भारत की अर्थव्यवस्था में सर्विसेज सेक्टर की भूमिका लगातार बढ़ी है, लेकिन इसकी मासिक गतिविधियों को मापने के लिए अब तक इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन यानी IIP जैसा कोई आधिकारिक इंडिकेटर उपलब्ध नहीं था। अर्थव्यवस्था की शॉर्ट-टर्म स्थिति समझने के लिए विश्लेषकों को तिमाही GDP आंकड़ों, प्रशासनिक डेटा और अन्य इनडायरेक्ट इंडिकेटर्स पर निर्भर रहना पड़ता था।
अब मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन यानी MoSPI भारत का पहला मासिक इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन यानी ISP पेश कर रहा है।
आइए भारत के इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन को विस्तारपूर्वक समझें और जानें कि यह नया इंडिकेटर अर्थव्यवस्था, पॉलिसी मेकर्स, बिजनेसेज और निवेशकों के लिए कितना महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
क्या है मामला?
MoSPI ने 14 जुलाई 2026 को इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (ISP) की पहली ट्रायल सीरीज जारी की है। इसमें वित्त वर्ष 2025-26 के मासिक इंडेक्स और अप्रैल 2026 के आंकड़े शामिल होंगे। इसके बाद ट्रायल इंडेक्स हर महीने लगभग 60 दिनों के अंतर के साथ महीने की 29 तारीख या छुट्टी होने पर अगले वर्किंग डे पर जारी किया जाएगा।
इस इंडेक्स का बेस ईयर 2024-25 रखा गया है। इसका उद्देश्य बेस पीरियड के मुकाबले सर्विस इंडस्ट्रीज द्वारा पैदा किए गए रियल आउटपुट के वॉल्यूम में समय के साथ होने वाले बदलावों को मापना है। इसे IIP के सर्विसेज सेक्टर काउंटरपार्ट के रूप में तैयार किया गया है।
ISP के लिए टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी मई 2025 में देबजानी घोष की अध्यक्षता में बनाई गई थी। व्यापक विचार-विमर्श के बाद अप्रैल 2026 को इसकी मेथडोलॉजी और फ्रेमवर्क से जुड़ा अप्रोच पेपर स्टेकहोल्डर्स की राय के लिए सार्वजनिक किया गया।
किन सर्विसेज को इंडेक्स में शामिल किया जाएगा?
ISP मुख्य रूप से फॉर्मल सर्विसेज सेक्टर को कवर करेगा। इसमें होलसेल और रिटेल ट्रेड, रिपेयर और मेंटेनेंस, रोड और वाटर ट्रांसपोर्ट, वेयरहाउसिंग, होटल और रेस्टोरेंट, पोस्टल और कूरियर सर्विसेज, टेलीकम्युनिकेशन, बैंकिंग, इंश्योरेंस और रियल एस्टेट को शामिल किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, इन्फॉर्मेशन और कंप्यूटर-रिलेटेड सर्विसेज, प्रोफेशनल, साइंटिफिक और टेक्निकल सर्विसेज, एडमिनिस्ट्रेटिव सपोर्ट तथा आर्ट्स, एंटरटेनमेंट और रिक्रिएशन को भी शुरुआती कवरेज में जगह मिलेगी। द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, शुरुआती ISP सर्विसेज सेक्टर के लगभग दो-तिहाई GVA को कवर करेगा।
हालांकि, हेल्थ और एजुकेशन को फिलहाल इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। इन्हें एनुअल सर्वे ऑफ इनकॉरपोरेटेड सर्विसेज सेक्टर एंटरप्राइजेज यानी सर्विसेज सेक्टर इंटरप्राइजेज उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (ASISSE) से डेटा उपलब्ध होने के बाद जोड़ा जाएगा। पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और डिफेंस, ओनरशिप ऑफ ड्वेलिंग्स तथा इनफॉर्मल या नॉन-मार्केट गतिविधियों वाले कुछ क्षेत्र भी शुरुआती कवरेज से बाहर रहेंगे।
ISP कैसे तैयार होगा और PMI से कैसे अलग है?
ISP को फिक्स्ड-वेट लैस्पेयर्स वॉल्यूम मेथडोलॉजी के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसमें अलग-अलग सर्विसेज को उनके सेक्टोरल GVA योगदान के अनुसार वेट दिया जाएगा। अधिकांश मार्केट-बेस्ड सर्विसेज के आउटपुट का अनुमान लगाने के लिए GST रिटर्न्स में दर्ज आउटवर्ड सप्लाई डेटा का व्यापक उपयोग होगा।
रेलवे और एयर ट्रांसपोर्ट जैसे सेक्टर्स में पैसेंजर या फ्रेट से जुड़े क्वांटिटी इंडिकेटर्स इस्तेमाल किए जा सकते हैं। बैंकिंग, इंश्योरेंस और अन्य इनकॉरपोरेटेड सर्विसेज के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा ASISSE डेटा महत्वपूर्ण इनपुट होंगे।
ISP को PMI सर्विसेज का विकल्प नहीं समझना चाहिए। PMI एक सर्वे-बेस्ड डिफ्यूजन इंडेक्स है, जिसमें 50 से ऊपर की रीडिंग विस्तार और 50 से नीचे की रीडिंग संकुचन का संकेत देती है। इसके विपरीत, ISP प्रशासनिक और स्टैटिस्टिकल डेटा पर आधारित रियल प्रोडक्शन-वॉल्यूम इंडेक्स होगा। PMI बिजनेस कंडीशंस का त्वरित संकेत देता है, जबकि ISP वास्तविक सर्विसेज आउटपुट को मापेगा।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
निवेशकों को अब सर्विसेज सेक्टर की दिशा समझने के लिए केवल तिमाही GDP या PMI पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ISP से बैंकिंग, इंश्योरेंस, टेलीकॉम, ट्रांसपोर्ट, होटल, रियल एस्टेट, IT और प्रोफेशनल सर्विसेज जैसे सेक्टर्स की मासिक ऑपरेटिंग मोमेंटम को अधिक व्यवस्थित तरीके से समझा जा सकेगा।
ISP और IIP को साथ देखकर यह पता लगाया जा सकेगा कि किसी अवधि में आर्थिक ग्रोथ इंडस्ट्री से आ रही है या सर्विसेज से। इससे निवेशक डिमांड की मजबूती, बिजनेस साइकिल और अलग-अलग सेक्टर्स के बीच प्रदर्शन के अंतर का बेहतर आकलन कर सकेंगे।
हालांकि, शुरुआती सीरीज ट्रायल आधार पर होगी और इसमें हेल्थ, एजुकेशन तथा इनफॉर्मल सर्विसेज का पूरा प्रतिनिधित्व नहीं होगा। इसलिए निवेशकों को ISP को किसी एक कंपनी के शेयर खरीदने या बेचने का सीधा संकेत मानने के बजाय व्यापक मैक्रो और सेक्टोरल इंडिकेटर के रूप में देखना होगा।
भविष्य की बातें
आने वाले समय में इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (ISP), RBI और सरकार के लिए सर्विस सेक्टर की गतिविधियों को मापने का एक महत्वपूर्ण मासिक संकेतक बन सकता है। इससे आर्थिक वृद्धि, डिमांड की स्थिति और नीतियों के प्रभाव का बेहतर आकलन करने में मदद मिलेगी।
साथ ही, विभिन्न सरकारी डेटा स्रोतों के बेहतर समन्वय से आर्थिक आंकड़ों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि केंद्रीय बजट 2026-27 में सर्विस सेक्टर को बढ़ावा दिया गया है और सरकार ने 2047 तक ग्लोबल सर्विसेज निर्यात में 10% हिस्सेदारी का लक्ष्य रखा है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
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