भारत जब 78वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, तब देश दृढ़ता, परिवर्तन और अतुलनीय विकास का प्रतीक बना हुआ है। एक नए स्वतंत्र राष्ट्र से जो कि डीकॉलोनाइजेशन की चुनौतियों से जूझ रहा था, एक ग्लोबल शक्ति बनने तक, भारत की यात्रा असाधारण प्रगति की कहानी है।
यह आर्टिकल सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य इंडीकेटर्स में भारत द्वारा किए गए उल्लेखनीय प्रयासों को बताता है, जो 1947 में अपने विनम्र प्रारंभ से लेकर 2024 में अपनी वर्तमान स्थिति तक के राष्ट्र के विकास को प्रदर्शित करता है।
सामाजिक इंडिकेटर
जनसंख्या: स्वतंत्रता के समय, भारत की जनसंख्या 34 करोड़ थी और 2024 में भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन गया है। 2024 में भारत की अनुमानित जनसंख्या 144 करोड़ है।

साक्षरता: 1951 में भारत की कुल साक्षरता दर सिर्फ 18.3% थी, जिसमें महिला साक्षरता बहुत ही कम 8.86% थी। 2018 तक, स्थिति में सुधार हुआ और कुल साक्षरता दर बढ़कर 74.4% हो गई। वर्तमान में महिला साक्षरता दर 77% और पुरुष साक्षरता दर 84.7% है। नेशनल सैंपल सर्वे द्वारा 2023 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, केरल देश का सबसे साक्षर राज्य है, जिसकी कुल साक्षरता 92.2% है, और बिहार की साक्षरता सबसे कम 61.8% है।
स्वच्छता: भारत ने 2019 तक 100% स्वच्छता कवरेज का लक्ष्य हासिल कर लिया, जो सरकार के प्रमुख प्रोग्राम स्वच्छ भारत मिशन की वजह से संभव हुआ। 1981 (उससे पहले के डेटा उपलब्ध नहीं हैं) में, केवल 1% ग्रामीण घरों में स्वच्छता कवरेज थी।
शिक्षा: 1950 में भारत की शिक्षा की स्थिति दयनीय थी, उस समय केवल 27 विश्वविद्यालय और 578 कॉलेज थे। 2021-22 के नवीनतम AISHE सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में 1,168 विश्वविद्यालय, 45,473 कॉलेज और 12,002 स्टैंडअलोन संस्थान हैं। 2021-22 में ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो 28.4 हो गया है।

आर्थिक इंडिकेटर
GDP: 1947 में भारत की GDP मात्र ₹2.7 लाख करोड़ थी और 2023-24 के अंत में भारत की GDP ₹173.82 लाख करोड़ पर पहुंच गयी है। वर्तमान में, भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही जर्मनी और जापान को पीछे छोड़ते हुए 3वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
प्रति व्यक्ति आय: स्वतंत्रता के बाद से भारत ने अपनी प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। 1947 में यह ₹265 थी जो 2023-24 में बढ़कर 2.12 लाख हो गई। DD न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हालाँकि भारत की प्रति व्यक्ति आय विकसित देशों की तुलना में कम है, लेकिन अर्थव्यवस्था के बढ़ने के साथ-साथ इसके उच्च आय की स्थिति तक पहुंचने का अनुमान है।

विदेशी मुद्रा भंडार: ये अर्थव्यवस्था की स्थिति का एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर है। 1951-52 में भारत के पास मात्र $1.82 बिलियन का विदेशी मुद्रा भंडार था और जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था बढ़ी, विदेशी मुद्रा भंडार अगस्त 2024 में $675 बिलियन के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया।
निर्यात: 1950-51 में भारत के गुड्स और सर्विसेस का निर्यात $1.27 बिलियन था। अगले कुछ दशकों में निर्यात क्षेत्र के लिए सख्त निर्यात और आयात नियंत्रण नीति के कारण यह बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सका। हालांकि, 1991 में उदारीकरण सुधारों के साथ चीजें बदलने लगीं और तब से निर्यात में तेजी आई है।

स्वास्थ्य इंडिकेटर
लाइफ एक्सपेक्टेंसी: भारत ने स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्टर में सुधार और अपने नागरिकों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रगति की है। 1950-51 में पुरुषों की औसत लाइफ एक्सपेक्टेंसी 37.2 वर्ष और महिलाओं की 36.2 वर्ष थी। हालांकि, 2016-20 के बीच NSSO द्वारा एकत्र किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं की लाइफ एक्सपेक्टेंसी बढ़कर 71.4 वर्ष और पुरुषों की 68.6 वर्ष हो गई है।
शिशु मृत्यु दर: यह एक वर्ष से कम आयु के प्रति 1,000 जीवित जन्मों में शिशुओं की मृत्यु की संख्या को संदर्भित करता है। यह बच्चों की स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की दक्षता का एक मजबूत माप है। 1947 में, शिशु मृत्यु दर 175/1,000 जीवित जन्म थी और यह बड़े पैमाने पर गिरकर 28/1,000 जीवित जन्म हो गई है।
भविष्य की बातें
जब हम 1947 से 2024 तक भारत की अविश्वसनीय यात्रा पर नजर डालते हैं, तो यह स्पष्ट है कि राष्ट्र की प्रगति असाधारण से कम नहीं रही है। सीमित संसाधनों और अनगिनत चुनौतियों के दिनों से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में एक ग्लोबल लीडर बनने तक, भारत की कहानी दृढ़ता, महत्वाकांक्षा और निरंतर विकास की प्रेरणा की कहानी है।
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*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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