदले अच्छी वैल्यू मिले। वहीं, 65% के लिए प्रोडक्ट की क्वालिटी अहम है। इसके मुकाबले सिर्फ 22% ग्राहकों ने तेज डिलीवरी को अपनी प्रमुख प्राथमिकता माना।
ऑर्डर की रकम भी ग्राहकों की खरीदारी की आदत को समझने में मदद करती है। सर्वे में 27% यूजर्स का सामान्य ऑर्डर ₹400–₹599 का था, जबकि 22% ग्राहक ₹600–₹999 खर्च करते हैं। ₹200 से कम खर्च करने वाले ग्राहकों की हिस्सेदारी 7% रही।
ये आंकड़े दिखाते हैं कि क्विक कॉमर्स अब केवल जल्दी सामान पहुंचाने की सुविधा नहीं है। ग्राहक चाहते हैं कि सामान सही प्राइस पर मिले, उसकी क्वालिटी अच्छी हो और खरीदारी का पूरा अनुभव सुविधाजनक रहे।
अतिरिक्त शुल्क और प्राइस का दबाव
क्विक कॉमर्स ऐप पर किसी सामान की प्राइस आकर्षक दिख सकती है, लेकिन डिलीवरी, हैंडलिंग या छोटे ऑर्डर से जुड़े शुल्क अंतिम बिल को बढ़ा सकते हैं। सर्वे में 60% यूजर्स ने कहा कि ऐसे अतिरिक्त शुल्क अक्सर उनकी उम्मीद से ज्यादा बिल बना देते हैं। इनमें 42% ने बताया कि ऐसा बहुत बार होता है। वहीं, 43% ग्राहक कम या बिना अतिरिक्त शुल्क वाले प्लेटफॉर्म पसंद करते हैं।
ग्राहकों के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वे अलग-अलग ऐप पर प्राइसों की तुलना कर सकते हैं। यदि एक प्लेटफॉर्म पर सामान सस्ता दिखता है, लेकिन अंतिम बिल अधिक बनता है, तो ग्राहक दूसरे विकल्प को चुन सकता है। ऐसे में शुल्क की पारदर्शिता ग्राहक का भरोसा बनाए रखने में मदद कर सकती है।
दिवाली की खरीदारी में सामान की उपलब्धता, ऑफर और भरोसेमंद डिलीवरी भी अहम हैं। इसलिए कंपनियों को सिर्फ छूट देने के बजाय यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहक को सही सामान उचित प्राइस पर मिले और ऑर्डर का अनुभव अच्छा रहे।
Blinkit, Amazon Now और Zepto में मुकाबला
सर्वे में रोजमर्रा की खरीदारी के लिए Blinkit सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला प्लेटफॉर्म रहा, जिसे 31% यूजर्स ने चुना। Amazon Now 25% के साथ दूसरे स्थान पर रहा। लेकिन त्योहारों की आखिरी समय वाली खरीदारी में Amazon Now 22% पसंद के साथ आगे था, जबकि Blinkit को 19% और Zepto को 14% यूजर्स ने चुना।
यूजर्स की कुल रेटिंग में Amazon Now और Zepto ने 35 में से 27.5 पॉइंट लेकर संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया। Blinkit को डिलीवरी की रफ्तार के लिए सबसे अच्छी रेटिंग मिली, जबकि BigBasket ने प्रोडक्ट की रेंज और एक्सक्लूसिव प्रोडक्ट्स के मामले में अच्छा प्रदर्शन किया। इससे पता चलता है कि ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग प्लेटफॉर्म चुनते हैं।
कारोबार के स्तर पर भी इस सेक्टर में विस्तार जारी है। जुलाई-सितंबर 2026 में Blinkit की नेट ऑर्डर वैल्यू सालाना आधार पर 79% बढ़कर ₹20,940 करोड़ हो गई। इसी अवधि में Swiggy Instamart की ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू 31% बढ़कर ₹9,230 करोड़ रही। हालांकि, बिक्री बढ़ना अपने आप में मुनाफे की गारंटी नहीं है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
क्विक कॉमर्स कंपनियों के बढ़ते ऑर्डर और कारोबार इस सेक्टर में डिमांड का संकेत देते हैं। लेकिन निवेशकों के लिए केवल बिक्री में वृद्धि देखना पर्याप्त नहीं है। यह समझना भी जरूरी है कि कंपनियां डिलीवरी, स्टोर संचालन और ग्राहकों को आकर्षित करने पर कितना खर्च करती हैं और इस विस्तार से उन्हें कितना फायदा मिलता है।
सर्वे का एक महत्वपूर्ण संकेत यह है कि ग्राहक प्राइस और क्वालिटी को लेकर सजग हैं। अगर कंपनियां ग्राहकों को बनाए रखने के लिए लगातार भारी छूट देती हैं या अतिरिक्त शुल्क से असंतोष पैदा होता है, तो लंबे समय में कारोबार पर दबाव आ सकता है। दूसरी ओर, बेहतर प्रोडक्ट रेंज, पारदर्शी प्राइसें और भरोसेमंद सेवा ग्राहकों को बार-बार खरीदारी के लिए प्रेरित कर सकती हैं।
इसलिए निवेशकों को कंपनियों की बिक्री के साथ उनकी लागत, ग्राहक अनुभव और कारोबार की स्थिरता पर भी ध्यान देना चाहिए। तेजी से बढ़ते ऑर्डर आकर्षक दिख सकते हैं, लेकिन निवेश का फैसला करते समय कंपनी की वित्तीय स्थिति को समझना भी उतना ही जरूरी है।
भविष्य की बातें
भारत में क्विक कॉमर्स की अगली ग्रोथ सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगी। टियर-2 और टियर-3 शहरों में इंटरनेट और डिजिटल पेमेंट की बढ़ती पहुंच इस मार्केट के लिए नए ग्राहक ला सकती है। IBEF की रिपोर्ट में शामिल एक अनुमान के मुताबिक, भारत का क्विक कॉमर्स मार्केट FY25 के करीब ₹65,645.40 करोड़ से बढ़कर 2030 तक लगभग ₹3.1 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।
मौजूदा सर्वे में जहां ग्राहक प्राइस और क्वालिटी को तेज डिलीवरी से ज्यादा अहमियत दे रहे हैं, वहीं कंपनियों को डार्क स्टोर, डिलीवरी और टेक्नोलॉजी की लागत भी नियंत्रित करनी होगी। इसलिए भविष्य में वही प्लेटफॉर्म बेहतर स्थिति में होंगे जो तेज सर्विस के साथ उचित प्राइस और सस्टेनेबल कारोबार का संतुलन बना सकें।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।