16 अगस्त को भारत सरकार के DGTR (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज) ने एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि अगले तीन साल तक स्टील के आयात पर एक खास टैक्स लगाना चाहिए। यह टैक्स इसलिए जरूरी है क्योंकि चीन जैसे देशों से आने वाला सस्ता स्टील हमारी डोमेस्टिक कंपनियों को नुकसान पहुंचा रहा है।
आइए समझते है कि DGTR की क्या सिफारिश है और भारतीय स्टील कंपनियों और निवेशकों के लिए क्या मायने रखती है।
क्या है मामला?
असल में यह कहानी इंडियन स्टील एसोसिएशन की शिकायत से शुरू हुई। उन्होंने कहा कि बाहर से बहुत ज्यादा सस्ता स्टील आ रहा है, जिससे हमारी डोमेस्टिक कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है। इसकी जांच के बाद सरकार ने पहले ही अप्रैल में 200 दिनों के लिए 12% सेफगार्ड ड्यूटी लगा दी थी, जो सितंबर के अंत तक चलेगी।
अब जो नई सिफारिश आई है, वो तीन साल के लिए है। इसमें पहले साल 12%, दूसरे साल 11.5% और तीसरे साल 11% की दर से सेफगार्ड ड्यूटी लगनी चाहिए। DGTR ने साफ कहा है कि ‘हाल ही में अचानक से बहुत तेजी से स्टील का आयात बढ़ा है और यह हमारी डोमेस्टिक कंपनियों के लिए गंभीर खतरा बन गया है।’ मुख्य समस्या यह है कि चीन, दक्षिण कोरिया, जापान, वियतनाम और नेपाल से बड़ी मात्रा में स्टील आ रहा है।
वैसे यह समस्या अकेली भारत की नहीं है। अमेरिका ने भी स्टील पर 50% का भारी टैक्स लगाया है, जिससे दुनियाभर में स्टील का रिज़र्व जमा हो गया है और वह सब भारत में आ रहा है।
ग्लोबल स्टील की समस्या
DGTR की यह सिफारिश ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में स्टील का ढेर लगा हुआ है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्टील आयात पर 50% टैरिफ लगाया था, जिससे चीन के स्टील निर्यात को झटका लगा। दक्षिण कोरिया और वियतनाम जैसे देशों ने भी चीन के खिलाफ एंटी-डंपिंग टैक्स लगाए हैं, और जापान के स्टील इंडस्ट्री ने भी अपने बाज़ार को बचाने के लिए कदम उठाने की मांग की है।
DGTR का कहना है कि यह टैक्स भारत के डोमेस्टिक स्टील इंडस्ट्री को गंभीर चोट से बचाने के साथ-साथ भविष्य में संभावित खतरे से सुरक्षा देने के लिए भी जरूरी हो जाते हैं।
भारत में स्टील आयात पर न्यूनतम वैल्यू सीमा
DGTR ने अपनी सिफारिश में यह स्पष्ट किया है कि यदि स्टील प्रोडक्ट्स का आयात तय न्यूनतम वैल्यू से ऊपर होता है, तो उन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सस्ते और डंपिंग जैसे आयात भारत के डोमेस्टिक स्टील इंडस्ट्री को नुकसान न पहुंचाएं, जबकि उच्च मूल्य वाले आयात बिना बाधा के जारी रह सकें। यह संतुलन डोमेस्टिक इंडस्ट्री की सुरक्षा और प्रतिस्पर्धी माहौल बनाए रखने, दोनों के लिए अहम है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
18 अगस्त को यह खबर आने के बाद स्टील कंपनियों के शेयर्स में 2% तक की तेजी देखी गई। टाटा स्टील, JSW स्टील, SAIL, JSPL जैसी कंपनियों के शेयर ऊपर गए। यह इसलिए हुआ क्योंकि निवेशकों को लग रहा था कि सितंबर के बाद क्या होगा, अब वह चिंता खत्म हो गई।
NMDC और APL अपोलो जैसी कंपनियों को भी इससे फायदा हो सकता है। हालांकि जुलाई महीने में निफ्टी मेटल इंडेक्स 2.62% गिरा था, जो कि अगस्त महीने में (अगस्त 21 के अनुसार ) लगभग उतना ही पॉजिटिव ट्रेड कर रहा है। इसके साथ ही, तीन साल के लिए 12%, 11.5% और 11% का टैक्स मतलब है कि भारतीय कंपनियों को कीमत तय करने में आसानी होगी। बाहर का सस्ता स्टील अब उतना सस्ता नहीं रहेगा।
भविष्य की बातें
DGTR की यह सिफारिश ऐसे समय में आई है जब ग्लोबल स्तर पर स्टील की सप्लाई जरूरत से ज्यादा है और कई देश आयात पर टैरिफ लगाकर अपने इंडस्ट्री की सुरक्षा कर रहे हैं। ऐसे हालात में भारत का यह कदम डोमेस्टिक स्टील इंडस्ट्री को बढ़ते आयात दबाव से बचाने के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है। इससे न केवल हमारे स्टील मैन्युफैक्चरर्स को राहत मिलेगी, बल्कि उन्हें उत्पादन बढ़ाने और बेहतर मुनाफ़ा कमाने का अवसर भी मिलेगा। यही भरोसा हाल के दिनों में स्टील कंपनियों के शेयर्स में दिखी तेज़ी से साफ झलकता है।
इसके साथ ही, DGTR ने स्थानीय इंडस्ट्री पर असर का गहन अध्ययन करने के बाद ही कुछ स्टील प्रोडक्ट्स पर शुल्क लगाने की सिफारिश की है। अब अंतिम निर्णय वित्त मंत्रालय को लेना है, जो इन ड्यूटीज़ को लागू करता है।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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