सिल्वर ने बनाया नया रिकॉर्ड, क्या तेजी अभी बाकी है?

सिल्वर ने बनाया नया रिकॉर्ड, क्या तेजी अभी बाकी है?
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2025 सिल्वर के लिए ऐतिहासिक साबित हो रहा है। डोमेस्टिक और अंतरराष्ट्रीय मार्केट्स में सिल्वर की प्राइस लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं। जहां गोल्ड पहले से ही मजबूती दिखा रहा था, वहीं सिल्वर ने उससे कहीं ज्यादा तेज रफ्तार पकड़ ली है। एनालिस्ट्स के मुताबिक, मौजूदा तेजी केवल शॉर्ट-टर्म उत्साह का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, जियोपॉलिटिकल तनाव और मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड जैसे ठोस फैक्टर हैं।

आइए, विस्तार से समझते हैं कि आखिर मार्केट में क्या चल रहा है और आने वाले समय के लिए क्या अनुमान लगाए जा रहे हैं।

क्या है मामला?

सिल्वर की कीमतों में जारी रिकॉर्ड तोड़ तेजी थमने का नाम नहीं ले रही है। मजबूत निवेशक डिमांड और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के बीच यह साल की सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली एसेट्स में शामिल हो चुकी है। इंटरनेशनल मार्केट में दिसंबर 19, 2025 (शुक्रवार) को सिल्वर $67 प्रति औंस से ऊपर के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंची, जबकि 2025 में इसकी प्राइस पहले ही दोगुने से ज्यादा बढ़ चुकी हैं।

डोमेस्टिक मार्केट की बात करें तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सिल्वर मार्च फ्यूचर्स 22 दिसंबर 2025 की सुबह करीब 9:15 बजे ₹2,13,412 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहे थे, जबकि इससे पहले सेशन में ₹2,13,844 प्रति किलोग्राम का लाइफटाइम हाई भी देखा गया। वहीं ग्लोबल मार्केट में स्पॉट सिल्वर $69.23 प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गई।

YoY आधार पर देखें तो सिल्वर में अब तक 138% की जबरदस्त तेजी आ चुकी है, जिससे इसने गोल्ड को भी साफ तौर पर पीछे छोड़ दिया है। मौजूदा ट्रेंड यह संकेत देता है कि मजबूत डिमांड के बीच सिल्वर की चमक फिलहाल बरकरार रह सकती है।

सिल्वर की रिकॉर्ड तेजी के पीछे मुख्य ड्राइवर

जियोपॉलिटिकल तनाव और सेफ-हेवन डिमांड: वेनेजुएला पर US ऑयल ब्लॉकेड और मेडिटेरेनियन में रूस से जुड़े ऑयल टैंकर पर यूक्रेन के हमले ने ग्लोबल अनिश्चितता बढ़ाई है। इसका सीधा फायदा सिल्वर जैसे सेफ-हेवन एसेट्स को मिला है।

ETF इनफ्लो और फिजिकल मार्केट टाइटनेस: ब्लूमबर्ग के अनुसार, गोल्ड-बैक्ड ETFs में लगातार पांच सप्ताह से इनफ्लो जारी है। इसी दौरान सिल्वर में मजबूत डिमांड और प्रमुख ट्रेडिंग हब्स में सप्लाई टाइटनेस देखने को मिली है।

रेट कट की उम्मीद और कमजोर US लेबर डेटा: मार्केट 2026 में US फेड की दो रेट कट को प्राइस-इन कर रहे हैं। फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर के संकेत और US बेरोजगारी दर का 4.6% तक बढ़ना सिल्वर के लिए सपोर्टिव फैक्टर बना है।

स्ट्रक्चरल इंडस्ट्रियल डिमांड: सोलर, EVs, AI डेटा सेंटर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स में बढ़ती खपत से सिल्वर की इंडस्ट्रियल डिमांड रिकॉर्ड स्तर पर है। अकेले सोलर सेक्टर का वैश्विक खपत में करीब 15% हिस्सा है।

घटती इन्वेंट्री और सप्लाई की कमी: COMEX स्टॉक्स घटकर करीब 138 मिलियन औंस रह गए हैं। शंघाई इन्वेंट्री दशक के निचले स्तर पर है, जबकि लंदन वॉल्ट होल्डिंग 2022 के बाद से करीब 40% कम हो चुकी है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 130% की भारी बढ़त के बाद क्या अब भी इसमें निवेश की गुंजाइश है? आंकड़ों को देखें तो यह साल उन निवेशकों के लिए बेहतरीन रहा है जिन्होंने समय रहते इसमें पोजीशन बनाई थी। 130% का गेन इक्विटी या अन्य निवेशों की तुलना में कहीं अधिक है।

हालांकि, 66.5 डॉलर प्रति औंस का स्तर और 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के ऊपर का भाव यह दर्शाता है कि मार्केट एक मजबूत मोमेंटम में है। यह तेजी उन निवेशकों के लिए उत्साहजनक है जो लंबी अवधि का नजरिया रखते हैं, लेकिन नए निवेशकों के लिए यह स्तर थोड़ा सतर्क रहने का भी संकेत देता है।

भविष्य की बातें

क्या यह रैली अपने अंतिम चरण में है या अभी और ऊपर जाना बाकी है? एनालिस्ट का मानना है कि सिल्वर की प्राइस में अभी भी महत्वपूर्ण बढ़त बाकी है। ET के अनुसार, एनालिस्ट का मानना है कि Q1 2026 तक सिल्वर की प्राइस में मौजूदा स्तर से 20% की और बढ़त देखने को मिल सकती हैं। इसी वजह से मौजूदा स्तर पर ‘buy on dips’ की रणनीति को ज्यादा बेहतर माना जा रहा है।

आगे की तस्वीर पर नजर डालें तो ज्यादातर एक्सपर्ट्स सिल्वर के आउटलुक को लेकर पॉजिटिव बने हुए हैं। ET के कुछ अनुमानों में यह भी कहा गया है कि अगर US में ब्याज दरों में कटौती होती है और इंडस्ट्रियल डिमांड मजबूत रहती है, तो 2026 के अंत तक सिल्वर $70–75 प्रति औंस के स्तर की ओर बढ़ सकती है।

हालांकि, एनालिस्ट्स ने वोलाटिलिटी को लेकर सावधानी भी बरतने की सलाह दी है। सिल्वर का मार्केट गोल्ड के मुकाबले छोटा है, इसलिए प्राइस में उतार-चढ़ाव ज्यादा तेज होता है। ऐतिहासिक तौर पर देखा जाए तो बड़े मूवमेंट्स के दौरान सिल्वर, गोल्ड की तुलना में करीब दो से ढाई गुना ज्यादा हिलती है। ऐसे में तेज रैली के बाद करेक्शन का जोखिम भी बना रहता है।

*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर

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