SEBI बदल सकता है ऑप्शंस ट्रेडिंग के नियम? जानें

SEBI बदल सकता है ऑप्शंस ट्रेडिंग के नियम, जानें?
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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने हाल ही में इंडेक्स ऑप्शंस ट्रेडिंग पर अपनी प्रस्तावित सीमाओं को नरम करने की योजना की घोषणा की है। यह कदम डेरिवेटिव्स मार्केट में बढ़ती गतिविधियों और निवेशकों की चिंताओं को संतुलित करने के लिए उठाया गया है। भारत में इक्विटी डेरिवेटिव्स, विशेष रूप से इंडेक्स ऑप्शंस, कैश मार्केट की तुलना में असाधारण रूप से काफी बड़ा हैं, और SEBI का लक्ष्य मार्केट की स्थिरता, निवेशक संरक्षण, और ट्रेडिंग की सुविधा के बीच संतुलन बनाना है।

इस आर्टिकल में, हम SEBI के इस कदम के विभिन्न पहलुओं, इसके प्रभावों, और भविष्य के दृष्टिकोण पर चर्चा करेंगे।

क्या है मामला?

SEBI इंडेक्स ऑप्शंस में किसी ट्रेडर या एंटिटी के लिए नेट पोजीशनल लिमिट को 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,500 करोड़ रुपये (कॉल और पुट दोनों पक्षों के लिए) करने पर विचार कर रहा है, जिसमें सभी पोजीशंस की कुल वैल्यू यानी ग्रॉस लिमिट 10,000 करोड़ रुपये होगी।

इंट्रा-डे ट्रेडिंग को इन सीमाओं से छूट मिलने की संभावना है, लेकिन एक मजबूत निगरानी प्रोटोकॉल लागू किया जाएगा। इस प्रोटोकॉल के तहत, एक्सचेंज और SEBI दिन में चार बार इंट्रा-डे पोजीशन की निगरानी करेंगे। यदि किसी ट्रेडर की एक्सपोजर सीमा से अधिक हो जाती है, तो SEBI मार्केट में हेरफेर की जांच करेगा।

SEBI की नीतियों में संशोधन

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) फरवरी में प्रस्तावित इक्विटी फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग पर कुछ प्रतिबंधों को मार्केट सहभागियों के विरोध के बाद ढील देने की संभावना है।

फरवरी के सर्कुलर में, SEBI ने बड़े प्लेयर्स द्वारा मार्केट नियंत्रण को रोकने के लिए ऑप्शंस के लिए 500 करोड़ रुपये और फ्यूचर्स के लिए 1,500 करोड़ रुपये की पोजीशन सीमा तय की थी। ब्रोकर्स और ट्रेडर्स ने इसे प्रतिबंधात्मक बताते हुए मार्केट लिक्विडिटी पर असर की चिंता जताई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, SEBI द्वारा नियुक्त एक पैनल ने इंडेक्स और सिंगल-स्टॉक डेरिवेटिव्स पर सीमाओं को शिथिल करने और ट्रेडिंग सीमा उल्लंघन पर दंड लगाने के सुझाव को हटाने की सिफारिश की है। हालांकि, फ्यूचर्स और ऑप्शंस के ओपन इंटरेस्ट या बकाया पोजीशन की गणना के तरीके में बदलाव का योजना बरकरार रहेगी।

फ्यूचर्स सेगमेंट में, संशोधित पोजीशनल सीमाएं विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs), म्यूचुअल फंड्स, प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स जैसे बाजार सहभागियों की श्रेणी के आधार पर निर्धारित की जा सकती हैं। ट्रेडिंग सदस्यों के लिए कुल पोजीशन कैप, जिसमें क्लाइंट और प्रोप्राइटरी पोजीशंस शामिल हैं, को भी बढ़ाया जा सकता है।

हाल के बदलाव और मार्केट प्रतिक्रिया

SEBI ने फरवरी 2025 में डेरिवेटिव्स सेगमेंट में जोखिम मेट्रिक्स को रियल मार्केट एक्सपोजर के साथ संरेखित करने के लिए उपायों का प्रस्ताव दिया था। जनता से प्राप्त फीडबैक के आधार पर, SEBI ने अपनी नीतियों में बदलाव किए, जिसमें इंडेक्स ऑप्शंस की सीमाओं को ढील देना शामिल है।

पहले लागू किए गए प्रतिबंधों, जैसे कि नवंबर 2024 में न्यूनतम कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू को 15 लाख रुपये तक बढ़ाना और प्रति एक्सचेंज साप्ताहिक समाप्ति को एक तक सीमित करना, ने ट्रेडिंग वॉल्यूम को प्रभावित किया था।

इसके परिणामस्वरूप, इंडेक्स ऑप्शंस का वॉल्यूम (प्रीमियम के संदर्भ में) 15% YoY कम हुआ, लेकिन यह दो साल पहले की तुलना में 11% अधिक है। इसी तरह, व्यक्तिगत ट्रेडर्स की भागीदारी 5% YoY कम हुई, लेकिन 2022 की तुलना में 34% अधिक है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

नई नीति निवेशकों, विशेष रूप से बड़े और संस्थागत ट्रेडर्स के लिए कई लाभ ला सकती है। बढ़ी हुई नेट लिमिट (1,500 करोड़ रुपये) और ग्रॉस लिमिट (10,000 करोड़ रुपये) ट्रेडर्स को बड़े पोजीशन लेने की अनुमति देगी, जिससे बड़े पोर्टफोलियो के लिए हेजिंग आसान हो जाएगी। इससे मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ेगी और बिड-आस्क स्प्रेड कम होंगे, जिससे ट्रेडिंग लागत में कमी आएगी।

इंट्रा-डे ट्रेडिंग पर कैप न होने से ट्रेडर्स को दिन के दौरान अधिक फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी, जो हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) और एल्गो ट्रेडर्स के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा। SEBI की सख्त निगरानी यह सुनिश्चित करेगी कि मार्केट में हेरफेर या अत्यधिक जोखिम न हो।

भविष्य की बातें

SEBI का यह कदम भारत के डेरिवेटिव्स मार्केट में संतुलन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पहले के प्रतिबंधों ने ट्रेडिंग वॉल्यूम को कुछ हद तक कम किया था, लेकिन मार्केट अभी भी दो साल पहले की तुलना में काफी बड़ा है। SEBI की डेटा-आधारित नीतियां और सख्त निगरानी मार्केट की स्थिरता को बढ़ावा देगी और निवेशकों का विश्वास मजबूत करेगी।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि पहले के हस्तक्षेपों के बावजूद इंडेक्स ऑप्शंस में उच्च गतिविधि से SEBI चिंतित है। नवीनतम सुधार ट्रेडिंग दक्षता और सख्त जोखिम नियंत्रण के बीच संतुलन बनाने का लक्ष्य रखते हैं।

*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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