भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 31 दिसंबर 2024 को ‘म्यूचुअल फंड्स लाइट’ (MF लाइट) फ्रेमवर्क पेश किया है, जिसका उद्देश्य पैसिव म्यूचुअल फंड स्कीम्स को प्रोत्साहन देना है। यह फ्रेमवर्क रिटेल निवेशक और नए एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित होगा। इसके तहत निवेश प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए कम लागत और अधिक पारदर्शिता पर जोर दिया गया है।
आइए समझते है कि सेबी द्वारा पेश किया गया MF लाइट फ्रेमवर्क क्या है और निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है।
क्या है MF लाइट फ्रेमवर्क?
MF लाइट फ्रेमवर्क उन म्यूचुअल फंड स्कीम्स के लिए बनाया गया है जो पैसिव रूप से मैनेज होती हैं। इसके तहत इंडेक्स फंड, गोल्ड और सिल्वर ETFs, और सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) आधारित स्कीम्स शामिल की गई हैं। जहां, इस फ्रेमवर्क के पहले चरण में केवल उन स्कीम्स को शामिल किया गया है जो डोमेस्टिक पैसिव इंडेक्स पर आधारित है और जिनका समग्र एसेट मैनेजमेंट (AUM) 5,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक है। यह योजना हर वित्तीय वर्ष के 31 दिसंबर तक लागू होगी।
इसके अलावा, विदेशी निवेश के लिए, केवल वह इंडेक्स मान्य होंगे जिनके कुल एसेट्स 20 बिलियन डॉलर से अधिक हैं।
निवेशकों को मिलने वाले लाभ
MF लाइट के माध्यम से म्यूचुअल फंड में प्रवेश प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है, जिससे इंडस्ट्री में नए प्लेयर्स के आने की संभावना बढ़ेगी। पिछले 2-3 वर्षों में कई फिनटेक स्टार्टअप्स ने केवल पैसिव स्कीम्स लॉन्च करने की योजना के साथ मार्केट में कदम रखा है। सेबी का यह कदम कंपनियों और निवेशकों दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि इससे मार्केट में लिक्विडिटी, स्कीम्स का विस्तार और साथ ही बढ़ती प्रतिस्पर्धा से कॉस्ट में भी कमी देखने को मिल सकती है।
इसके अलावा, निवेशकों को गोल्ड और सिल्वर ETFs और विदेशी इंडेक्स में निवेश का अवसर मिलता है, जो उनके निवेश पोर्टफोलियो को अधिक डाइवर्सिफाइड बनाता है।
एसेट मैनेजमेंट कंपनियों और इंडस्ट्री को कैसे मिलेगा फायदा
MF लाइट फ्रेमवर्क एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के लिए भी नई संभावनाओं के द्वार खोलता है। छोटे AMC और प्राइवेट इक्विटी फंड्स अब आसानी से इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं। नए प्लेयर्स को प्रवेश मानदंडों में छूट और सरल नियमों का लाभ मिलेगा। मौजूदा AMC, जो सक्रिय और पैसिव स्कीम्स दोनों को मैनेज करती हैं, अपनी पैसिव स्कीम्स को अलग AMC में स्थानांतरित कर सकती हैं।
भारतीय म्यूचुअल फंड मार्केट पर प्रभाव
भारतीय पैसिव म्यूचुअल फंड मार्केट, जिसका कुल AUM नवंबर 2024 तक 11.03 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, इस फ्रेमवर्क से और भी तेजी से बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही, गोल्ड और सिल्वर ETFs ने हाल के वर्षों में काफी लोकप्रियता हासिल की है और अब MF लाइट फ्रेमवर्क में इन्हें प्राथमिकता दी जा रही है।
निष्कर्ष
‘म्यूचुअल फंड्स लाइट’ फ्रेमवर्क सेबी का एक क्रांतिकारी कदम है, जो निवेशक और इंडस्ट्री दोनों के लिए फायदेमंद है। यह फ्रेमवर्क न केवल निवेशकों के लिए कम लागत और पारदर्शी विकल्प प्रदान करता है, बल्कि छोटे AMC और नए प्लेयर्स के लिए भी अवसर प्रदान करता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि MF लाइट स्कीम्स में निवेश करने से पहले उनकी संरचना, जोखिम और रिटर्न की गहन जांच करें।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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