US फेड ने बढ़ाई दरें, क्या RBI भी बढ़ाएगा रेपो रेट?

US फेड ने बढ़ाई दरें, क्या RBI भी बढ़ाएगा रेपो रेट?
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अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद अब भारत में भी रिजर्व बैंक के अगले कदम पर नजर है। US फेडरल रिजर्व ने 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। दूसरी ओर, भारत में अगस्त की CPI महंगाई बढ़कर 4.82% हो गई है और क्रूड ऑइल की प्राइस करीब $100 प्रति बैरल तक पहुंच गई है। ऐसे में महंगाई, रुपये की स्थिति और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन RBI के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।

आइए समझते हैं कि US फेड के फैसले के बाद RBI के सामने क्या स्थिति है और संभावित रेपो रेट बढ़ोतरी का होम लोन और FD पर क्या असर हो सकता है।

अमेरिका की दर बढ़ोतरी का भारत पर क्या असर?

US फेडरल रिजर्व की FOMC ने ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। इसके बाद फेडरल फंड्स रेट 3.75%-4% की सीमा में पहुंच गया है। FOMC के सभी 12 सदस्यों ने इस फैसले का समर्थन किया। फेडरल रिजर्व ने महंगाई को अभी भी हाई बताया और 2% के महंगाई लक्ष्य की ओर वापसी पर जोर दिया। इसके अनुमानों में 2026 के अंत से पहले एक और 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का संकेत दिया गया है।

अमेरिका में हाई ब्याज दरें ग्लोबल पूंजी के प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं। निवेशकों का पैसा US एसेट्स की ओर जाने पर इमर्जिंग मार्केट्स से पूंजी निकासी और स्थानीय करेंसी पर दबाव बढ़ सकता है। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि RBI को महंगाई के साथ रुपये और विदेशी पूंजी प्रवाह पर भी नजर रखनी होगी।

बढ़ती महंगाई ने RBI की चुनौती बढ़ाई

भारत में अगस्त की CPI महंगाई जुलाई के 4.45% से बढ़कर 4.82% हो गई। यह लगातार तीसरा महीना था जब महंगाई RBI के 4% लक्ष्य से ऊपर रही। RBI का महंगाई लक्ष्य 4% है और इसकी स्वीकार्य सीमा 2%-6% है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, कुछ अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि सितंबर में CPI महंगाई 5.7% तक पहुंच सकती है।

RBI ने जुलाई-सितंबर के लिए औसत CPI महंगाई 4.7%, अक्टूबर-दिसंबर के लिए 5.9%, जनवरी-मार्च 2027 के लिए 5.5% और अप्रैल-जून 2027 के लिए 5.3% रहने का अनुमान लगाया है। यानी आने वाली तिमाहियों में भी महंगाई 4% के लक्ष्य से ऊपर रह सकती है।

इसके साथ ही, क्रूड ऑइल की प्राइसों का करीब $100 प्रति बैरल तक पहुंचना भी चिंता बढ़ा रहा है। भारत अपनी ऑइल जरूरतों का 80% से अधिक हिस्सा आयात करता है। इसलिए क्रूड ऑइल की प्राइसों में तेजी से आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।

होम लोन और FD पर क्या होगा असर?

अगर RBI रेपो रेट बढ़ाकर 5.75% करता है, तो फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन की ब्याज लागत बढ़ सकती है। इसका असर मौजूदा कर्जदारों की EMI बढ़ने, कर्ज की अवधि लंबी होने या दोनों के रूप में दिखाई दे सकता है। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि होम लोन किस बेंचमार्क से जुड़ा है और बैंक ब्याज दर में बदलाव को किस तरह लागू करता है।

दूसरी ओर, रेपो रेट बढ़ने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि FD की ब्याज दरें भी उसी अनुपात में बढ़ेंगी। बैंक अपनी फंडिंग जरूरत, लिक्विडिटी और मार्केट में प्रतिस्पर्धा को देखते हुए जमा दरें तय करते हैं। इसलिए कुछ बैंक FD दरें बढ़ा सकते हैं, लेकिन सभी बैंक्स में समान बढ़ोतरी होना जरूरी नहीं है। ऐसे में होम लोन पर बढ़ी ब्याज दर का असर अपेक्षाकृत जल्दी दिख सकता है, जबकि FD निवेशकों को मिलने वाला संभावित फायदा बैंक की अपनी जमा दर नीति पर निर्भर करेगा।

आगे की तस्वीर क्या कहती है?

इन परिस्थितियों को देखते हुए कई अर्थशास्त्रियों और ब्रोकरेज संस्थानों ने RBI की आगामी बैठक में रेपो रेट बढ़ाने की संभावना जताई है। 5-7 अक्टूबर की MPC बैठक में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। ऐसा होने पर रेपो रेट 5.5% तक पहुंच सकता है। यह करीब साढ़े तीन साल बाद RBI की पहली दर बढ़ोतरी होगी।

मनी कंट्रोल के अनुसार, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि, अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 बेसिस पॉइंट की दो बढ़ोतरी हो सकती हैं। इससे रेपो रेट 5.75% तक पहुंच सकता है। द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, SBI के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि CPI महंगाई 6.5% से ऊपर जा सकती है और 2027 की शुरुआत में 6% से नीचे आ सकती है। HSBC और Deutsche Bank ने भी अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है।

मनी कंट्रोल के अनुसार, IDFC फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री Gaura Sengupta ने अक्टूबर से दर बढ़ोतरी का दौर शुरू होने और कुल 50-75 बेसिस पॉइंट की सख्ती की संभावना जताई है। वहीं Deutsche Bank ने मौजूदा दौर में कुल 100 बेसिस पॉइंट तक बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है, जिसमें 2027 की संभावित बढ़ोतरी भी शामिल है। हालांकि, ये एक्सपर्ट्स के अनुमान हैं और RBI का वास्तविक फैसला आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।

सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।

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