भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जून 2026 की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली समिति ने लगातार तीसरी बैठक में नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।
पिछले कुछ महीनों से बढ़ती ग्लोबल अनिश्चितताओं, क्रूड ऑइल की प्राइस में उतार-चढ़ाव और महंगाई को लेकर चिंताओं के बीच लोगों को डर था कि RBI ब्याज दरों में सख्ती कर सकता है। हालांकि केंद्रीय बैंक ने फिलहाल संतुलित रुख अपनाते हुए रेपो रेट को स्थिर रखा है।
आइए समझते है इसका होम लोन बॉरोअर्स के लिए क्या मतलब है।
पिछले साल की दर कटौती ने कितना फायदा पहुंचाया?
RBI ने कुल 125 बेसिस पॉइंट यानी 1.25% की दर कटौती की थी, जिससे रेपो रेट 6.50% से घटकर 5.25% पर आ गया। इस कदम का सीधा फायदा उन लोगों को मिला जिनके लोन फ्लोटिंग ब्याज दरों से जुड़े हुए थे।
उदाहरण के लिए, 50 लाख रुपये के 20 वर्षीय होम लोन पर यदि ब्याज दर 8.50% से घटकर 7.25% हो जाए, तो EMI लगभग 43,391 रुपये से घटकर 39,519 रुपये रह जाती है। यानी हर महीने करीब 3,872 रुपये की बचत होती है। वहीं पूरे लोन कार्यकाल में कुल ब्याज भुगतान लगभग 54.14 लाख रुपये से घटकर 44.85 लाख रुपये रह सकता है। इसका मतलब है कि बॉरोअर करीब 9.29 लाख रुपये तक की बचत कर सकता है।
यही वजह है कि 2025 की दर कटौती को हाल के वर्षों में होम लोन ग्राहकों के लिए सबसे बड़ी राहतों में से एक माना गया। हालांकि दिसंबर 2025 के बाद RBI ने दरों में कटौती का सिलसिला रोक दिया और फरवरी, अप्रैल तथा अब जून 2026 की बैठक में भी रेपो रेट को यथावत रखा है।
जून 2026 के फैसले से EMI पर क्या असर पड़ेगा?
RBI द्वारा रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला होम लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट लोन लेने वालों के लिए राहत भरा माना जा सकता है। इस फैसले से संकेत मिलता है कि फिलहाल RBI के लिए उधारी दरों में तेजी से बढ़ोतरी की संभावना कम है, जिससे मौजूदा EMI में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है।
हालांकि, RBI ने यह भी संकेत दिया है कि ग्लोबल चुनौतियों के कारण महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। पश्चिम एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव, हाई एनर्जी प्राइस और सप्लाई चेन में रुकावटें आने वाले महीनों में महंगाई को बढ़ा सकती हैं। यदि महंगाई RBI के अनुमान से अधिक बढ़ती है, तो भविष्य में ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंक का रुख बदल सकता है।
हाउसिंग मार्केट को कितनी राहत मिलेगी?
ब्याज दरों में स्थिरता का असर केवल मौजूदा लोन ग्राहकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव पूरे रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ता है। जब EMI बढ़ने का डर कम होता है, तो घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों का भरोसा मजबूत होता है।
हाल के महीनों में हाउसिंग लोन ग्रोथ की रफ्तार कुछ धीमी हुई है। हाई फंडिंग लागत और महंगे कर्ज ने खरीदारों और डेवलपर्स दोनों पर दबाव बनाया है। ऐसे माहौल में रेपो रेट को स्थिर रखना मार्केट को कुछ राहत दे सकता है।
हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि केवल स्थिर ब्याज दरें ही आवास डिमांड को पूरी तरह पुनर्जीवित नहीं कर सकतीं। विशेष रूप से किफायती आवास सेगमेंट में डिमांड को मजबूत करने के लिए भविष्य में और नरम ब्याज दरों की आवश्यकता पड़ सकती है।
फिर भी EMI नहीं बढ़ने का संदेश नए खरीदारों के लिए सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि इससे घर खरीदने की कुल लागत में अचानक वृद्धि का जोखिम कम हो जाता है।
भविष्य की बातें
RBI MPC के अनुसार, आने वाले महीनों में महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाना नीति निर्माताओं के लिए बड़ी चुनौती रहेगा। केंद्रीय बैंक ने FY27 के लिए GDP वृद्धि अनुमान को 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है, जबकि महंगाई का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है। विशेष रूप से दूसरी छमाही में महंगाई के 5.9% तक पहुंचने का अनुमान है, जो ब्याज दरों के मोर्चे पर दबाव बनाए रख सकता है।
RBI के अनुसार, कमर्शियल LPG, बेस मेटल्स, प्लास्टिक और रबर जैसी वस्तुओं की बढ़ती कीमतें महंगाई को ऊपर धकेल रही हैं। वहीं, FY27 में लगभग 14 अरब डॉलर के नेट FDI आउटफ्लो भी विदेशी निवेश के मोर्चे पर चिंता बढ़ाते हैं। हालांकि, सर्विस सेक्टर की मजबूती, GST युक्तिकरण का प्रभाव और स्थिर रोजगार स्थितियां शहरी कंजम्पशन को सहारा दे सकती हैं।
आगे चलकर मार्केट की नजर महंगाई के वास्तविक आंकड़ों, विदेशी निवेश फ्लो और RBI के अगले नीतिगत संकेतों पर रहेगी। यदि महंगाई अनुमान से अधिक बढ़ती है, तो होम लोन ब्याज दरों और EMI में राहत की उम्मीदें कुछ समय के लिए टल सकती हैं।
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