भारतीय शेयर मार्केट में स्टार्टअप्स के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) की धूम मची हुई है, जिसने निवेशकों और अर्थव्यवस्था दोनों का ध्यान खींचा है। यह बूम न केवल संस्थापकों और शुरुआती निवेशकों के लिए शानदार एग्जिट के अवसर प्रदान कर रहा है, बल्कि भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए भी एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर है। पिछले कुछ वर्षों में, कई भारतीय स्टार्टअप्स ने स्टॉक मार्केट में प्रवेश किया है, जिससे न केवल कंपनियों को पूंजी जुटाने में मदद मिली है बल्कि निवेशकों को न्यू ऐज कंपनियों में निवेश का अवसर भी मिला है।
लेकिन यह पूरी कहानी नहीं है क्योंकि कई स्टार्टअप IPO ने निवेशकों को भारी नुकसान भी कराया है तो आइए समझते है भारत में स्टार्टअप IPO का बूम कैसे आगे बढ़ रहा है और यह निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है।
क्या है मामला?
भारत में स्टार्टअप IPO की लहर थमने का नाम नहीं ले रही। टेक यूनिकॉर्न से लेकर डिजिटल-फर्स्ट कंज़्यूमर कंपनियों तक, बड़ी संख्या में स्टार्टअप पब्लिक मार्केट्स का रुख कर रहे हैं और निवेशक उन्हें उत्साह से अपना रहे हैं। Tracxn के अनुसार, 2025 के पहले 10 महीनों में ही 43 स्टार्टअप्स IPO ला चुके हैं, जो 2023 की तुलना में दोगुने और 2020 की तुलना में पांच गुना अधिक हैं।
हाल ही में फिजिक्सवाला, ग्रो और पाइनलैब्स ने स्टॉक मार्केट में दस्तक दिया है जिन्होंने पॉजिटिव लिस्टिंग के साथ शुरुआत की, हालांकि ग्रो और पाइनलैब्स की तुलना में लेंसकार्ट की लिस्टिंग थोड़ी कमजोर रही। सिर्फ इतना ही नहीं, ग्रो जो कि स्टॉक मार्केट में अभी लिस्ट हुई है उसकी मार्केट कैप वर्षो से लिस्टेड BSE की मार्केट कैप को भी पार कर गयी है।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह IPO बूम भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के नए दौर का संकेत है जहाँ संस्थापक अब सस्टेनेबल ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी पर ध्यान दे रहे हैं, और शुरुआती निवेशकों के पास अपने निवेश से बाहर निकलने का आसान रास्ता मिल रहा है।
IPO बूम का आर्थिक प्रभाव
भारत में IPO की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। Dealogic, जो कि एक डेटा प्रोवाइडर है के मुताबिक, इस साल अब तक 298 कंपनियाँ लिस्ट हो चुकी हैं जो 2023 के पूरे आंकड़े से भी ज्यादा है। बेहतर वैल्यूएशन, आसान डिजिटल निवेश और डोमेस्टिक बचत का इक्विटी मार्केट में बढ़ता फ्लो इस उछाल को मजबूती दे रहा है। निफ्टी 50 अभी 24 के P/E पर ट्रेड हो रहा है, जो उसके लॉन्गटर्म के औसत से ऊपर है। रिटेल निवेशक भी पहले से अधिक सक्रिय हैं, क्योंकि IPO में आवेदन अब केवल तीन क्लिक में पूरा हो जाता है।
हालाँकि इस साल 63% IPO ‘ऑफ़र फॉर सेल’ रहे है जहाँ प्रोमोटर हिस्सेदारी बेचते हैं फिर भी ये लिस्टिंग्स वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी को एग्ज़िट देकर नए स्टार्टअप्स में पूँजी लगाने का मार्ग खोलती हैं। तेज़ी से बढ़ती कंपनियाँ भी इस लहर का हिस्सा हैं। स्विगी और एथर एनर्जी जैसी कंपनियां अभी प्रॉफिट में नहीं हैं, लेकिन IPO से जुटाई गई पूँजी से वे विस्तार और क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही हैं।
