भारत का प्राइमरी मार्केट हाल के वर्षों से निवेशकों के लिए उत्साह का केंद्र बना हुआ है, लेकिन 2024 और 2025 में IPOs ने अपनी लिस्टिंग प्राइस से नीचे ट्रेड करके निवेशकों को निराश किया है, सिर्फ इतना ही नहीं, एक्सचेंज डेटा के अनुसार, साल 2025 में लिस्ट हुए 11 IPO में से 6 अपने इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड कर रहे हैं, जबकि इन सभी को पब्लिक ऑफर के दौरान अच्छी सब्सक्रिप्शन रिस्पॉन्स मिला था।
आइए इस आर्टिकल में समझें कि अधिकतम IPO अपने लिस्टिंग प्राइस से नीचे क्यों ट्रेड कर रहे है और 2025 में IPO की धीमी गति निवेशकों के लिए क्या मायने रखती है।
क्या है मामला?
पिछले तीन महीनों की सुस्ती के बाद, शेयर बाजार में मौजूदा रिकवरी रैली के बीच कंपनियां धीरे-धीरे IPO ला रही हैं। रिटेल निवेशकों में IPO की लोकप्रियता को देखते हुए, पिछले एक साल में लिस्टेड कंपनियों के स्टॉक प्रदर्शन की जांच करना महत्वपूर्ण है। ETIG के अनुसार, जनवरी 2024 से 101 मेनबोर्ड कंपनियों ने IPO के माध्यम से धन जुटाया, लेकिन इनमें से अधिकांश कंपनियां अपनी लिस्टिंग प्राइस से ऊपर प्रदर्शन नहीं कर पाईं है, यानि हर तीन में से दो कंपनियां वर्तमान में अपनी लिस्टिंग प्राइस से नीचे ट्रेड कर रही हैं।

हालांकि लिस्टिंग लाभ अक्सर रिटेल निवेशकों को आकर्षित करते हैं, विश्लेषण दिखाता है कि केवल 16% कंपनियों ने 50% या अधिक लिस्टिंग लाभ कमाया, जबकि सिर्फ 9% ने 75% या अधिक रिटर्न दिया। इसके अलावा, 17 कंपनियों ने 10% तक लाभ कमाया, जबकि 20 कंपनियां कोई रिटर्न नहीं दे पाईं। यह निवेशकों के लिए सतर्कता का संदेश है, कि बिना कंपनी को परखे IPO में निवेश नुकसान का कारण बन सकता है।
भारतीय IPO मार्केट में कमजोरी
2024 में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा IPO मार्केट बनने के बाद, भारत का प्राइमरी मार्केट अब एक कंसोलिडेशन के दौर से गुजर रहा है। ग्लोबल आर्थिक चिंताएं, निवेशकों की जोखिम लेने की बदलती प्रवृत्ति और जिओपॉलिटिकल अनिश्चितताओं ने कंपनियों को अपनी लिस्टिंग समय-सारिणी पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है। कंपनियां अब अधिक सोच-समझकर पब्लिक मार्केट में प्रवेश कर रही हैं।
PRIME डेटाबेस के अनुसार, मेनबोर्ड IPOs की संख्या FY25 की दूसरी तिमाही में 26 और तीसरी तिमाही में 29 से घटकर चौथी तिमाही में 9 हो गई। इस साल अब तक IPO गतिविधि में 58% की कमी आई है, और सभी लिस्टिंग प्लेटफॉर्म्स पर कुल फंड कलेक्शन में 18% की गिरावट दर्ज की गई है।
IPO के खराब प्रदर्शन की वजह क्या है?
ओवरवैल्यूएशन: कई IPOs की प्राइस बहुत अधिक निर्धारित की गयी, जिससे निवेशकों के लिए आकर्षक रिटर्न की गुंजाइश कम हो गयी। कंपनियां और बैंकर अधिकतम लाभ के लिए ऊंची प्राइस तय करते हैं।
सेकेंडरी मार्केट की कमजोरी: सितम्बर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच भारतीय स्टॉक मार्केट में लगातार गिरावट देखने को मिली है जिसने IPOs के प्रदर्शन को प्रभावित किया है।
ग्लोबल और डोमेस्टिक आर्थिक अनिश्चितताएं: ग्लोबल आर्थिक चिंताएं, जिओपॉलिटिकल तनाव, और ट्रेड वॉर ने वोलैटिलिटी को बढ़ाया, जिसके कारण IPO लॉन्च में कमी आई और मौजूदा IPOs का प्रदर्शन प्रभावित हुआ।
कमजोर लिस्टिंग लाभ: केवल 16% IPOs ने 50% या अधिक लिस्टिंग लाभ दिया, और 20 कंपनियों ने कोई रिटर्न नहीं दिया, जिसने निवेशकों का भरोसा कम किया।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
फॉर्च्यून इंडिया के अनुसार, मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि IPO मार्केट में चल रही सुस्ती जल्द ही खत्म होगी, क्योंकि सेकेंडरी मार्केट ने भारत-पाक तनाव, ट्रंप के टैरिफ विवाद और ग्लोबल आर्थिक विकास की चिंताओं जैसी कई चुनौतियों के बावजूद शानदार रिकवरी दिखाई है।
डोमेस्टिक इंडेक्स BSE सेंसेक्स और NSE निफ्टी हाल के निचले स्तर से 10% से अधिक बढ़े हैं। इस उछाल का कारण उदार मॉनेटरी पॉलिसी, मजबूत आर्थिक आधार और सहायक मार्केट स्थिति हैं।
भविष्य की बातें
2025 की शुरुआत में सुस्ती के बाद, प्राइमरी मार्केट में फिर से चहल-पहल लौट रही है। इस महीने छह मेनबोर्ड कंपनियां अपने IPO लॉन्च करने जा रही हैं। NDTV प्रॉफ़िट के अनुसार, इन्वेस्टमेंट बैंकर के सूत्रों से पता चला है कि, ये कंपनियां मिलकर 11,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाएंगी। 2025 में अब तक केवल 10 कंपनियों ने IPO लॉन्च किए, जो इक्विटी मार्केट में अस्थिरता के कारण है, जिसमें FIIs की बिकवाली और जिओपॉलिटिकल तनाव शामिल हैं। यह कमी 2024 के शानदार प्रदर्शन के बाद आई, जब 91 IPOs ने 1.6 लाख करोड़ रुपये जुटाए। उस समय रिटेल निवेशकों की मजबूत भागीदारी, स्थिर डोमेस्टिक अर्थव्यवस्था और प्राइवेट कैपेक्स में वृद्धि ने मार्केट को गति दी थी।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर