शेयर बाजार में खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के साथ निवेश से जुड़े फ्रॉड के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। हाल ही में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कथित पंप-एंड-डंप (Pump-and-Dump) मामले में 221 संस्थाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है।
यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले केवल टिप्स या सोशल मीडिया पर वायरल हो रही सलाह पर भरोसा करना नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे फ्रॉड कैसे काम करते हैं और उनसे कैसे बचा जा सकता है, यह समझना हर निवेशक के लिए जरूरी
आइए पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
क्या है मामला?
30 जून 2026 को जारी SEBI के अंतिम आदेश के अनुसार, यह कथित घोटाला 2017 से 2020 के बीच हुआ था। इस दौरान पांच शेयरों में कीमत और ट्रेडिंग वॉल्यूम में कथित रूप से हेरफेर किया गया। इनमें शामिल हैं:
1 – मौर्य उद्योग लिमिटेड (Mauria Udyog Ltd)
2 – 7एनआर रिटेल लिमिटेड (7NR Retail Ltd)
3 – दार्जिलिंग रोपवे कंपनी लिमिटेड (Darjeeling Ropeway Company Ltd)
4 – जीबीएल इंडस्ट्रीज लिमिटेड (GBL Industries Ltd)
5 – विशाल फैब्रिक्स लिमिटेड (Vishal Fabrics Ltd)
SEBI के अनुसार, पहले इन शेयरों की कीमत और ट्रेडिंग वॉल्यूम को कृत्रिम तरीके से बढ़ाया गया। इसके बाद SMS, सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों के जरिए निवेशकों को इन शेयरों में निवेश करने की सलाह दी गई। जैसे-जैसे खुदरा निवेशकों ने खरीदारी शुरू की, ऑपरेटर्स ने ऊंचे दाम पर अपने शेयर बेच दिए। बाद में शेयरों की कीमत गिर गई और कई निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा।
इस मामले में SEBI ने 221 संस्थाओं को अलग-अलग अवधि के लिए शेयर बाजार में कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया है। इसके अलावा आर्थिक जुर्माना लगाया गया है और करीब ₹143.79 करोड़ की कथित अवैध कमाई वापस लेने का भी निर्देश दिया गया है।
पंप-एंड-डंप स्कैम कैसे काम करता है?
पंप-एंड-डंप स्कैम का तरीका आमतौर पर लगभग एक जैसा होता है।
पहला चरण: स्कैम करने वाले कम ट्रेड होने वाले या छोटे शेयरों को कम कीमत पर खरीद लेते हैं।
दूसरा चरण: फिर आपस में खरीद-बिक्री करके उन शेयरों की कीमत और ट्रेडिंग वॉल्यूम को कृत्रिम रूप से बढ़ाया जाता है, ताकि शेयर में तेजी दिखाई दे।
तीसरा चरण: इसके बाद SMS, WhatsApp, Telegram, सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए यह संदेश फैलाया जाता है कि यह शेयर तेजी से बढ़ने वाला है और इसमें निवेश का शानदार मौका है।
चौथा चरण: इन संदेशों पर भरोसा करके जब बड़ी संख्या में निवेशक शेयर खरीदने लगते हैं, तो उसकी कीमत और ऊपर चली जाती है।
पांचवां चरण: इसी दौरान स्कैम करने वाले अपने शेयर ऊंची कीमत पर बेच देते हैं। इसके बाद शेयर की कीमत तेजी से गिरती है और नुकसान आम निवेशकों को उठाना पड़ता है।
खुदरा निवेशक ज्यादा शिकार क्यों बनते हैं?
ऐसे मामलों में स्कैम करने वाले निवेशकों की भावनाओं का फायदा उठाते हैं।
कई बार निवेशक बिना जांच-पड़ताल किए WhatsApp, Telegram, SMS या सोशल मीडिया पर मिली शेयर टिप्स के आधार पर निवेश कर देते हैं।
इसके अलावा, ‘यह शेयर जल्द दोगुना होने वाला है’, ‘मौका हाथ से निकल जाएगा’ या ‘सिर्फ आज का मौका’ जैसे संदेशों के जरिए FOMO (Fear of Missing Out) पैदा किया जाता है। ऐसे में कई निवेशक जल्दबाजी में फैसला ले लेते हैं।
छोटी और कम चर्चित कंपनियों के शेयरों में इस तरह की हेरफेर करना अपेक्षाकृत आसान होता है। इसलिए ऐसे शेयरों में निवेश करने से पहले अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।
शेयर बाजार की धोखाधड़ी से कैसे बचें?
शेयर बाजार में सुरक्षित निवेश के लिए कुछ आसान बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
‘गारंटीड रिटर्न’ के दावों से रहें सावधान: अगर कोई निवेश कम समय में निश्चित या बहुत ज्यादा रिटर्न का वादा कर रहा है, तो सतर्क हो जाएं। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है और यहां कोई भी निवेश तय मुनाफे की गारंटी नहीं देता।
निवेश से पहले खुद रिसर्च करें: किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले उसके बिजनेस, वित्तीय प्रदर्शन, स्टॉक एक्सचेंज पर की गई घोषणाओं और बुनियादी पहलुओं को जरूर समझें। निवेश का फैसला हमेशा आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर लें, न कि अपुष्ट सलाह पर।
किसी शेयर की अचानक बढ़ती चर्चा पर तुरंत भरोसा न करें: अगर कोई कम चर्चित शेयर बिना किसी बड़े कारोबारी अपडेट के अचानक सोशल मीडिया या मैसेजिंग ग्रुप्स में वायरल होने लगे, तो जल्दबाजी में निवेश करने से बचें। किसी शेयर की लोकप्रियता ही निवेश का आधार नहीं होनी चाहिए।
भावनाओं में आकर निवेश न करें: ठग अक्सर यह माहौल बनाते हैं कि कोई शेयर तेजी से बढ़ने वाला है या यह मौका जल्द खत्म हो जाएगा। ऐसे दबाव या उत्साह में लिया गया निवेश का फैसला नुकसान का कारण बन सकता है।
धैर्य के साथ निवेश करें: सफल निवेश का सबसे बड़ा मंत्र शॉर्ट-टर्म ट्रेंड के पीछे भागना नहीं, बल्कि अनुशासित और लंबी अवधि का निवेश है। विविधीकृत पोर्टफोलियो, स्पष्ट वित्तीय लक्ष्य और नियमित निवेश की आदत आपको बाजार के शोर और सट्टेबाजी के असर से काफी हद तक बचा सकती है।
SEBI की कार्रवाई क्यों महत्वपूर्ण है?
SEBI के अनुसार, इस मामले में बड़ी संख्या में संस्थाओं ने मिलकर कथित तौर पर शेयरों की कीमतों में हेरफेर किया और निवेशकों को गुमराह किया।
यह कार्रवाई दिखाती है कि रेगुलेटर बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए लगातार निगरानी कर रहा है।
हालांकि, केवल रेगुलेटर पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। निवेशकों को भी बिना पुष्टि की गई जानकारी के आधार पर निवेश करने से बचना चाहिए और हर निवेश से पहले अपनी तरफ से पूरी जांच-पड़ताल करनी चाहिए।
भविष्य की बातें
SEBI की यह कार्रवाई एक बार फिर बताती है कि शेयर बाजार में जल्द मुनाफे का लालच कई बार भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले उसकी जानकारी विश्वसनीय स्रोतों से जरूर जांचें, सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप्स पर मिलने वाली टिप्स से बचें और हमेशा रिसर्च के आधार पर निवेश करें। अनुशासित और लंबी अवधि की निवेश रणनीति ही शेयर बाजार की ऐसी धोखाधड़ी से बचने का सबसे बेहतर तरीका है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।