भारत की डिजिटल पेमेंट्स यात्रा अब एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच रही है। पिछले दस वर्षों में देश ने दुनिया के सबसे बड़े रियल टाइम पेमेंट्स नेटवर्क में से एक तैयार किया है। इसमें स्मार्टफोन का बढ़ता इस्तेमाल, QR कोड आधारित मर्चेंट एक्सेप्टेंस और पर्सन-टू-पर्सन ट्रांसफर्स शामिल हैं।
अब तक UPI पर पेमेंट्स का मॉडल फ्री रहा है। लेकिन बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट और फ्रॉड प्रिवेंशन की जरूरतों के बीच एक नया प्राइसिंग फ्रेमवर्क पेश किया गया है। इसमें कुछ UPI ट्रांजैक्शंस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू होगा।
आइए UPI पर नए MDR चार्ज को विस्तारपूर्वक समझें और जानें इसका असर क्या होगा।
क्या है मामला?
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने 15 सितंबर 2026 को जारी सर्कुलर में कहा कि 2,000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट्स पर मर्चेंट्स को 0.4% MDR देना होगा। यह चार्ज बैंक्स और पेमेंट प्रोसेसर्स को जाएगा और यह नया स्ट्रक्चर 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।
हालांकि, पर्सन-टू-पर्सन यानी P2P ट्रांजैक्शंस पर कोई चार्ज नहीं लगेगा, चाहे ट्रांजैक्शन की वैल्यू कितनी भी हो। P2P ट्रांजैक्शंस कुल UPI ट्रांजैक्शंस के वॉल्यूम का 37% और वैल्यू का 70% हिस्सा हैं।
चार्ज केवल पर्सन-टू-मर्चेंट यानी P2M ट्रांजैक्शंस पर लगेगा, जिनकी वैल्यू 2,000 रुपये से अधिक है। 2,000 रुपये तक के सभी P2M ट्रांजैक्शंस, चाहे UPI के जरिए हों या RuPay डेबिट कार्ड से, पूरी तरह फ्री रहेंगे। ऑटो-डेबिट्स और UPI मैंडेट्स पर भी कोई चार्ज नहीं लगेगा।
किन ट्रांजैक्शंस पर कितना चार्ज लगेगा?
नए फ्रेमवर्क में अलग-अलग ट्रांजैक्शंस के लिए अलग MDR तय किया गया है।
पहला, 2,000 रुपये से अधिक के P2M ट्रांजैक्शंस पर 0.4% का स्टैंडर्ड MDR लगेगा। 75,000 रुपये और उससे अधिक के ट्रांजैक्शंस के लिए यह चार्ज प्रति ट्रांजैक्शन 300 रुपये पर कैप्ड रहेगा।
दूसरा, रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और एग्रीकल्चर इनपुट्स जैसे जरूरी सेक्टर्स के लिए फ्लैट MDR रखा गया है। 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शंस पर 5 रुपये का फ्लैट MDR लगेगा। इसमें यूटिलिटी पेमेंट्स, फ्यूल परचेज, इंश्योरेंस प्रीमियम, रेल टिकट्स और कई गवर्नमेंट सर्विसेज भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य जरूरी पब्लिक सर्विसेज और थिन-मार्जिन इंडस्ट्रीज में कॉस्ट को स्थिर रखना है।
तीसरा स्लैब कैपिटल मार्केट के लिए है। म्यूचुअल फंड्स, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर्स और डीलर्स की ओर होने वाले पेमेंट्स पर 0.02% MDR लगेगा, जो 300 रुपये पर कैप्ड रहेगा।
छोटे मर्चेंट्स को पूरी छूट दी गई है। P2PM कैटेगरी में आने वाले मर्चेंट्स, जो UPI QR कोड के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक रिसीव करते हैं, उन्हें किसी भी UPI ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं देना होगा। इसमें वेजिटेबल वेंडर्स, टी शॉप्स और किराना स्टोर्स जैसे मर्चेंट्स शामिल हैं।
MDR से किसे मिलेगा फायदा?
फाइनेंस मिनिस्ट्री के अनुसार, बैंक मर्चेंट्स पर MDR का खर्च ग्राहकों पर पास ऑन नहीं कर सकेंगे। साथ ही, UPI ऐप प्रोवाइडर्स को प्लेटफॉर्म फीस या हिडन चार्ज लगाने की अनुमति नहीं होगी। MDR कोई टैक्स नहीं है और इसे सरकार या NPCI कलेक्ट नहीं करेगा, बल्कि यह पेमेंट इकोसिस्टम के अलग-अलग पार्टनर्स के बीच बांटा जाएगा।
0.4% MDR में 0.28% इंटरचेंज फीस शामिल होगी, जबकि बाकी हिस्सा पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और ऐप प्रोवाइडर्स के बीच बांटा जाएगा। सरकार के अनुसार, UPI के ऑपरेशंस, सर्वर बैंडविड्थ और फ्रॉड प्रिवेंशन के लिए लगातार निवेश की जरूरत है।
इसके बावजूद, 0.4% का MDR क्रेडिट कार्ड के 1.5%-2.5% और डेबिट कार्ड के 0.9% तक MDR की तुलना में कम है। सरकार के डेटा के अनुसार, केवल 4% मर्चेंट ट्रांजैक्शंस MDR से प्रभावित होंगे, जबकि ₹2,000 से कम के 95% से अधिक मर्चेंट ट्रांजैक्शंस पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
निवेशकों के लिए नया MDR फ्रेमवर्क UPI इकोसिस्टम को देखने का एक नया नजरिया देता है। अब तक UPI का मॉडल सब्सिडी पर आधारित था। नए MDR से पेमेंट बैंक्स, एक्वायरिंग बैंक्स और थर्ड-पार्टी ऐप प्रोवाइडर्स के लिए रेवेन्यू स्ट्रीम बनेगी।
सरकार ने कुल MDR कलेक्शंस का 5% एक डेडिकेटेड फंड के लिए रखने की भी घोषणा की है। इसका इस्तेमाल छोटे मर्चेंट्स के बीच UPI के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा।
यह पहल UPI एक्सेप्टेंस को बढ़ाने और छोटे बिजनेसेज को डिजिटल पेमेंट्स इकोसिस्टम में जोड़ने पर भी फोकस करती है। पेमेंट गेटवे, PSP सर्विसेज और मर्चेंट एक्वायरिंग से जुड़ी कंपनियों के लिए 0.4% MDR एक नई रेवेन्यू स्ट्रीम बन सकता है। वहीं 2,000 रुपये की थ्रेशोल्ड और छोटे P2PM मर्चेंट्स के लिए 1 लाख रुपये की मासिक लिमिट के कारण बड़ी संख्या में पेमेंट्स अभी भी MDR से बाहर रहेंगे।
भविष्य की बातें
फाइनेंस मिनिस्ट्री के अनुसार नया MDR फ्रेमवर्क UPI को सेल्फ-सस्टेनेबल बनाने, रूरल और सेमी-अर्बन क्षेत्र में विस्तार के लिए इंसेंटिव देने और कॉम्पिटिटिवनेस बनाए रखने में मदद करेगा। बैंक्स के लिए कैश हैंडलिंग की भी लागत होती है और कई बैंक डिपॉजिट फीस चार्ज करते हैं। ऐसे में 0.4% का डिजिटल एक्सेप्टेंस मॉडल मर्चेंट्स के लिए भी कॉस्ट एफिशिएंट रह सकता है।
15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला नया मॉडल यह तय करेगा कि भारत का डिजिटल पेमेंट्स इकोसिस्टम सब्सिडी आधारित व्यवस्था से रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल की ओर कैसे बढ़ता है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।