2024 में भारत के IPO मार्केट में एक अलग ही जूनून देखने को मिल रहा है। जहां सिर्फ ट्रेडिशनल बिजनेस ही नहीं बल्कि, स्टार्टअप्स, खासकर डिजिटल और टेक्नोलॉजी से जुड़े, इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के माध्यम से बड़े पैमाने पर फंड जुटा रहे हैं। इस बढ़ते IPO बूम ने विभिन्न क्षेत्रों में बदलाव लाया है, और साथ ही देश के आर्थिक परिदृश्य को भी एक नई दिशा दी है।
इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि यह IPO बूम क्यों हो रहा है, कौन-कौन से क्षेत्र इससे जुड़े हुए हैं, और यह निवेशकों के लिए क्या अवसर लेकर आ रहा है।
क्या है मामला?
भारतीय मार्केट में IPO का बूम देखने को मिल रहा है। यह न केवल कंपनियों के लिए धन जुटाने का एक साधन बन गया है, बल्कि नए स्टार्टअप्स और कंपनियों को बड़े स्तर पर निवेश जुटाने का मौका भी दे रहा है।
अगर हम इसकी 2007 से तुलना करें तो, 2007 में 100 IPO के जरिए ₹34,179 करोड़ जुटाए गए थे, जबकि 2024 में अब तक लॉन्च हुए 70 मेनबोर्ड IPO से ₹1.03 लाख करोड़ से अधिक की पूंजी जुटाई गई है और विभिन्न IPO आने के कतार में लगे है।
सिर्फ इतना ही नहीं, छोटे और मध्यम उद्योग (SME) के IPO में भी इस साल बड़ी वृद्धि देखी गई है। जहां 2024 में अब तक 215 SME IPO के जरिए ₹7,700 करोड़ जुटाए गए हैं, जबकि 2023 में 182 कंपनियों ने पब्लिक होकर ₹4,686 करोड़ से अधिक जुटाए थे।
IPO बूम क्यों बढ़ रहा है?
भारतीय स्टॉक मार्केट में IPO बूम का मुख्य कारण भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और कंपनियों के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन को माना जा सकता है। द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, सिटी इंडिया के इन्वेस्टमेंट बैंकिंग हेड राहुल सराफ का कहना है कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि और कंपनियों की बढ़ती आय ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है, जिसके चलते मार्केट में IPO लाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इसके अलावा, सरकार द्वारा डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देने के कारण भी टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को बड़े पैमाने पर निवेश जुटाने में सफलता मिल रही है।
साथ ही, मार्केट में रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भी एक वजह है। जहां 2020 में 4 करोड़ डिमैट अकाउंट्स थे, वह 2024 में बढ़कर 17.5 करोड़ डिमैट अकाउंट्स हो चुके है। इसके अलावा, FY24 में डोमेस्टिक इक्विटी निवेश ₹128 लाख करोड़ तक पहुंच गया।
IPO बूम से जुड़े क्षेत्र
2024 में, रियल एस्टेट IPOs से ₹13,500 करोड़ जुटाए गए है, जो 2023 के मुकाबले लगभग दोगुना है। इस वृद्धि के पीछे आवासीय और ऑफिस लीजिंग की बढ़ती डिमांड, को-वर्किंग स्पेस और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) का एक्सपेंशन हैं। यह संख्या रियल एस्टेट सेक्टर में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है।
इस सेक्टर के अलावा डिजिटल और ई-कॉमर्स कंपनियां भी IPO लाकर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हैं, जिससे वह नए-नए निवेशकों को जोड़ने में सफल हो रही हैं। यह डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास का प्रमाण है, जो भारतीय स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
भारतीय मार्केट में IPO की वृद्धि न केवल निवेशकों के लिए नए निवेश विकल्प खोल रही हैं, बल्कि स्टार्टप्स से लेकर MNC कंपनियों को फंड जुटाने में मदद कर रही है। हालांकि भारतीय मार्केट में कुछ IPO ऐसे भी आएं है जैसे कि बजाज हाउसिंग फाइनेंस, टाटा टेक्नोलॉजीज, KRN हीट एक्सचेंजर, BLS – ई-सर्विसेज और प्रीमियर एनर्जीज़ आदि ने निवेशकों को 100% से ज्यादा का लिस्टिंग गेन दिया है, लेकिन ध्यान रहें ऐसे भी विभिन्न IPO आएं है जिन्होंने निवेशकों को लिस्टिंग डे पर नेगेटिव रिटर्न दिया है इसलिए किसी भी कंपनी में निवेश से पहले फंडामेंटल रिसर्च जरुरी हो जाती है।
भविष्य की बातें
आने वाले समय में IPO मार्केट की संभावनाएं और भी मजबूत हो सकती हैं, खासकर डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेजी से बढ़ते विस्तार के साथ। सरकार की योजनाओं और डिजिटलाइजेशन पर जोर ने कई नए स्टार्टअप्स को उभरने का मौका दिया है।
इसके साथ ही, द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, सिटी इंडिया के इन्वेस्टमेंट बैंकिंग हेड राहुल सराफ का कहना है कि भारत में आने वाले IPO और M&A गतिविधियां नई अर्थव्यवस्था से संबंधित सेक्टर्स से होंगी, जैसे कि क्लाउड पेमेंट्स, न्यू एनर्जी, और टेक कंपनियां। इसके चलते इन कंपनियों का मार्केट कैप में हिस्सा बढ़कर 2% से 25%+ तक पहुँचने की संभावना है, जो भारतीय मार्केट को नया रूप देगा और निवेशकों के लिए नए अवसर प्रदान करेगा।
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*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर