15 जनवरी को भारत में भारतीय सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन न केवल भारतीय सेना की वीरता और बलिदान को सम्मानित करने का है, बल्कि यह हमारे डिफेंस सेक्टर की प्रगति और चुनौतियों पर विचार करने का भी अवसर प्रदान करता है। भारतीय सेना, जिसे दुनिया की सबसे बहादुर सेनाओं में से एक माना जाता है, देश की सीमाओं की डिफेंस के साथ-साथ आंतरिक आपदाओं के दौरान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इस आर्टिकल में हम भारतीय डिफेंस सेक्टर की वर्तमान स्थिति, आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए कदम, सरकारी नीतियों, प्रमुख डिफेंस कंपनियों, और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करेंगे।
भारतीय डिफेंस सेक्टर की वर्तमान स्थिति
भारत विश्व में चौथा ऐसा देश है जो डिफेंस पर सबसे ज्यादा खर्च करता है, भारत ने FY2024-25 के केंद्रीय बजट में रक्षा मंत्रालय (मिनिस्ट्री ऑफ़ डिफेंस) के लिए ₹6,21,940.85 करोड़ (लगभग 75 बिलियन अमेरिकी डॉलर) आवंटित किए गए थे। जिसकी घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 जुलाई, 2024 को संसद में की थी। इसके साथ ही, पिछले एक दशक में सैन्य खर्च दोगुना से अधिक हो गया है, जो राष्ट्र की डिफेंस क्षमता को बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ने के कमिटमेंट को दर्शाता है।
इस बढ़ोतरी का मुख्य उद्देश्य न केवल भारतीय सेना, नौसेना, और वायुसेना को मजबूत बनाना है, बल्कि डोमेस्टिक डिफेंस इंडस्ट्री को आत्मनिर्भर बनाना भी है।
भारतीय डिफेंस प्रोडक्शन और निर्यात
भारत की डिफेंस इंडस्ट्री ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। FY2023-24 में देश का डोमेस्टिक डिफेंस प्रोडक्शन ₹1.27 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो FY2022-23 र्की तुलना में 16.7% अधिक है, जबकि 2019-20 की तुलना में यह वृद्धि 60% की रही, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।

डिफेंस एक्सपोर्ट के मामले में भी भारत ने नया रिकॉर्ड बनाया है। 2013-14 में जहां डिफेंस एक्सपोर्ट ₹686 करोड़ था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर ₹21,083 करोड़ हो गया है। जहां एक्सपोर्ट वैल्यू पिछले एक दशक में 30 गुना बढ़ गई है। यह उपलब्धि भारत की ग्लोबल डिफेंस मार्केट में बढ़ती हिस्सेदारी और प्रतिस्पर्धात्मकता का प्रमाण है।
भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट पोर्टफोलियो अब और भी डाइवर्सिफाइड हो गया है। इसमें बुलेटप्रूफ जैकेट्स, हेलमेट्स, डॉर्नियर (Do-228) एयरक्राफ्ट, चेतक हेलीकॉप्टर्स, तेज़ इंटरसेप्टर बोट्स और हल्के टॉरपीडोज़ जैसे अत्याधुनिक उपकरण शामिल हैं। भारत अब 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है, जिनमें अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया प्रमुख हैं।
आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत का सफर
स्वदेशीकरण भारतीय डिफेंस नीति का केंद्रबिंदु बन गया है। 1990 के दशक तक, भारत अपनी डिफेंस जरूरतों का लगभग 70% आयात करता था। हालाँकि, सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल ने डोमेस्टिक उत्पादन को प्राथमिकता दी है। इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और भारतीय कंपनियों को ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धी बनाना है।
सरकार ने डिफेंस प्रोडक्शन एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी (DPEPP) 2020 के तहत 2025 तक 26 बिलियन अमेरिकी डॉलर के डोमेस्टिक डिफेंस उत्पादन और 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर के डिफेंस निर्यात का लक्ष्य रखा है।
चुनौतियाँ और समाधान
भारतीय डिफेंस सेक्टर ने आत्मनिर्भरता की दिशा में कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं, लेकिन चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं।
- आयात पर निर्भरता: भारत अभी भी ग्लोबल स्तर पर हथियारों का सबसे बड़ा आयातक है।
- टेक्नोलॉजी गैप: उच्च-स्तरीय तकनीकों का विकास अभी भी सीमित है।
- प्राइवेट क्षेत्र की भागीदारी: प्राइवेट कंपनियों को डिफेंस प्रोडक्शन में पूरी तरह से शामिल करना बाकी है।
इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए सरकार को R&D में निवेश बढ़ाने और प्राइवेट कंपनियों को अधिक अवसर देने की आवश्यकता है।
भारत का डिफेंस सेक्टर मजबूत करने की बड़ी योजना
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, भारत सरकार मार्च 2025 से पहले करीब ₹1.5 लाख करोड़ के बड़े डिफेंस डील्स को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। इन डील्स का उद्देश्य भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत को और अधिक मजबूत बनाना है।
इन डील्स में प्रमुख रूप से फ्रांस से 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमान और 3 स्कॉर्पीन पनडुब्बियां खरीदने का प्रस्ताव है, जिससे नौसेना की मारक क्षमता में इजाफा होगा। इसके अलावा, भारतीय सेना के लिए 156 स्वदेशी प्रचंड हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (LCH) और 307 एडवांस टो आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) की खरीद भी योजना में शामिल है। ये हथियार पूरी तरह से भारत में बनाए जाएंगे, जिससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को बल मिलेगा।
भारतीय डिफेंस सेक्टर में अग्रणी कंपनियां
भारत डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें कई प्रमुख भारतीय कंपनियां अहम भूमिका निभा रही हैं। आइए, कुछ प्रमुख डिफेंस कंपनियों पर एक नजर डालते हैं:

यह टेबल बीते वर्षों में डिफेंस सेक्टर्स से जुडी कुछ कंपनियों के प्रदर्शन को दर्शाता है।
भारतीय डिफेंस सेक्टर का भविष्य
आने वाले पांच वर्षों में भारत का रक्षा खर्च 8% CAGR के साथ बढ़कर लगभग $130 अरब तक पहुंचने का अनुमान है। यह तेजी से बढ़ता खर्च भारत की सुरक्षा को मजबूत करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता घटाने की रणनीति का हिस्सा है।
नुवामा की रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्तमान में ग्लोबल हालात जैसे यूरोप में जारी संघर्ष, मध्य पूर्व में युद्ध और पूर्वी एशिया में असफल तख्तापलट जैसी घटनाएं सुरक्षा पर खर्च बढ़ाने का संकेत दे रही हैं। ऐसे माहौल में भारत ने यह समझ लिया है कि शांति केवल एक सशक्त रक्षा प्रणाली से ही संभव है।
इसके साथ ही, डिफेंस मंत्रालय ने 2027 तक हथियारों में 70% आत्मनिर्भरता का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, डिफेंस सेक्टर में $26 बिलियन का डोमेस्टिक कारोबार और $5 बिलियन का निर्यात लक्ष्य 2025 तक हासिल करने का प्रयास जारी है। इसके साथ ही, डिफेंस उत्पादन में ग्रीन चैनल स्टेटस पॉलिसी लागू की गई है, जो प्राइवेट क्षेत्र की भागीदारी को आसान बनाती है। आने वाले वर्षों में भारत न केवल आत्मनिर्भर होगा, बल्कि ग्लोबल डिफेंस निर्यात में भी अपनी पहचान बनाएगा।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर