जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की आशंका और सेकेंडरी मार्केट में अनिश्चितता बनी हुई है, ऐसे माहौल में प्राइमरी मार्केट में एक अहम IPO लॉन्च देखने को मिला – वो भी एक लंबे ब्रेक के बाद। इसी बीच, EY की एक ताजा रिपोर्ट में 2025 की पहली तिमाही के लिए वैश्विक और भारतीय IPO ट्रेंड्स को साझा किया गया है, जिसमें भारत की शानदार स्थिति सामने आई है।
इस संदर्भ में यह समझना ज़रूरी है कि क्या IPO में आई सुस्ती अब खत्म होने की कगार पर है?
क्या है मामला?
EY की रिपोर्ट के अनुसार, Q1 2025 (जनवरी–मार्च) में दुनियाभर में कुल 291 IPO लॉन्च हुए, जिनमें से 62 IPO भारत में (NSE और BSE पर) लिस्ट हुए। यानी दुनियाभर के कुल IPO का 22% हिस्सा भारत से आया।

2025 की शुरुआत में भारत IPO लॉन्च की संख्या के मामले में दुनिया में सबसे आगे रहा, कई बड़े देशों को पीछे छोड़ते हुए।
इस तिमाही में भारतीय कंपनियों ने 62 IPO के ज़रिए $2.8 बिलियन जुटाए। हालांकि यह राशि वैश्विक स्तर के $29.3 बिलियन के मुकाबले कम है, फिर भी भारत IPO रेज़िंग में चौथे स्थान पर रहा — अमेरिका (NASDAQ और NYSE) और टोक्यो के बाद।

IPO से जुटाई गई कुल वैश्विक पूंजी में भारत की हिस्सेदारी 10% रही।
हालांकि, अगर पिछले साल की तुलना करें, तो Q1 CY24 में 82 IPO हुए थे, और इस बार इसमें 20% की गिरावट देखी गई। साथ ही BSE सेंसेक्स में भी इस तिमाही में 1.1% की गिरावट आई, जो निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।
मुनाफ़े वाले IPO, लेकिन बाज़ार का मूड ठंडा
Q1 CY25 में भारत में जिन कंपनियों ने IPO लाया, उनमें से ज़्यादातर फायदे में चल रही थीं। लेकिन इसके बावजूद पहले दिन की लिस्टिंग पर निवेशकों का जोश कमज़ोर रहा।
EY की रिपोर्ट के अनुसार, इस तिमाही में भारत में 90% IPO लाने वाली कंपनियां मुनाफे में थीं — जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह आंकड़ा 56% था। वहीं अमेरिका में यह संख्या 29% से बढ़कर 59% हो गई।

Q1 CY25 में भारत के IPO बाज़ार में नई लिस्टिंग्स अधिक लाभकारी रहीं, लेकिन पहले दिन निवेशकों की प्रतिक्रिया फीकी रही।
लेकिन भारत में पहले दिन सकारात्मक रिटर्न देने वाले IPO की संख्या घटकर 63% रह गई — जबकि पिछले साल यह 83% थी। यानी मुनाफे में चल रही कंपनियों के IPO लाने के बावजूद, निवेशक अब ज़्यादा सोच-समझकर कदम उठा रहे हैं।
सेक्टर की बात और खुदरा निवेशकों की भागीदारी
EY की रिपोर्ट के मुताबिक, हेल्थकेयर सेक्टर में IPO की जबरदस्त सक्रियता देखने को मिली। निवेशकों का भरोसा इस सेक्टर में बढ़ता दिखा।
EY इंडिया के पार्टनर प्रशांत सिंघल ने कहा कि Q1 2025 में जुटाई गई पूंजी भारत के कैपिटल मार्केट की मजबूती दिखाती है। उन्होंने यह भी बताया कि रिकॉर्ड स्तर पर हुए मर्जर और एक्विजिशन (M&A) इस बाज़ार की परिपक्वता को दर्शाते हैं। इसमें घरेलू और विदेशी, दोनों तरह के निवेशकों की भागीदारी तेज़ी से बढ़ रही है।
इसके अलावा, एक और अहम ट्रेंड रहा – खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी। बेहतर मुनाफे और भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसे ने आम निवेशकों को भी IPO में दिलचस्पी लेने के लिए प्रेरित किया है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
ट्रेड वॉर और टैरिफ तनावों के समय (ट्रंप काल के दौरान), दुनियाभर के बाज़ार दबाव में थे, जिसमें भारत भी शामिल था। लेकिन अब जैसे-जैसे वो अनिश्चितता कम हो रही है, बाज़ार संभलने लगे हैं — और भारत की रिकवरी सबसे तेज़ रही।
कई कंपनियों ने बाज़ार में गिरावट के चलते IPO की योजनाएं टाल दी थीं, क्योंकि वो सस्ते वैल्यूएशन पर पूंजी नहीं जुटाना चाहती थीं। अब वह ट्रेंड बदलता दिख रहा है।
उदाहरण के लिए, एथर एनर्जी (Ather Energy) मई में अपने IPO के साथ बाज़ार में उतरने को तैयार है। इसके अलावा SME सेगमेंट में भी कई लिस्टिंग्स की तैयारी चल रही है, जो प्राइमरी मार्केट की सक्रियता को दर्शाता है।
भविष्य की बातें
Q1 की मज़बूत शुरुआत ने आगे की तिमाहियों के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है, हालांकि निवेशकों में अभी भी कुछ हद तक सतर्कता बरकरार है। अभी कई कंपनियां IPO लाने की तैयारी में हैं, जिससे आने वाले महीनों में प्राइमरी मार्केट में हलचल बनी रहने की उम्मीद है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने अप्रैल में एक बार फिर नेट खरीदारी शुरू की — इससे पहले उन्होंने ₹35,000 करोड़ की बिकवाली की थी। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार बाज़ार में भरोसा बनाए रखा और खरीदारी जारी रखी। हालांकि, अगर साल-दर-साल तुलना करें, तो FIIs अब भी ₹1.37 लाख करोड़ की बिकवाली के साथ नेट सेलर बने हुए हैं, जबकि DIIs ने ₹2.04 लाख करोड़ की खरीदारी की है।
भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और निवेशकों की बढ़ती भागीदारी इसे विदेशी और घरेलू कंपनियों के लिए IPO के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाती है।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर