भारत के स्मॉलकैप स्टॉक्स इस समय गिरावट के दौर से गुजर रहे है। जहां 2024 में स्मॉलकैप इंडेक्स ने बेहतरीन रिटर्न दिए थे, वहीं 2025 में स्टॉक्स का मिजाज बदल गया है। क्योंकि पिछले 7 वर्षों में देखी गई सबसे बड़ी गिरावट ने मार्केट की दिशा और दशा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहाँ एक तरफ ऐतिहासिक डेटा 2018 जैसी मंदी की ओर इशारा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ एनालिस्ट अगले साल भारी मुनाफे की भविष्यवाणी भी कर रहे हैं। यह विरोधाभास ही वर्तमान स्थिति को इतना जटिल और दिलचस्प बनाता है।
क्या यह गिरावट केवल एक करेक्शन है, या हम एक मंदी की ओर बढ़ रहे हैं? क्या 2026 निवेशकों के लिए एक बुरा सपना साबित होगा या वापसी का साल? आइए इन सवालों के जवाब तलाशते हैं।
क्या है मामला?
भारत का स्मॉलकैप बाजार 2025 में अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है। नवंबर तक के मार्केट डेटा से नुकसान की गहराई साफ दिखाई देती है। लगभग 1,000 लिस्टेड कंपनियाँ अपने ऑल-टाइम हाई से 20% से अधिक गिर चुकी हैं। इससे भी गंभीर बात यह है कि 440 स्टॉक्स 50% से ज्यादा टूट चुके हैं, और कई शेयर्स ने तो 90% तक का नुकसान दर्ज किया है।
लेकिन अगर हम थोड़ा पीछे जाकर देखें, तो तस्वीर और साफ होती है। यह गिरावट पिछले 7 वर्षों में स्मॉलकैप्स के लिए सबसे खराब दौर का प्रतिनिधित्व करती है। मार्केट के जानकारों के लिए यह स्थिति 2018 की याद दिलाती है, जब स्मॉलकैप्स ने एक लंबी और दर्दनाक मंदी देखी थी। 2024 में शानदार तेजी के बाद, 2025 का अंत निवेशकों के लिए एक रियलिटी चेक बनकर आया है।
अर्निंग्स-वैल्यूएशन मिसमैच
इस क्रैश की सबसे बड़ी वजह सेंटीमेंट नहीं, बल्कि फंडामेंटल्स हैं। मार्केट का सबसे कड़वा सच यह है कि शेयर की प्राइस जिस रॉकेट की रफ्तार से ऊपर गईं, कंपनियों की अर्निंग्स उस रफ्तार से नहीं बढ़ी। इसे एनालिस्ट अर्निंग्स-वैल्यूएशन मिसमैच कहते हैं।
निफ्टी 50 ऑल टाइम हाई के पास होने के बावजूद निफ्टी 500 के 73% स्टॉक्स अब भी अपने रिकॉर्ड हाई से 10% से अधिक नीचे है। स्मॉलकैप सेगमेंट में स्थिति और अधिक खराब है। इस साल की शुरुआत में बियर मार्केट की पुष्टि के बाद से यह निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स संभल ही नहीं पाया है। यह अपने 2024 के रिकॉर्ड हाई से लगभग 13% नीचे है, और इससे भी गंभीर बात यह है कि इंडेक्स की लगभग आधी कंपनियां आज भी अपने ऑल-टाइम हाई से 50% से अधिक नीचे ट्रेड कर रही हैं। यह केवल गिरावट नहीं है, यह मार्केट का खुद को रीसेट करने का तरीका है।
स्मॉलकैप्स में हाई वैल्यूएशंस से दूर होती रिकवरी
रॉयटर्स के मुताबिक, मार्केट में व्यापक रिकवरी अभी दूर है क्योंकि वैल्यूएशंस अब भी हाई स्तर पर टिके हुए हैं। जहाँ निफ्टी 50 अपने लगभग 10-वर्षीय औसत P/E पर ट्रेड कर रहा है, वहीं मिडकैप्स का 12-महीने फॉरवर्ड P/E 29.2x और स्मॉलकैप्स का 25.1x है-जो उनके लॉन्ग-टर्म औसत 23.1x और 16.7x से काफी अधिक है।

इसके साथ ही, मौजूदा कमजोरी का सबसे बड़ा बोझ रिटेल निवेशकों पर पड़ा है, जो NSE कैश मार्केट गतिविधि का 35% हिस्सा संभालते हैं और NSE-लिस्टेड कंपनियों में 8.6% हिस्सेदारी रखते हैं। उनका बड़ा एक्सपोज़र स्मॉल और मिडकैप्स में होने के कारण उतार-चढ़ाव और कम लिक्विडिटी ने उनके जोखिम को और बढ़ा दिया है।
कोटक महिंद्रा AMC के CIO हर्ष उपाध्याय के अनुसार, या तो वैल्यूएशंस में और गिरावट आएगी, जिससे स्मॉलकैप्स की परेशानी बढ़ेगी, या फिर दूसरी छमाही में अर्निंग्स इतनी तेज़ रिकवर होंगी कि मिड और लार्जकैप्स को पीछे छोड़ देंगी।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
निवेशकों के लिए संकेत साफ हैं स्मॉलकैप्स में रिस्क अब पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। रिटेल निवेशक बड़े पैमाने पर स्मॉलकैप शेयर बेच रहे हैं, जिससे यह सेगमेंट 2026 में और नुकसान की चपेट में आ सकता है। केवल इस तिमाही में ही ₹30,000 करोड़ से अधिक की नेट सेलिंग हुई है, जो दो वर्षों में सबसे बड़ा तिमाही सेलऑफ बन सकता है। इसका असर इंडेक्स पर साफ दिखता है। BSE स्मॉलकैप इंडेक्स जिसने 2023 में 47.5% और 2024 में 29.3% रिटर्न दिए थे, अब 2025 में 9.45% नीचे है जो 2018 के बाद सबसे खराब साल रहा है। यह गिरावट बताती है कि दो साल में लगभग 93% की रैली के बाद मार्केट अब तेजी से अपने आप को रीसेट कर रहा है।
निवेशकों के लिए सबसे चिंताजनक हिस्सा यह है कि गिरावट बेहद व्यापक है क्योंकि यह गिरावट किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं हैं इसमें टेलीकॉम, इंफ्रा, रियल एस्टेट, इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, फाइनेंशियल्स, मीडिया, IT, फार्मा, डिफेंस, रिन्यूएबल्स सेक्टर्स शामिल है।
भविष्य की बातें
भविष्य की दिशा मिश्रित दिखती है एक तरफ अर्निंग्स का दबाव है, तो दूसरी तरफ रिकवरी की संभावनाएं भी साफ नज़र आती हैं। मोतीलाल ओसवाल के अनुसार, Q2 में स्मॉलकैप अर्निंग्स 5% YoY गिरीं, जबकि 3% ग्रोथ की उम्मीद थी, और 40% कंपनियां गाइडेंस से चूक गईं। इसके मुकाबले बड़े और मिडकैप सेगमेंट में यह आंकड़ा क्रमशः 19% और 22% था। यह दर्शाता है कि स्मॉलकैप्स में दबाव अधिक गहरा है, लेकिन इसके बावजूद तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है।
आगे देखते हुए, टेक्निकल और फंडामेंटल दोनों संकेत बताते हैं कि स्मॉलकैप इंडेक्स में बाउंस की संभावना मौजूद है। भारत की मजबूत आर्थिक गति, संभावित RBI की नरमी, स्थिर होती डिमांड और घटते इनपुट कॉस्ट H2 FY26 में अर्निंग्स रिकवरी का आधार बन सकते हैं। मिंट के अनुसार, एनालिस्ट का मानना है कि जैसे-जैसे वैल्यूएशन और अर्निंग्स का गैप कम होगा, एक संतुलित और सस्टेनेबल रिकवरी संभव हो सकती है और टेक्निकल दृष्टि से, 2026 के अंत तक निफ्टी स्मॉलकैप 100 में लगभग 25% संभावित उछाल की उम्मीद है।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर