भारत एक ऐसा देश है जिसकी सीमा विभिन्न देशों से मिली हुई है और इसलिए भारत की सुरक्षा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि हम क्षेत्रीय और ग्लोबल चुनौतियों का सामना करने के लिए अच्छी तरह से तैयार हैं, एक मजबूत डिफेंस क्षेत्र आवश्यक है।
इसलिए बीते कुछ वर्षों में भारत के डिफेंस सेक्टर में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जहां आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के साथ, डोमेस्टिक डिफेंस प्रोडक्शन को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
आइए इस सेक्टर आधारित आर्टिकल में हम भारत के डिफेंस सेक्टर का बारीकी से विश्लेषण करते है, जिसमें प्रोडक्शन और निर्यात, वर्तमान स्थिति और सरकारी पहल जैसे विभिन्न पहलु शामिल है।
स्वदेशी डिफेंस इंडस्ट्री का उदय
आजादी के बाद से कई दशकों तक, भारत अपने डिफेंस उपकरणों की आपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी आयात पर निर्भर था। जहां 1990 के दशक के मध्य तक, भारत अपने डिफेंस उपकरणों का लगभग 70% आयात करता था।
लेकिन हाल के वर्षों में, भारत सरकार ने डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता हासिल करने पर ज़ोर दिया है और ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहल स्वदेशी डिफेंस प्रोडक्शन को बढ़ावा देने और आयात कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया हैं।
इसके साथ ही, डिफेंस अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure – DAP) 2020 को इस तरह से संशोधित किया गया है कि डोमेस्टिक आपूर्तिकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के साथ इंडस्ट्री जगत के सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाएँ बनाई गई हैं।
भारतीय डिफेंस सेक्टर की वर्तमान स्थिति
भारत विश्व में चौथा ऐसा देश है जो डिफेंस पर सबसे ज्यादा खर्च करता है, भारत ने FY 2024-25 के अंतरिम बजट में डिफेंस सेक्टर के लिए 74.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानि ₹6,21,540.85 करोड़ आवंटित किए थे। यह केंद्रीय बजट का लगभग 13.04% था, जिसकी घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2024 को संसद में की थी। इसके साथ ही, पिछले एक दशक में सैन्य खर्च दोगुना से अधिक हो गया है, जो राष्ट्र की डिफेंस क्षमता को बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ने के कमिटमेंट को दर्शाता है।
भारतीय डिफेंस प्रोडक्शन और निर्यात
प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो (PIB) के अनुसार, FY 2023-24 में, डोमेस्टिक डिफेंस प्रोडक्शन ₹1.27 लाख करोड़ रहा, यह न सिर्फ पिछले वर्ष की तुलना में 16.7% की ग्रोथ है बल्कि 2019-20 की तुलना में 60% की ग्रोथ को दर्शाता है। यह आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

यह FY17 से FY24 के बीच भारत द्वारा अन्य देशों में किए गए डिफेंस एक्सपोर्ट को दर्शाता है।
हालाँकि, भारत अभी भी ग्लोबल स्तर पर हथियारों का सबसे बड़ा आयातक देश है। लेकिन निर्यात भी 32.5% की ग्रोथ के साथ अब तक के उच्चतम US$ 2.5 बिलियन (₹21,083 करोड़) पर पहुंच गया है। यह पिछले वर्ष के 1.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर (15,920 करोड़ रुपये) की तुलना में उल्लेखनीय प्रगति है। इसके साथ ही यह आंकड़ा 2016-17 के बाद से डिफेंस निर्यात में लगभग 14 गुना ग्रोथ और 45.6% की CAGR ग्रोथ को दर्शाता है।
डिफेंस सेक्टर को बढ़ावा देने वाली सरकारी पहल
भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सरकार की कई महत्वपूर्ण पहलें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आइए, इनमें से कुछ पहलों पर एक नजर डालते हैं:
डिफेंस प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी 2020: यह पॉलिसी डिफेंस प्रोडक्शन क्षमताओं और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लायी गयी थी।
डिफेंस अधिग्रहण प्रक्रिया 2020: यह पॉलिसी ‘मेक इन इंडिया’ पहल के माध्यम से डोमेस्टिक इंडस्ट्री को मजबूत बनाने का प्रयास करती है। साथ ही FDI को आकर्षित करने और विदेशी कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची: यह सूची भारतीय सशस्त्र बलों, जिसमें सेना, नौसेना और वायु सेना शामिल हैं, को डिफेंस क्षेत्र के लिए विशिष्ट उपकरणों को डोमेस्टिक कंपनियों या DPSUs से खरीदने के लिए बाध्य करती है। इससे न केवल आयात खर्च कम होता है बल्कि डिफेंस क्षेत्र में MSMEs को भी बढ़ावा मिलता है।
R&D तथा MSMEs को बढ़ावा देने के लिए पहल: सरकार ने स्वदेशी डिफेंस उपकरणों के डेवलपमेंट को प्रोत्साहित करने के लिए ‘मेक- I’, ‘टेकनोलॉजी डेवलपमेंट फंड’ (TDF) और ‘इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सिलेंस’ (iDEX) जैसी स्कीम्स के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
डिफेंस कॉरिडोर्स: डिफेंस और एयरोस्पेस प्रोडक्ट्स के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो डिफेंस कॉरिडोर्स स्थापित किए गए हैं। इन कॉरिडोर्स यानि गलियारों में अब तक कुल 4.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश हो चुका है।
मेक प्रोजेक्ट्स: इसका उद्देश्य स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करना और भारतीय कंपनियों को डिफेंस उपकरणों के डिजाइन और डेवलपमेंट को प्रोत्साहित करना है।
भारतीय डिफेंस सेक्टर में अग्रणी कंपनियां
भारत डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें कई प्रमुख भारतीय कंपनियां अहम भूमिका निभा रही हैं। आइए, कुछ प्रमुख डिफेंस कंपनियों पर एक नजर डालते हैं:

यह टेबल बीते वर्षों में डिफेंस सेक्टर्स से जुडी कुछ कंपनियों के प्रदर्शन को दर्शाता है।
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL): 1954 में स्थापित, यह कंपनी भारतीय डिफेंस के लिए विशेष इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स का निर्माण करती है।
भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL): 1970 में स्थापित, यह कंपनी गोला बारूद और मिसाइल प्रणालियों के निर्माण में अग्रणी है।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL): 1940 में स्थापित, यह कंपनी ग्लोबल स्तर पर विमान और डिफेंस उपकरणों के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक है।
पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड: यह कंपनी डिफेंस, एयरोस्पेस और स्पेस टेक्नोलॉजी में अग्रणी है और यह इनोवेटिव समाधान और एडवांस तकनीकों पर फोकस करती है।
डाटा पैटर्न्स (इंडिया) लिमिटेड: यह कंपनी डिफेंस और एयरोस्पेस में उपयोग होने वाले इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड और सिस्टम्स का निर्माण करती है जो डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी लिमिटेड: यह कंपनी सुरक्षा और निगरानी के लिए मानव रहित हवाई वाहन (UAV) सिस्टम्स का निर्माण करती है।
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL): 1934 में मुंबई में स्थापित यह कंपनी एक प्रमुख जहाज निर्माण शिपयार्ड है। 1960 में सरकारी नियंत्रण में आने के बाद से, इसने 802 जहाजों का निर्माण किया है, जिनमें 28 युद्धपोत और 7 पनडुब्बियां शामिल हैं।
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL): 1972 में स्थापित, यह कंपनी पिछले 3 दशकों में भारतीय जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत इंडस्ट्री में एक प्रमुख प्लेयर बनकर उभरी है। यह शिपयार्ड भारत में सबसे बड़े जहाजों का निर्माण और मरम्मत करने में सक्षम है।
भारतीय डिफेंस सेक्टर का भविष्य
रक्षा मंत्रालय ने 2025 तक एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में $26 बिलियन के कारोबार का लक्ष्य रखा है, जिसमें 5 बिलियन का निर्यात शामिल है। यह लक्ष्य न सिर्फ भारत को डिफेंस आयात कम करने में मदद करेगा बल्कि देश को एक प्रमुख डिफेंस निर्यातक के रूप में भी स्थापित करेगा। इसके साथ ही, 2025−2027 में डोमेस्टिक इंडस्ट्री के लिए रक्षा मंत्रालय लगभग US 57.2 बिलियन (₹4 लाख करोड़) की वैल्यू के संभावित कॉन्ट्रैक्ट मिलने का अनुमान लगा रहा है। इतना ही नहीं, रक्षा मंत्रालय ने 2027 तक हथियारों में 70% आत्मनिर्भरता हासिल करने का लक्ष्य भी रखा है। ये सभी आंकड़े डिफेंस सेक्टर में भारतीय उद्योग जगत के लिए अपार संभावनाओं का संकेत देते हैं।
डिफेंस प्रोडक्शन में प्राइवेट क्षेत्र की भूमिका को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन चैनल स्टेटस पॉलिसी (GCS) भी लागू की गई है। यह नीति प्राइवेट क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करेगी और डिफेंस प्रोडक्शन में उनकी भागीदारी को आसान बनाएगी।
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*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर