भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) योजना को मार्च 2028 तक बढ़ा दिया है। जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक बस, ट्रक और एम्बुलेंस जैसे बड़े सेगमेंट को प्रोत्साहन देना है। हालांकि, सरकार ने कुछ सेगमेंट में एक तय समय सीमा के बाद खत्म करने का निर्णय लिया है।
आइए समझते हैं कि PM ई-ड्राइव इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर को कैसे गति दे रही है और निवेशकों के लिए स्कीम में एक्सटेंशन क्या मायने रखता है।
क्या है मामला?
भारी उद्योग मंत्रालय ने 1 अक्टूबर 2024 को PM ई-ड्राइव योजना शुरू की थी, जिसने अप्रैल से सितंबर 2024 तक चली इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम 2024 (EMPS-2024) की जगह ली। इस योजना को अब 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है, लेकिन इसमें कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

इस विस्तार के तहत ₹10,900 करोड़ का फंड जारी किया गया है, जिसमें से ₹9,500 करोड़ बड़े इलेक्ट्रिक बस, ट्रक और विशेष उपयोग वाले वाहनों जैसे एम्बुलेंस के लिए प्रोत्साहन पर खर्च होगा। इसके अलावा, ₹1,400 करोड़ का उपयोग EV चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और संबंधित सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।
स्कीम के प्रमुख घटक
सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। 500 करोड़ रुपये की राशि इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस के लिए आवंटित की गई है, और इसकी गाइडलाइन्स 2026 की शुरुआत तक आने की उम्मीद है। साथ ही, 40 लाख से अधिक आबादी वाले 9 बड़े शहरों में इलेक्ट्रिक बसें तैनात की जाएंगी।
सिर्फ इतना ही नहीं, इस योजना के तहत, 3,679 करोड़ रुपये दोपहिया (2W), तिपहिया (3W), एम्बुलेंस और ट्रक्स जैसे वाहनों के लिए डिमांड इंसेंटिव्स पर खर्च किए जाएंगे। वहीं, 7,171 करोड़ रुपये का बजट ई-बस, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और टेस्टिंग अपग्रेड के लिए निर्धारित किया गया है।
EV सेक्टर पर संभावित असर
सरकार ने घोषणा की है कि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के लिए सब्सिडी 31 मार्च 2026 को समाप्त हो जाएगी। फिलहाल इन वाहनों पर ₹5,000 प्रति kWh की प्रोत्साहन राशि मिल रही है, जो FY2026 में घटकर ₹2,500 प्रति kWh रह जाएगी, और यह वाहन की एक्स-फैक्ट्री प्राइस के अधिकतम 15% तक सीमित होगी।
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, ARC इलेक्ट्रिक के CEO व को-फाउंडर अभिनव कालिया ने स्कीम को FY28 तक बढ़ाने के फैसले को बस, ट्रक और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उनके अनुसार, प्रस्तावित 88,500 चार्जिंग स्टेशन अगर मेट्रो शहरों से बाहर भी लागू किए जाएं तो यह EV इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। हालांकि, EV मेकर्स के लिए टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर की सब्सिडी खत्म होने के बाद मार्केट में किफायती दाम और आसान पहुंच सुनिश्चित करना सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
EV और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े स्टॉक्स में लंबी अवधि के निवेश के अवसर बढ़ सकते हैं। चार्जिंग स्टेशन मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी सप्लाई चेन, और इलेक्ट्रिक बस मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां इस नीति विस्तार से सीधे फायदा हो सकती हैं।
इसके अलावा, सरकार का स्पष्ट संकेत है कि वह सार्वजनिक और कमर्शियल EV सेगमेंट में मजबूत हस्तक्षेप करने के लिए तैयार है। इसका मतलब है कि निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जिनके पास बड़े EV प्रोजेक्ट्स के लिए तैयार प्रोडक्ट लाइन है और जो सरकारी टेंडर्स में भाग ले रही हैं।
हालांकि, टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर से सब्सिडी हटने का असर उन कंपनियों पर नकारात्मक हो सकता है जिनका बिजनेस मॉडल इस सहायता पर अत्यधिक निर्भर है। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे कंपनियों के रेवेन्यू स्रोत और प्रोडक्ट मिक्स का बारीकी से मूल्यांकन करें।
भविष्य की बातें
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, भविष्य में PM E-DRIVE स्कीम EV सेक्टर को ट्रांसफॉर्म करेगी, जहां 88,500 चार्जिंग साइट्स (मेट्रो सिटीज से आगे) गेम-चेंजर साबित होंगी। E-3W L5 कैटेगरी में ट्रैक्शन बढ़ रहा है, जैसा आयुष लोहिया, CEO, YOUDHA, ने कहा कि पहले वर्ष में ₹50,000 और दूसरे वर्ष में ₹25,000 की इंसेंटिव्स से बायर्स और OEMs मोटिवेटेड हैं।
अभिनव कालिया ने नोट किया कि 2026 के बाद सब्सिडी-लाइट इकोसिस्टम में अफोर्डेबिलिटी और एक्सेस क्रिटिकल होंगे।
सिर्फ इतना ही नहीं, फिलहाल कुल फंड्स के आधे से ज्यादा अनयूज्ड हैं, जो आगे ग्रोथ सपोर्ट करेंगे। यह स्कीम भारत को सेल्फ-रिलायंट EV इकोनॉमी बनाएगी, ट्रेड टेंशन्स के बीच, और उत्सर्जन में 42% योगदान वाले डीजल ट्रक्स को रिप्लेस करेगी। कुल मिलाकर, यह सस्टेनेबल मोबिलिटी की दिशा में मजबूत कदम है, जो EV एडॉप्शन को 28,87,079 वाहनों तक ले जाएगा।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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