ग्लोबल अनिश्चितता के दौर में भी, भारतीय अर्थव्यवस्था एक मजबूत स्तंभ के रूप में अपनी स्थिति बनाए हुए है। इस असाधारण प्रदर्शन का एक सबसे बड़ा और सबसे मजबूत स्तंभ है भारत का डोमेस्टिक कंजम्पशन। भारत की विशाल और युवा आबादी, बढ़ती आय, तेज शहरीकरण और आसान ऋण उपलब्धता जैसे फैक्टर्स इस कंजम्पशन को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।
भारतीय कंजम्पशन में तेजी सिर्फ शॉर्टटर्म उछाल नहीं है, बल्कि एक लॉन्गटर्म, संरचनात्मक बदलाव है, जो भारत को दशकों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाए रखने का दम रखता है।
आइए समझते है कि भारत की कंजम्पशन स्टोरी कैसे भारत को दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना दिया है। साथ ही जानें इससे किन सेक्टर्स को बूस्ट मिल रहा है।
क्या है मामला?
भारत की आर्थिक वृद्धि का सबसे बड़ा इंजन इसका डोमेस्टिक कंजम्पशन है, जो GDP का लगभग 60% हिस्सा बनाता है। यही कारण है कि ग्लोबल अस्थिरता के दौर में भी डोमेस्टिक डिमांड भारतीय अर्थव्यवस्था को झटकों से बचाती है।
IMF के अनुसार, भारत 2026 में 6.6% की ग्रोथ दर हासिल करेगा, जबकि चीन की दर 4.8% रहने की उम्मीद है। इसके विपरीत, ग्लोबल अर्थव्यवस्था की ग्रोथ 2024 के 3.3% से घटकर 2026 में 3.1% तक सीमित रह सकती है। यह अंतर बताता है कि भारत की मजबूती उसके भीतर से आने वाली डिमांड पर आधारित है।
इस तेजी के पीछे एक बड़ा कारण है भारतीयों का लगातार बढ़ता कंजम्पशन, जो अब केवल ज़रूरतों तक सीमित न होकर प्रीमियम और डिस्क्रिशनरी प्रोडक्ट्स तक फैलता जा रहा है।
कंजम्पशन का नया अध्याय
भारत में प्रति व्यक्ति आय FY25 में $2,600 पार कर चुकी है और FY2030 तक $5,000 पहुंचने का अनुमान है। इसी अवधि में नॉन-एसेंशियल खर्चों का हिस्सा 36% से बढ़कर 43% हुआ है जो बढ़ते प्रीमियमीकरण और समृद्ध मध्यम वर्ग का संकेत है।
इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, इक्विटी व रियल एस्टेट में तेजी और ‘वेल्थ इफेक्ट’ से परिवारों की खर्च करने की क्षमता बढ़ी है। शहरीकरण और न्यूक्लियर फैमिली के विस्तार ने आवास, परिवहन, शिक्षा और लाइफस्टाइल सेक्टर को नया आकार दिया है।
अब कंजम्पशन का ट्रेंड FMCG और ऑटोमोबाइल से आगे बढ़कर पर्सनल केयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, हेल्थ व फिटनेस की ओर झुक रहा है। उपभोक्ता अब सामान से अधिक अनुभवों जैसे यात्रा, डाइनिंग और आराम (Leisure) पर खर्च कर रहे हैं जिससे भारत में कंजम्पशन का दौर तेजी से बदल रहा है।
प्रीमियमाइज़ेशन और बदलती प्राथमिकताएँ
Franklin Templeton की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘प्रीमियमाइजेशन’ भारत की कंजम्पशन स्टोरी में नया अध्याय जोड़ रहा है। FY24 में प्रीमियम FMCG ने कुल बिक्री का 27% हिस्सा लिया लेकिन सेक्टर की ग्रोथ में इनका योगदान 42% रहा। जैसे प्रीमियम डिटर्जेंट्स ने 26% CAGR, प्रीमियम हेयर केयर ने 16% और ग्रीन टी ने 25% की वार्षिक ग्रोथ दर्ज की, जो कि अपने मास वैरिएंट्स से कहीं तेज है। ब्रांड्स जैसे HUL, डाबर, मैरिको, और ब्रिटानिया ने इन ट्रेंड्स को अच्छी तरह कैप्चर किया है।
इसी तरह, एप्लायंसेज़ और इलेक्ट्रॉनिक्स में प्रीमियम और एस्पिरेशनल प्रोडक्ट्स का हिस्सा FY24 में लगभग 50% था, जो 2029 तक 60% पहुँचने की उम्मीद है। एयर कंडीशनर की पेनेट्रेशन अभी भारत में मात्र 8% ही है (विश्व औसत – 42%), जिससे भविष्य में मार्केट के बढ़ने की काफी गुंजाइस है। ग्रामीण व छोटे शहरों में भी 2012 की तुलना में खर्च में 2.6 गुना इजाफा हुआ है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
भारत की कंजम्पशन थीम कोई शॉर्टटर्म ट्रेंड नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक निवेश अवसर है। यह बढ़ती आय, शहरीकरण और सामाजिक बदलाव जैसे लॉन्गटर्म फैक्टर्स पर आधारित है। सरकार और RBI की नीतियां जैसे टैक्स कटौती, GST सुधार, रेट कट्स और पे कमीशन संशोधन अगले कुछ वर्षों में इस ग्रोथ को और तेज़ कर सकती हैं।
यह थीम निवेशकों को FMCG, ऑटो, हेल्थकेयर, रिटेल, ट्रैवल और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे कई सेक्टर्स में भागीदारी का मौका देती है। थीमैटिक फंड्स इस पूरी उपभोग कहानी में डाइवर्सिफाइड रूप से निवेश करने का आसान माध्यम हैं।
हालांकि, इसमें शॉर्टटर्म उतार-चढ़ाव संभव हैं। निवेशकों को इस थीम में निवेश करते समय अपनी जोखिम क्षमता और लंबी अवधि के लक्ष्यों को ध्यान में रखना चाहिए।
भविष्य की बातें
भारत में कंजम्पशन का नया दौर डोमेस्टिक संपत्ति और वित्तीय आत्मविश्वास में आई मजबूती से जुड़ा है। Franklin Templeton के अनुसार, FY24 में डोमेस्टिक बचत ₹54 लाख करोड़ रही, जो 2030 तक ₹82 लाख करोड़ और 2035 तक ₹132 लाख करोड़ पहुंचने की उम्मीद है।

हालांकि शीर्ष 20% परिवार अब भी सबसे अधिक बचत करते हैं, लेकिन लोअर-मिडल क्लास तेजी से आगे बढ़ रही है इस वर्ग की बचत 2035 तक तीन गुना बढ़कर ₹26 लाख करोड़ होने का अनुमान है। बचत अब पहले से अधिक डाइवर्सिफाइड हो चुकी है। म्यूचुअल फंड्स का हिस्सा 10 साल पहले 2% से बढ़कर 5% हो गया है और अगले दशक में 8% तक पहुंचने की उम्मीद है। सितंबर 2025 में मासिक SIP इनफ्लो ₹29,361 करोड़ रहा, जो दर्शाता है कि भारतीय अब केवल अधिक नहीं, बल्कि नियमित रूप से बचत कर रहे हैं।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर