बॉन्ड यील्ड क्यों बढ़ रही है, निवेशकों के लिए क्या मायने

Why Are Government Bond Yields Rising in India
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भारत और दुनिया के बॉन्ड मार्केट में यील्ड तेजी से बढ़ रही है। इसके पीछे केवल ब्याज दरों में बदलाव नहीं, बल्कि महंगाई, महंगा क्रूड, बढ़ती सरकारी उधारी, ग्लोबल जियोपॉलिटिकल तनाव और सेंट्रल बैंक्स का सख्त रुख भी शामिल है। भारत में RBI की हालिया रेट हाइक के बाद यह दबाव और स्पष्ट हुआ है।

बॉन्ड यील्ड में बदलाव सरकार की उधारी, कॉरपोरेट फंडिंग, बैंक लोन, डेट फंड, विदेशी निवेश और शेयर मार्केट तक असर डाल सकता है। इसलिए यह केवल बॉन्ड निवेशकों के लिए नहीं, बल्कि पूरे फाइनेंशियल सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।

आइए समझें कि बॉन्ड यील्ड क्यों बढ़ रही है और इसका उधार लेने वालों तथा निवेशकों के लिए क्या मतलब है।

क्या है मामला?

भारत की बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 7.24% के ऊपर पहुंच चुकी है, जो 13 दिसंबर 2023 के बाद सबसे हाई स्तर है। इससे पहले इसका क्लोज 7.19% था। चालू वित्त वर्ष में यील्ड करीब 21 बेसिस पॉइंट और US-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद लगभग 58 बेसिस पॉइंट बढ़ी है।

अगस्त में 10-वर्षीय G-Sec यील्ड करीब 6.78-6.85% थी, जो अक्टूबर में 7.21% तक पहुंच गई। पिछले दो महीनों में इसमें लगभग 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई है।

इसी बीच RBI ने रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.5% कर दी। इस फैसले के तुरंत बाद यील्ड में 5-10 बेसिस पॉइंट की अतिरिक्त बढ़ोतरी देखी गई। मॉनेटरी पॉलिसी से पहले ही पूरी यील्ड कर्व करीब 25-30 बेसिस पॉइंट और 3-7 वर्ष के सरकारी बॉन्ड की यील्ड लगभग 35-40 बेसिस पॉइंट बढ़ चुकी थी।

ग्लोबल यील्ड और क्रूड क्यों बढ़ा रहे दबाव?

भारत में यील्ड बढ़ने की एक बड़ी वजह ग्लोबल बॉन्ड मार्केट भी है। US 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.25% पार कर गई, जो 2004 के बाद सबसे हाई स्तर है। 30-वर्षीय US यील्ड भी 2004 के बाद के उच्च स्तर पर पहुंची। जापान की सरकारी बॉन्ड यील्ड 3.06% और जर्मनी की 10-वर्षीय बंड यील्ड करीब 3.56% रही।

भारत-US 10-वर्षीय यील्ड गैप अब करीब 2% पॉइंट्स यानी 200 बेसिस पॉइंट से भी कम है और लगभग 20 वर्षों के निचले स्तर के पास है। जैफरीज के अनुसार, FY07-FY16 के दौरान भारत और US के बीच औसत इन्फ्लेशन अंतर लगभग 6.1% पॉइंट्स था, जो FY17-FY26 में घटकर करीब 1.5% पॉइंट्स रह गया।

क्रूड ऑयल भी बड़ा फैक्टर है। प्राइस $127 प्रति बैरल पार करने के बाद करीब $107 पर थी, जबकि Brent futures लगभग 1.3% बढ़कर $101 से ऊपर रहा और पिछले एक महीने के अधिकांश समय $100 से ऊपर बना रहा।

बढ़ती उधारी और बॉन्ड प्राइस पर क्या असर?

हाई यील्ड के पीछे सरकारी उधारी और बॉन्ड सप्लाई का बढ़ना भी महत्वपूर्ण है। US सरकार का कर्ज करीब $40.11 ट्रिलियन, जापान का $8.6 ट्रिलियन, जर्मनी का $3.34 ट्रिलियन और भारत का लगभग $2.55 ट्रिलियन है। दुनिया भर का सरकारी कर्ज करीब $365 ट्रिलियन है, जो $126.3 ट्रिलियन के ग्लोबल GDP का लगभग 311% है।

इसी समय US में डेटा सेंटर निवेश $800 बिलियन से अधिक है, जिससे कैपिटल और डॉलर की डिमांड बढ़ रही है। भारत में रुपये पर दबाव के बीच 25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में फॉरेक्स रिजर्व रिकॉर्ड $18.3 बिलियन घटे।

बॉन्ड यील्ड और बॉन्ड प्राइस विपरीत दिशा में चलते हैं। इसलिए यील्ड बढ़ने पर पुराने कम-कूपन बॉन्ड की प्राइस घट सकती है। इसका असर खासकर लंबी ड्यूरेशन वाले डेट फंड्स पर ज्यादा पड़ता है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

रिटेल निवेशकों के लिए RBI की रेट हाइक का मतलब यह नहीं है कि हर डेट फंड आकर्षक हो गया है। मौजूदा सख्त रेट साइकिल में छोटी अवधि और हाई-क्वालिटी डेट फंड्स अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प हो सकते हैं, जबकि लंबी अवधि वाले निवेशक यील्ड बढ़ने के साथ धीरे-धीरे ड्यूरेशन बढ़ा सकते हैं।

कंपनियों की उधारी लागत सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर ऊपर जा सकती है। आगे निवेशकों और उधार लेने वालों के लिए महंगाई, RBI पॉलिसी, बॉन्ड यील्ड और बैंक/NBFC दरों में ट्रांसमिशन महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल हाई एनर्जी प्राइस, जियोपॉलिटिकल तनाव और भारी सरकारी उधारी बॉन्ड मार्केट में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकती है।

भविष्य की बातें

मिंट के अनुसार, एक्सिस म्यूचुअल फंड का अनुमान है कि 2026 के बाकी समय में 10-वर्षीय G-Sec यील्ड 7.10-7.40% के दायरे में रह सकती है। अगले 6-12 महीनों में यदि क्रूड ऑयल $75 प्रति बैरल से नीचे आता है या 30-वर्ष और उससे अधिक अवधि की बॉन्ड यील्ड 7.90% पार करती है, तो लंबी ड्यूरेशन में अवसर बढ़ सकते हैं।

हालांकि आगे की दिशा क्रूड ऑयल, वेस्ट एशिया तनाव, रुपये की कमजोरी और US फ़ेडरल रिज़र्व की पॉलिसी पर निर्भर करेगी। ये फैक्टर्स बॉन्ड यील्ड को अनुमान से अधिक समय तक ऊंचा बनाए रख सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।

सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।

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