स्टार्टअप IPO का नया दौर
दो साल की फंडिंग विंटर के बाद पब्लिक मार्केट स्टार्टअप्स के लिए पूँजी और विश्वसनीयता का नया रास्ता खोल रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह लहर 2021 की तुलना में कहीं अधिक व्यापक है। तब ज़ोमैटो और पेटीएम जैसी कंपनियाँ हाई वैल्यूएशन और कमज़ोर प्रॉफिटेबिलिटी के बावजूद लिस्ट हुई थीं, जबकि आज की लिस्टिंग्स मजबूत गवर्नेंस और स्पष्ट फंडामेंटल्स पर आधारित हैं।
टाइम्स नाउ न्यूज़ के अनुसार, Tracxn की नेहा सिंह का कहना है कि स्टार्टअप्स अब स्थिरता, प्रोफिटेबिलिटी और अनुशासित पूँजी उपयोग पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। इसका असर यह है कि 2024 के 3,900 बंद हुए स्टार्टअप्स के मुकाबले 2025 में अब तक केवल 724 स्टार्टअप्स बंद हुए जो 81% की गिरावट है, जिससे पता चलता है कि कंपनियाँ पैसे का उपयोग अधिक सावधानी से कर रही हैं।
फिर भी चिंताएँ बनी हुई हैं। भारत में वैल्यूएशन स्ट्रक्चरली हाई हैं, और डर है कि तेज़ी से हो रही लिस्टिंग्स और हाइप की वजह से प्राइस कहीं जरूरत से ज्यादा न बढ़ जाएं। जिससे बाद में प्राइस करेक्शन के दौरान निवेशकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़े।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
लेंसकार्ट जैसे हालिया स्टार्टअप IPO यह याद दिलाते हैं कि सिर्फ चर्चा और उत्साह पर दांव लगाना हमेशा काम नहीं आता। भारी डिमांड के बावजूद कंपनी की लिस्टिंग डिस्काउंट पर हुई। पिछले कुछ वर्षों में कई हाईप्ड कंपनियाँ लिस्टिंग और बाद के प्रदर्शन दोनों ही स्तर पर उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी हैं हालांकि कुछ लिस्टिंग्स ने अच्छे रिटर्न भी दिए हैं।
इसलिए, रिटेल निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे मार्केट के शोर से हटकर कंपनी के वास्तविक फंडामेंटल और लॉन्गटर्म क्षमता पर ध्यान दें। Tradejini के COO तृवेश ने इंडिया टूडे को बताया कि अधिकांश रिटेल निवेशक ब्रांड और चर्चा पर भरोसा करते हैं, लेकिन कंपनी के नंबर्स को गहराई से नहीं देखते। उनके अनुसार, यह देखना जरूरी है कि बिज़नेस लगातार बढ़ रहा है या सिर्फ IPO से पहले का शॉर्ट-टर्म मोमेंटम दिखा रहा है। सरल शब्दों में IPO में निवेश समझदारी तब है जब आप उत्साह नहीं, बल्कि असली फंडामेंटल्स के आधार पर निर्णय लें।
भविष्य की बातें
भारत में स्टार्टअप फंडिंग भले ही महामारी के दौर जैसे हाई पर नहीं पहुँची है, लेकिन मार्केट पहले से ज्यादा स्थिर और स्वस्थ दिख रहा है। 2025 में स्टार्टअप्स ने $9.8 बिलियन जुटाए, जो 2021 के रिकॉर्ड $40 बिलियन से अभी काफी दूर है। यह बदलाव बताता है कि फंडिंग अब वॉल्यूम से ज़्यादा गुणवत्ता पर केंद्रित हो रही है।

2026 में यह गति जारी रहेगी या नहीं, यह कहना अभी मुश्किल है, क्योंकि कैपिटल मार्केट स्वभाव से साइक्लिक होते हैं, और अनुमान पर चलना जोखिम भरा साबित हो सकता है। इसके साथ ही, 2025 में कई हाई-प्रोफाइल स्टार्टअप्स के मार्केट में आने की उम्मीद माहौल को और गतिशील बना रही है। ज़ेप्टो, कारदेखो, ईकॉम एक्सप्रेस, बोट, और अवांसे फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे नाम अपनी लिस्टिंग की तैयारी में है।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर