मध्य पूर्व में ईरान और इज़राइल के बीच चल रहे संघर्ष का ग्लोबल अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत पर भी गहरा असर पड़ सकता है और अगर संघर्ष बढ़ता है तो इससे न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा है, बल्कि भारत के लिए कई आर्थिक चुनौतियाँ भी खड़ी हो सकती हैं।
इस आर्टिकल में, हम ईरान-इज़राइल संघर्ष के भारत पर पड़ने वाले प्रभावों को विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे, खासकर तेल, चावल निर्यात, और निवेशकों के दृष्टिकोण से।
क्या है मामला?
ईरान और इज़राइल के बीच विवाद लंबे समय से चला आ रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में यह टकराव और भी बढ़ गया है। 01 अक्टूबर 2024 को ईरान ने इज़राइल पर करीब 180 मिसाइलें दागी, जिसमें अधिकांश मिसाइलें या तो इज़राइली डिफेंस सिस्टम द्वारा रोकी गईं या अपने लक्ष्य तक पहुँचने से पहले गिर गईं। यह हमला ईरान की ओर से हिज़बुल्लाह और हमास के वरिष्ठ नेताओं की मौत का बदला था।
इसके पहले, अप्रैल में भी ईरान ने इज़राइल पर 300 से अधिक ड्रोन और मिसाइलें दागी थीं, जो कि सीरिया के दमिश्क में एक ईरानी राजनयिक इमारत पर हुए हमले के जवाब में था। उस हमले में एक वरिष्ठ ईरानी जनरल की मौत हुई थी।
तेल की कीमतों पर असर
ईरान, जो OPEC का प्रमुख सदस्य है, ग्लोबल ऑइल मार्केट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हाल ही में हुए मिसाइल हमलों के बाद अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड ऑइल की प्राइस $1.09 बढ़कर $70.92 प्रति बैरल हो गईं। साथ ही, यदि संघर्ष और बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में और तेज उछाल आ सकता है, और इसका सबसे बड़ा असर भारत पर होगा।
क्योंकि, भारत काफी हद तक मध्य पूर्व से तेल पर निर्भर है, और सप्लाई में कोई भी रुकावट आती है तो इसका सीधा असर भारत पर हो सकता है, क्योंकि भारत अपनी आवश्तकता का 80% ऑइल इम्पोर्ट करता है। तेल की कीमतों में यह उछाल महंगाई को बढ़ाकर केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों में कटौती की योजना को प्रभावित कर सकता है, जिससे आर्थिक सुधार में बाधा आ सकती है। इसके साथ ही, इरान-इज़राइल संघर्ष के चलते तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) 0.3% तक बढ़ सकता है।
ईरान-इज़राइल संघर्ष से बासमती चावल पर असर
भारत ईरान का चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है। इसलिए अगर ईरान और इज़राइल के बीच संघर्ष बढ़ता है तो इससे भारत के चावल निर्यात पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, भारत से निर्यात होने वाले बासमती चावल का लगभग 25% ईरान को भेजा जाता है। हालाँकि, 21 अक्टूबर से 21 दिसंबर तक ईरान ने अपनी स्थानीय फसल का समर्थन करने के लिए आयात पर दो महीने के लिए प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे भारतीय निर्यात प्रभावित हो रहा है।
इसके साथ ही, ईरान को निर्यात पर बीमा कंपनियों ने बीमा देना बंद कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप, बासमती चावल की कीमतें 800 रुपये प्रति क्विंटल गिर गई हैं।
भारतीय शेयर बाजार पर असर
ईरान-इज़राइल संघर्ष का प्रभाव भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा है। 7 अक्टूबर तक सेंसेक्स और निफ्टी इस संघर्ष के चलते है, और FIIs का रुख चीन की ओर होने की वजह से अपने ऑल टाइम हाई से लगभग 6% नीचे आ गए थे। इसके साथ ही, यह कहना गलत नहीं होगा कि यदि यह संघर्ष बढ़ता है, तो भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौतियाँ और बढ़ सकती हैं।
भविष्य की बातें
ईरान और इज़राइल के बीच चल रहा संघर्ष न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। भारत, जो अपनी तेल आवश्यकताओं और चावल निर्यात के लिए इन देशों पर निर्भर है, इस संघर्ष से गहरे प्रभावित हो सकता है।
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, भारत वर्तमान में कई खाड़ी देशों के साथ संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTAs) पर बातचीत कर रहा है। ये समझौते व्यापार और निवेश प्रवाह को तेज़ कर सकते हैं, लेकिन क्षेत्रीय अस्थिरता इन योजनाओं को प्रभावित कर सकती है।
हालांकि संघर्ष हज़ारों मील दूर चल रहा हो, लेकिन इसका असर सीधे भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। संघर्ष कितने समय तक चलता है और किस दिशा में आगे बढ़ता है, यह तय करेगा कि भारत पर इसका कितना गहरा प्रभाव होगा।
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*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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